मोदी सरकार में निकला देश का ‘दिवाला’, 5 सालों में देश के 3.64 करोड़ लोग बेरोजगार

मोदी सरकार में निकला देश का ‘दिवाला’, 5 सालों में देश के 3.64 करोड़ लोग बेरोजगार

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बहुत दिनों बाद दैनिक भास्कर ने कोई ढंग की रिपोर्ट दी है आज फ्रंट पेज की लीड स्टोरी है ‘5 सालों में देश के 7 प्रमुख सेक्टर में 3.64 करोड़ लोग बेरोजगार, 7.1% बेरोजगारी दर’

भास्कर ने अलग-अलग सेक्टर के विशेषज्ञों से बात कर ओर इंडस्ट्री बॉडी और सरकारी रिपोर्ट्स का अध्ययन कर एक रिसर्च रिपोर्ट प्रस्तुत की है इस रिसर्च में सामने आया कि देश में बीते पांच सालों में 3.64 करोड़ नौकरियां सिर्फ 7 प्रमुख सेक्टर्स में ही जा चुकी हैं। इनमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार शामिल हैं।

सर्वाधिक टेक्सटाइल सेक्टर में अलग-अलग कारणों से पिछले पांच सालों में करीब 3.5 करोड़ लोग बेरोजगार हुए हैं। लेकिन इस रिपोर्ट में यह नही बताया गया कि पिछले साढ़े 5 सालो में सिर्फ टेक्सटाइल के क्षेत्र में इतनी ज्यादा नोकरिया कैसे चली गयी? कैसे टेक्सटाइल इंडस्ट्री का एक्सपोर्ट हर साल घटता ही जा रहा है?.क्यो इस इंडस्ट्री की एक तिहाई क्षमता भी कम हो गयी? क्यो टेक्सटाइल मिलें इस हैसियत में नहीं रह गई कि वो भारतीय कपास को खरीद सकें.

दरअसल यह सब मोदी सरकार द्वारा टेक्सटाइल के क्षेत्र में गलत नीतियों को अपनाने के कारण हुआ है

सरकार की गलत आर्थिक नीतियों के कारण टेक्सटाइल एक्सपोर्ट साल 2018 में गिरकर 37.12 अरब डॉलर रह गया। यह वर्ष 2014 में यह 38.60 अरब डॉलर था। यही नहीं, इस दौरान आयात 5.85 अरब डॉलर से बढ़कर 7.31 अरब डॉलर हो गया है। इसकी वजह बांग्लादेश के जरिए चीन द्वारा भारत में कपड़ा भेजना और जीएसटी समेत अन्य कानून हैं। इससे वस्त्र उद्योग को खासा नुकसान पहुंचा है और इस सेक्टर में बेरोजगारी भी बढ़ी है। एक्सपर्ट भी मानते हैं कि जीएसटी के क्रियान्वयन के बाद आयात शुल्क में काफी गिरावट देखी गई है जिसने सस्ते आयात को प्रोत्साहित किया है।

गुजरात का शहर सूरत भारत में बने सभी मानव निर्मित कपड़े का 40% उत्पादन करता है. GST लागू होने के 1 साल बाद यह रिपोर्ट आ गई थी कि कपड़ा कारोबारियों का कारोबार जीएसटी के बाद 40 फीसदी तक घट गया.सूरत में रोजाना 4 करोड़ मीटर सिंथेटिक कपड़े का उत्पादन हो रहा था, जो मात्र 1 साल में घटकर 2.5 लाख मीटर प्रतिदिन रह गया

सूरत के कपड़ा उद्योग साइजिंग, ट्विस्टिंग, प्रसंस्करण और बुनाई में जीएसटी से पहले 80 से 90 फीसदी रोजगार था जो 1 साल में ही घटकर 40 से 50 रह गया था जीएसटी लागू होने के बाद सूरत के किसी नए व्यापारी ने कपड़े का नया कारोबार शुरू नहीं किया, जबकि जीएसटी लागू होने से पूर्व सूरत में प्रतिमाह 200 नए व्यापारी दुकान शुरू करते थे.

सूरत में 6,50,000 पावरलूम हैं, जिनमें से 1,00,000 जीएसटी के लागू होने के बाद 1 साल में कबाड़ के रूप में बिक चुकी थे …….यही हाल देश भर में हुआ …….

टेक्सटाइल में बांग्लादेश का निर्यात भारत के निर्यात का 60 फीसदी हुआ करता था लेकिन अब यह उलट कर दोगुना हो चुका है। वियतनाम भी हमसे काफी आगे हो गया है। बांग्लादेश से आयात पर मूल सीमा शुल्क की पूरी छूट है और इसलिए चीन का कपड़ा आसानी से शुल्क मुक्त बांग्लादेश के जरिए भारत में आ रहा है विडंबना यह है कि बांग्लादेश कपास, धागा और कपड़ा भारत से आयात करता है। यानी बांग्लादेश का टेक्सटाइल उद्योग हमसे ही कच्चा माल ले रहा है और हमारे उद्योग को बर्बाद कर रहा है……..

भास्कर की खबर है कि अब टेक्सटाइल मंत्रालय ने नेशनल टेक्सटाइल पॉलिसी में गाइडलाइन बनाई है कि 2024-25 तक 300 अरब डॉलर का कपड़ा निर्यात करेंगे। नई तकनीक का प्रयोग बढ़ेगा जिससे लागत घटेगी।…… कोई पूछे कि यह काम पहले क्यो नही किया गया?..3.5 करोड़ लोगो को बेरोजगार बना देने की जिम्मेदारी किसकी है?

गिरीश मालवीय, वरिष्ठ पत्रकार

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