बिहार की बेटी का जलवा,अमेजन ने भागलपुर की शेफालिका को दिया 1.10 करोड़ का सैलरी पैकेज

बिहार की बेटी का जलवा,अमेजन ने भागलपुर की शेफालिका को दिया 1.10 करोड़ का सैलरी पैकेज

अमेजन ने भागलपुर की बेटी शेफालिका को दिया 1.10 करोड़ का पैकेज

भागलपुर की बेटी शेफालिका की प्रतिभा देख अमेरिका को आमंत्रण देना पड़ा. अमेजन ने उन्हें 1.10 करोड़ रुपये के पैकेज में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट इंजीनियर के पद पर नियुक्ति दी है. पिछले चार महीने से वह अमेरिका की टेक्सास स्टेट की डेलस सिटी में अमेजन के कार्यालय में कार्यरत हैं.

यह सफलता शेफालिका को यूं ही नहीं मिल गयी, बल्कि इसके लिए उन्हें दिन-रात की मेहनत और लगातार संघर्ष करना पड़ा. शेफालिका ने बताया कि बचपन से ही कंप्यूटर से लगाव रहा है. आठवीं क्लास से ही कंप्यूटर पढ़ाई से गंभीरता से जुट गयी थी. उन्होंने बताया कि माउंट कार्मेल स्कूल से 10वीं व सेंट जोसेफ स्कूल से 12वीं पास की है.

अमेरिका में कंप्यूटर मास्टर डिग्री ली : दुर्गापुर से कंप्यूटर शिक्षा में बीटेक की डिग्री ली. इसके बाद चेन्नई में कंप्यूटर में मास्टर डिग्री के लिए तैयारी शुरू की.

इस दौरान एक कंपनी में पार्ट टाइम जॉब भी किया. इसी दौरान अमेरिका के एक कंप्यूटर शिक्षण संस्थान के इंटरव्यू में चेन्नई में भाग लिया. काफी मेहनत के बाद अमेरिका के कंप्यूटर शिक्षण संस्थान में उनका नामांकन हुआ. यहां कंप्यूटर की मास्टर डिग्री प्राप्त की. कैंपस से ही अमेजन कंप्यूटर कंपनी में जॉब मिला.

उन्होंने बताया कि पढ़ाई के क्रम में भी यहां भी पार्ट टाइम जॉब किया. भाग दौड़ की लाइफ होने के बाद भी शेफालिका शेखर सिंगिंग और डांसिंग करने का समय निकाल लेती हैं. उन्होंने बताया कि काम से समय मिलता है या दोस्तों के साथ रहते है, तो सिंगिंग व डांसिंग कर लेते हैं. बचपन से ही दोनों से जुड़ाव रहा. स्कूल के कार्यक्रम में भी भाग लिया करते थे.

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जिस विषय में रुचि हो उसी में करें पढ़ाई : शेफालिका कहती हैं कि छात्र-छात्राओं को जिस विषय में रुचि हो, उसी विषय में पढ़ाई करें. सैद्धांतिक चीजों से ज्यादा तकनीकी चीजों पर ज्यादा फोकस करे.

रटना जरूरी नहीं. कुछ ही घंटे पढ़ें, दिल से पढ़ें. पढ़ने के दौरान नकारात्मक चीजों पर ध्यान नहीं दें. पढ़ाई के क्रम में जॉब को लेकर ज्यादा नहीं सोचें. सिर्फ लक्ष्य तय हो और पढ़ाई के प्रति ईमानदार बने रहना जरूरी है. पढ़ाई के दौरान मां व पिता का काफी सपोर्ट रहा. जब घर में कोई काम करते थे, तो पिता पढ़ाई के लिए प्रेरित करते थे. मां भी पढ़ाई पर ध्यान रखने के लिए कहती थीं.

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