अखबार बेचने वाला युवक बना बैंक मैनेजर, गरीबी के कारण पिता करते हैं मजदूरी

अखबार बेचने वाला युवक बना बैंक मैनेजर, गरीबी के कारण पिता करते हैं मजदूरी

UP: अखबार बेचकर पढ़ाई की और बने बैंक मैनेजर, दिलचस्प है कहानी

कहते हैं मेहनत और लगन से किसी भी मंजिल तक पहुंचा जा सकता है, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के चकरनगर स्थित भारतीय स्टेट बैंक के उपशाखा प्रबंधक ईश्वर दयाल। ईश्वर दयाल के बैंक मैनेजर बनने की कहानी बहुत ही दिलचस्प है। ईश्वर के पिता दयाशंकर मजदूरी करते थे और माता ऊषा देवी गृहिणी हैं। चार बच्चों में ईश्वर दयाल दूसरे नंबर पर हैं। उन्होंने गांव के पुरावली जूनियर स्कूल से आठवीं तक की पढ़ाई की।

मजदूर पिता के लिए बच्चों को पढ़ाना मुश्किल था। इसलिए ईश्वर दयाल पढ़ाई पूरी करने के लिए कक्षा छठवीं से सुबह अखबार और ब्रेड बेचने लगे। अखबार बेचकर हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की। दसवीं के बाद वह बच्चों को ट्यूशन भी दिया करते थे। ईश्वर ने 2008 में जनता कॉलेज बकेवर से कृषि वर्ग में स्नातक किया। मेधावी होने के कारण उन्हें स्कॉलरशिप भी मिला। इसी के सहारे आगे की पढ़ाई की। उद्यान शास्त्र से परास्नातक और आगरा विश्वविद्यालय में बीएड के लिए प्रवेश किया। पढ़ाई के साथ प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने लगे। बीएड करने के दौरान ही स्टेट बैंक आॅफ इंडिया में स्पेशल आॅफिसर पद पर चयन हो गया। अब चकरनगर में शाखा में प्रबंधक हैं।

इस दौरान उन्होंने अपनी भाई-बहनों को भी पढ़ाया। ईश्वर दयाल न सिर्फ अपने गांव बल्कि अपने क्षेत्र के लिए भी प्रेरणा स्रोत है। ईश्वर दयाल ने अपनी कामयाबी के बारे में कहा, ‘मैंने कभी भी नहीं सोचा था कि वो इस मुकाम पर पहुंचेंगे, लेकिन मेहनत से कभी पीछे नहीं हटे, इसलिए यह कामयाबी मिली।’

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