बिटिया तुम पर नाज है, बिहार की बेटी और देश की पहली महिला फाइटर पायलट भावना कंठ को सलाम

बिटिया तुम पर नाज है, बिहार की बेटी और देश की पहली महिला फाइटर पायलट भावना कंठ को सलाम

बिहार के दरभंगा जिले की भावना कंठ इस वक्त बीकानेर के नाल में तैनात हैं। भावना अपनी पोस्टिंग के बाद से परिवार के साथ कोई त्योहार नहीं मना सकी हैं। उनके छोटे भाई नीलांबर एमबीए कर रहे हैं। मथुरा रिफाइनरी में इलेक्ट्रिकल इंजीनियर तेज नारायण कंठ बताते हैं कि वायुसेना में चयन के बाद भावना ने भाई के लिए पहली बार राखी पोस्ट करके भेजी थीं। जब वह छुट्टियों में घर आईं तो भाई ने 1100 रुपये दिए। भावना ने उसमें और एक हजार रुपये जोड़कर भाई को वापस करते हुए कहा कि अब आपकी बड़ी बहन कमा रही है, इसलिए जब तुम कमाओगे तब लूंगी। भाई-बहन के रिश्ते पर वह बताते हैं कि भावना ने नीलांबर को हमेशा प्रोत्साहित किया है। रक्षाबंधन पर दोनों के बीच खूब खट्टी-मीठी नोकझोंक भी होती थी। भावना की एक छोटी बहन भी हैं तनूजा। वह बीटेक कर रही हैं।

मोहना सिंह हाल में हॉक जेट उड़ाने वाली पहली महिला फाइटर पायलट भी बनी हैं। मोहना का कोई भाई नहीं है। एक बहन नंदिनी है। राजस्थान के ’नीम का थाना’ से मोहना की ताई जी नीलावती ने बताया कि उनकी मां मंजू ने कभी ये नहीं समझा कि उनके कोई लड़का नहीं है। बेटियों को बेटों की तरह पाला। दोनों बहनें एक-दूसरे के भाई भी है। उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन पर बहनें एक-दूसरे को राखी बांधती थीं। अपने दादा और पिता की तरह मोहना ने भी वायुसेना का रास्ता चुना। मोहना के दादा लांस नायक लादूराम जाट भारत-पाक युद्ध में शहीद हो गए थे। उन्हें मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। जबकि उनके पिता प्रताप सिंह वायुसेना में वारंट ऑफिसर हैं। मोहना का परिवार 20 साल पहले राजस्थान स्थित झुंझनु में पापड़ा गांव से खतेहपुरा गांव में बस गया था।

मध्य प्रदेश के रीवा की अवनि चतुर्वेदी के लिए उनके भाई नीरव का बेहद खास स्थान है। वैसे तो अवनि जब 11 साल की थीं तभी से कल्पना चावला से प्रभावित होकर आसमान में उड़ने के सपने देखने लगी थीं। मगर वायुसेना में जाने की दिशा उन्हें नीरव से ही मिली। नीरव सेना में मेजर हैं। रीवा से अवनि के पिता दिनकर चतुर्वेदी ने कहा-संयोग है कि दोनों की पोस्टिंग इस वक्त राजस्थान के सूरतगढ़ में हैं। महज 10-15 किलोमीटर के फासले पर। ऐसे में उम्मीद है अवनी खुद नीरव को राखी बांध पाएंगी। अवनि के चयन के बाद से कभी रक्षाबंधन हम लोग साथ में नहीं मना पाए हैं। अवनि अपने भाई को खुद कार्ड बनाकर भेजती थीं। उन्होंने बताया कि नीरव अवनि से करीब साढ़े आठ साल बड़े हैं। ऐसे में वह उनके लिए एक अभिभावक के रूप में ज्यादा रहे हैं।

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