चिलम पीने वाला साधु नहीं हो सकता, नशा करने वाले हर शख्स को मिलनी चाहिए सजा: रामदेव

बॉलीवुड में ड्रग्स मामले का खुलासा होने के बाद से देश में तरह-तरह के नशे को लेकर बहस जारी है. एक सवाल उठ रहा है कि त्योहारों पर खुले आम भांग का सेवन करना और कुंभ में साधुओं का चिलम पीना क्या सही है? इस सवाल के जवाब में योग गुरु बाबा रामदेव ने एबीपी न्यूज से खास बातचीत में कहा, “कुंभ में या कहीं भी चिलम या गांजा पीने वाले को भी सजा दो. ये सभी लोग नशेणी हैं, साधु नहीं. चिलम पीने वाला साधु नहीं हो सकता. चाहें कोई भी शख्स नशा करें, उसे सजा मिलनी चाहिए.”

रामदेव ने आगे कहा, “त्योहारों के नाम पर भांग पीने वाले, जुंआ खेलने वाल, गांजा पीने वाले अपने होली-दिवाली त्योहार को बदनाम करते हैं.

हम भगवान राम, कृष्ण, हनुमान की उपासना करते हैं. ये हमारी कौन-सी परंपरा है. हमारी परंपरा दिव्यता की है. किसी शास्त्र में नहीं लिखा है कि हमारे पूर्वज नशा करते थे. पूर्वजों की आड़ में नशा करन धर्म नहीं है, ये पाप है.”

यही नहीं रामदेव ने इस नशे के धंधे में शामिल बड़े अधिकारियों को भी सजा दिए जाने की बात की. उन्होंने कहा, ‘नशे के कारोबार के लिए बड़ी-बड़ी एजेंसी और अधिकारियों को भी सजा मिलनी चाहिए. नशा का सेवन करना, खरीदना, बेचना और उसमें सहयोग करने वाले लोगों को जेल की सलाखों के पीछे होना चाहिए.’

बॉलीवुड ड्रग्स मामले पर क्या बोले रामदेव
क्या नशे के लिए एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री भी जिम्मेदार है? इस सवाल के जवाब में रामदेव ने कहा, फिल्मों में दारू पीना सिगरेट पीना, इसपर प्रतिबंध है. ऐसे ही फिल्मों में बुरी चीजों के महिमामंडन पर भी रोक लगना चाहिए. फिल्मों में जितना इनका महिमामंडन किया जाएगा, उतना ही समाज गिरेगा. इसलिए अच्छी चीजों और आदतों का महिमामंडन करना चाहिए.

उन्होंने आगे कहा, ‘फिल्मों के कुछ अश्लील गानों पर भी प्रतिबंध लगना चाहिए. एंटरटेनमेंट के नाम पर थोड़ा सा नियंत्रण होना चाहिए. इसमें समाज की भी गलती है. समाज ऐसी चीजों को देखता ही क्यों है.’

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