एखन तक शुरूए नै भेल अछि मैथिली वेब पत्रकारिता, आत्मप्रचार-शौक पुरेबा लेल चलाओल जा रहल वेब पोर्टल

कहबा लेल मैथिली वेब पत्रकारिता अपन एक दशक पूर्ण क लेलक अछि, मुदा ओ एखनो तक ठेहुनिया देब शुरू नहि केलक अछि। एक तरहे कहल जाय तं मैथिली मे एखन धरि वेब पत्रकारिता आरम्भे नहि भेल अछि। जो गोटे किछु न्यूज आ साहित्यिक पोर्टल चला रहल छथि ओ मात्र आत्म प्रचार या शौक पुरेबा लेल फुरसतक क्षण मे काज क रहला अछि। हिनका लोकनि मे व्यवहारिकताक घोर अभाव अछि। साहित्य आ फीचर पत्रकारिताक अंग थिक, मुदा एहि बले मेन स्ट्रीमक पत्रकारिता नहि कयल जा सकैत अछि। यैह कारण छैक जे मैथिली वेब पत्रकारिता एखनो पहचानक मोहताज अछि।

उपरोक्त स्टेटमेंट मैथिली साहित्यक युवा कवि आ साहित्य अकादेमी युवा पुरस्कार सं सम्मानित कवि चंदन कुमार झाक छनि। चंदन कुमार झाक आलेख विभिन्न पत्र-पत्रिका, वेब पोर्टल सभ मे छपैत रहैत छनि। ओ वेब पोर्टल मिथिमीडिया लेल सेहो किछु बरख धरि काज केने छथि। हिनका कार्यकाल मे कतेको इंटरव्यू प्रकाशित आ चर्चित भेल अछि।

मैथिली वेब पत्रकारिताक इतिहास आ वर्तमान विषय पर अपन विचार रखैत चंदन कुमार झा कहै छथि जे हमरा नजरि मे एकहु गोटे एहन नहि छथि जे फुल फेज मैथिली वेब पोर्टल लेल समर्पित भ क काज करथि होथि। हिनका सभक अपन-अपन विवशता हेतनि से संभव छैक, मुदा पत्रकारिता समय मंगैत छैक। मेहनत मंगै छै। जनता सं जुड़बा लेल फील्ड मे उतरय पड़ैत छैक आ नव पहचान बनबए पड़ैत छैक।

वर्तमान युग डीजिटल मीडियाक हेबाक बादो मैथिली वेब मीडिया किएक नहि सफल भ पाबि रहल छै एहि प्रशन पर जवाब दैत चंदन झा कहै छथि जे हमरा जनता मैथिली वेब पोर्टल एखन तक अपन रिवेन्यू माडल नहि जेनरेट क सकल अछि। यैह कारण छैक लोक एहि दिस निराशाक भाव रखै छथि। जाहि जोश आ जज्बाक संग काज कयल जेबाक बेगरता छैक तकर पुर्ति नहि भ पबैत छैक। वर्तमान समय मे कतेको न्यूज पोर्टल छैक जे क्राउड फंडिंग सं संचालित होइ छैक। ओकर पाठक ओकरा लेल दाना दाता बनि सोझा अबै छै। अपना क्षमता अनुसार पैसा डोनेट करै छै, मुदा एहि लेल जाहि तरहक प्राथमिक इनवेस्टमेंट करय पड़ैत छैक तकर घोर अभाव छैक मैथिली वेब पत्रकारिता मे। जखन एकटा प्रापर चैनलक तहत अहां काज करबै तं संभव छैक जे छह माह या साल भरि बाद अहांक पहचान बनि सकय।

की मैथिली वेब पत्रकारिता मे रीडरक घोर अभाव छैक: जं हमर व्यक्तिगत अनुभवक बात करब तं हम एहि बात सं सहमत नहि छी। हम जखन मिथिमीडियाक संग जुड़ि क काज करैत रही आ रिपोर्ट प्रकाशित करैत रही तं पांच-दस दिन में हजारों लोक ओहि लिंक पर क्लिक करथि। संभव रहल हेतैक जे कोनो आलेख दू चारि हजार बेर क्लिक भेल होइ आ इहो संभव छैक जे कोनो-कोनो पच्चीस-पचास हजार सेहो गेल होइ।

की मिथिमीडिया अपन खर्चा निकालि लैत छलैक: गुगल एडसेंस सं किछु पाई आयल हेतैक वा नहि से कहब मुश्किल छैक, मुदा एतेक स्पष्ट छैक वेब साइटक निर्माण, डोमेन, हास्टिंगक पूर्ण खर्च रूपेश त्यौंथ केने छलाह। बाद बाकी जं कोनो साहित्यकार या कोनो सेलिब्रिटी जिनक इंटरव्यू हमरा लोकनि करैत रही ओ अपना-अपना पाकेटक खर्च पर होइत छल। अधिकांश इंटरव्यू फोनिक या आनलाइन होइत छल, मुदा कखनो-कखनो कलकत्ताक अंदर जाय पड़ैत छलैक। ताहि समय कवि भाष्कर झा सेहो हमरा सभक संग जुड़ल रहथि

एखन केहन छैक वर्तमान: दस या सात साल पूर्व मैथिली वेब पत्रकारिताक जे स्थिति छलैक वैह लगभग एखनो छैक। कोनो खास परिर्वतनक उम्मीद करब बेकार छैक। कहक नहि चाही, मुदा हम एक टा हार्ड वर्ड प्रयोग क रहल छी। मानि लेल जाय जे वेब पोर्टलक संचालकक परिवार मे कोनो शुभ या अशुभ घटना भ जाय तं डैशबोर्डक यूजर आईडी आ पासवर्ड तक ककरो ज्ञात नहि हेतैक। कहबाक तात्पर्य जे मैथिली न्यूज पोर्टल वन मैन आर्मी वल शो अछि।

सच स्वीकार करथु पोर्टल संचालक: चंदन झा वार्ताक अंत में कहै छथि जे हमरा जनैत एखन तक जे कियो पोर्टल चला रहल छथि हुनका सभकें ई स्वीकार क लेबाक चाही जे हम न्यूज पोर्टल नहि भ क साहित्यिक पोर्ट छी। हमरा एहि पोर्टलसं आमदनी परिवार चलेबाक जोगर अबैत अछि या नहि अबैत अछि। जं नहि अबैत अछि तं इहो कहबाक चाही जे हम रिवेन्यू माडल बनेबा मे असफल रहलौ।

-नोट: कवि चंदन कुमार झा सं ई इंटरव्यू Dailybihar.com केर संस्थापक रोशन झा लेलनि अछि

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