जामिया के छात्र का PM को खुला पत्र…परेशान हूं, निराश हूं, ग़द्दार नहीं हूं, देशद्रोही नहीं हूं

आदरणीय प्रधानमंत्री जी,
जब मैं ये सब लिख रहा हूं, मेरी आँखो में पानी है, मन विचलित है बहुत परेशान हूं, निराश हूं, लेकिन ग़द्दार नहीं हूं, देशद्रोही नहीं हूं , किसी भी शर्त पर मैं एक संशोधित कानून के लिए अपने देश से समझौता नहीं कर सकता। प्रधानमंत्री जी, मुझे आपसे लाखों वैचारिक और राजनीतिक असहमतियाँ थी, है और हो सकता है कि आगे भी रहेंगी , लेकिन इसका मतलब ये बिल्कुल भी नहीं है की मैं नागरिक संशोधन विधेयक का विरोध करके अपने ही देश से ग़द्दारी कर रहा हूं।

दो दिन पहले आप अटल घाट के सीढ़ियों पर झटके से गिरे थे, सारा देश हंसा था, मुझे बुरा लगा था। मुझे लगा था कि मेरा प्रधानमंत्री गिरा है उस पर तंज या भद्दी टिप्पणियां नहीं होनी चाहिए। आप वहां तो गिरने के बाद तुरंत उठ गए थे लेकिन आज जहां आप गिरे है, आप वहीं पड़े रह गए है और शायद वहां से कभी नहीं उठ पाऐंगे।

आप जहां रहते है वहां से महज़ दस किलोमीटर दूर दिल्ली पुलिस उ’पद्रवी तत्वों के करतूतों का सारा ठीकरा जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्विद्यालय के बच्चो पर फोड़ रही थी और उनपर बड़बड़ता से लाठियां बर्षा रही थी, उन्हें बाथरूम में घेर कर पिट रही थी, लाइब्रेरी का दरवाजा बाहर से बंद करके उनके ऊपर आंसू गैस के गोले दाग रही थी, हवाई फायरिंग कर रही थी। और आप चुप थे क्योंकि वो सबकुछ आपके इशारों पर हो रहा था।

आप क्यों चुप थे? क्योंकि आपको इस देश के अल्पसंख्यक मुसलमानों से मुहब्बत नहीं है। आपको उन मुसलमानों से मुहब्बत नहीं है जिसने सन् 47 के बंटवारे के बाद एक धार्मिक देश पाकिस्तान के बदले अपने पंथनिरपेक्ष मुल्क हिन्दुस्तान को चुना था। आपको उन मुसलमानों से हमदर्दी ही नहीं है जिसने इस देश के लिए कुर्बानियां दी है। इसीलिए आप ये नागरिक संशोधन विधेयक और एनआरसी जैसे वहियाद से कानून लेकर आए है।

साहब जामिया में घटे उस पूरे घटनाक्रम में 2 बच्चों की जा’ने गई है, तकरीबन सैकड़ों छात्र बुरी तरह से ल’हूलुहान है, कई घायल छात्रों को पुलिस ने पकड़ लिया है और उन्हें किसी से मिलने नहीं दिया जा रहा है।
क्या बीतेगी उनके परिजनों पर? आप तो झोला लेके चल देंगे न लेकिन कौन जवाब देगा उनके परिजनों को? धर्म के आधार पर कानून बनाते वक़्त आप इतने अंधे हो गए कि अपने ही देश के लोगों के बीच आप फर्क करने लग गए।

अगर आप ये सोचते है कि आपके पास नंबर है, आपके पास सांसदों कि संख्या है,आप देश में अपनी तानाशाही से कुछ भी लागू कर लेंगे तो आपके लिए साहिर लुधियानवी का एक शेर है:

हज़ार बर्क़ गिरे लाख आँधियाँ उट्ठें .. वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं ..!

इस देश का हर मुसलमान इस मुल्क की उतनी ही बेहतरी चाहता है जितना कोई हिन्दू , सिख अथवा ईसाई समुदाय के लोग चाहते है और शायद इसमें कोई बुराई नहीं होनी चाहिए। लेकिन बुरा तब लगता है जब आप और आपके द्वारा लाए गए कानून पर उछल कूद कर रहे लोग एक ख़ास मंशा से मुसलमानो को पाकिस्तान परस्त कहते है और उनकी देशभक्ति पर सवाल उठाते है । शायद उन्हें उनकी देशभक्ति किसी के सामने साबित नहीं करनी है पर बताना ज़रूरी है कि देश जितना बाकी धर्म के लोगो का है उतना मुस्लिमों का भी है।

आप एक ज़िम्मेदार पद पर है और आपको अपनी ज़िम्मेदारी का अहसास करना बतौर नागरिक मेरी भी ज़िम्मेदारी है। मैं हिन्दुस्तान की आने वाली नस्लों को खंडहरों के ढेर पर मरने के बजाए एक बेहतर मुल्क देना चाहता हूं। और मुझे यह लिखते वक़्त पूरा भरोसा है कि मैं इस प्रकार के गंदे मानसिकता से इस देश को उबार लूंगा।
धन्यवाद

  • प्रियांशु

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