आपदा में अवसर तलाशने वाले प्रधानमंत्री, राष्ट्र को संबोधन के नाम पर बिहार चुनाव के लिए हवा दे रहे है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक वाक्य ने उनके मंगलवार के संबोधन का पूरी मिजाज बदल कर रख दिया। प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना का विस्तार अब दिवाली और छठ पूजा तक जारी रहेगी। प्रधानमंत्री ने ऐसी घोषणा कोविड-19 संक्रमण के कारण देश के गरीबों के सामने पैदा हुए संकट को देखते हुए की है।लेकिन उनके एक वाक्य ने पूरे संबोधन को राजनीतिक रंग दे दिया। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के वक्तव्य पर एक शेर के माध्यम से शायराना अंदाज में प्रतिक्रिया दी है। राहुल ने कहा कि-इधर उधर की बात न कर, ये बता कि काफिला कैसे लुटा। मुझे रहजनों से गिला तो है, पर तेरी रहबरी का सवाल है।

प्रधानमंत्री ने लिट्टी चोखा खाया था? कांग्रेस के एक नेता की सुनिए। पार्टी के पूर्व महासचिव का कहना है कि प्रधानमंत्री ने राजपथ पर हुनर हॉट में एक स्टाल पर जाकर लिट्टी-चोखा खाया था। सूत्र का कहना है कि वह लिट्टी चोखा नहीं खा रहे थे, बल्कि बिहार विधानसभा चुनाव को देखकर राजनीति को हवा दे रहे थे।

आज भी उन्होंने उसी राजनीति को हवा दी है। प्रधानमंत्री को पता है कि इस साल नवंबर महीने तक बिहार विधानसभा चुनाव प्रस्तावित है। कैलेंडर की तारीख के अनुसार छट पूजा 18 नवंबर को पड़ रही है। छठ बिहार के लोगों के लिए आस्था का पर्व है। समूचा पूर्वांचल छठी मइया की पूजा और सूर्य को अर्घ्य देता है।

इसलिए प्रधानमंत्री ने एक बार फिर इशारे-इशारे में राजनीति को हवा दे दी है। जबकि इसके सामानांतर वह लद्दाख में चीनी सैनिकों की घुसपैठ पर कुछ नहीं बोले। वह देश में बढ़ रही बेरोजगारी, पेट्रोल डीजल के दाम, मंहगाई को लेकर कहीं चिंतित नजर नहीं आए। उनके 16 मिनट के भाषण में सरकार की संवेदना की कहीं झलक नहीं दिखाई दी।

कैसे भूल सकते हैं 2015 का बिहार विधानसभा चुनाव? कांग्रेस पार्टी के पूर्व महासचिव कहते हैं कि चाहे भाजपा हो या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राजनीति के सिवा इन्हें आता क्या है? आज सरकार सभी मोर्चे पर फेल है। इसलिए संवेदनशील समय में भी राजनीति करना इनके लिए कोई नई बात नहीं है।

भाजपा के प्रवक्ता जहां इसे प्रधानमंत्री मोदी के दिल में गरीबों के हित का स्थान बता रहे हैं, वहीं कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री को पिछला बिहार विधानसभा का चुनाव नहीं भूल रहा है। यह चुनाव भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे दमखम के साथ लड़ा था। लेकिन भाजपा को महागठबंधन से करारी शिकस्त मिली थी।

कांग्रेस, राजद, जद(यू) के गठजोड़ ने राज्य में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। इसलिए प्रधानमंत्री मोदी ने अपने वक्तव्य के माध्यम से राजनीतिक हवा दी है। सूत्र का कहना है कि बिहार में सरकार से लोगों की नाराजगी काफी बढ़ी है। नीतीश कुमार सरकार की हालत ठीक नहीं है। इसलिए प्रधानमंत्री को इस तरह का सहारा लेना पड़ रहा है।

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