बिपिन रावत के CDS बनने से भारतीय सेना में क्या बदलाव आया?

15 दिसंबर को प्रत्येक वर्ष भारतीय राजनीतिक नेतृत्व सेना,नौसेना एवम् वायुसेना के उच्च कमांडर चर्चा करते हैं।15 दिसंबर 2015 इसलिए खास है क्यूंकि इस दिन केरल के कोच्चि से करीब 50 किमी की दूरी पर अरब महासागर में सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया जा रहा था।इस प्रदर्शन में तीस युद्ध पोत,पांच पनडुब्बियां एवम् साठ लड़ाकू विमान एवम् इन सबके बीच था भारत का विमानवाहक युद्ध पोत आईएनएस विक्रमादित्य। यह युद्ध पोत पहली बार कम्बाइंड कमांडर्स कॉन्फ्रेंस की मेज़बानी कर रहा था।2019 में दिल्ली में पहली कम्बाइंड कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी जिसमें बाद में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी संबोधित किया था।उसमें उन्होंने कहा था कि दुख की बात है कि सेना में अभी तक कई महत्वपूर्ण सुधारों के प्रस्ताव को अभी तक मंजूरी नहीं दी गई है।

File photo of Bipin Rawat. Credit: PTI

जिसके बाद इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सिडीएस) के पद की घोषणा की थी।अतः 24 दिसंबर 2019 को कैबिनेट द्वारा इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई।जिसके ठीक कुछ दिनों बाद हीं 31 दिसंबर 2019 को तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत को इस पद पर नियुक्त किया गया।विशेषज्ञों की माने तो इस पद को सरकार द्वारा मिली शक्तियां इसे मजबूती प्रदान करती हैं एवम् इस पद को बेहद खास बनाती हैं।सरकार ने इस पद को कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के निर्वाह की जिम्मेदारी सौंपी है जो इस पद की भूमिका को बढ़ाता है।सीडीएस के जिम्मेदारियों के डॉक्यूमेंट पर अपना हस्ताक्षर करनेवाले नौसेना अध्यक्ष जनरल सुनील लांबा के अनुसार सीडीएस को कई जिम्मेदारियां एवम् अधिकार दिए गए हैं। उनमें से ज्यादातर नियमों को स्वीकृत कर लिया गया है एवम् उसे जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं।चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के पद से रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ के अनुसार अभी से सीडीएस के किए कार्यों का आकलन करना जल्दीबाजी होगी।अभी इस पद को संभालने में कुछ समय लगेगा।

सीडीएस के कार्य

सीडीएस के कार्य क्षेत्र की बात करें तो वे सेना के तीनों अंगों से संबंधित विषयों में रक्षामंत्री को सलाह देंगे वहीं सेना के तीनों अंग सीडीएस पद पर नियुक्त विपिन रावत को सलाह देंगे।सीडीएस को मिली शक्तियों के अन्तर्गत वे सेना द्वारा संसाधनों का उचित उपयोग,रक्षा से जुड़े उपकरणों की देखरेख एवम् सुरक्षा उपकरणों को खरीदने की जिम्मेदारियों एवम् स्टाफ प्रशिक्षण जैसे कार्यों का निर्वहन करेंगे।

सीडीएस द्वारा लिए गए फैसले

रिटायर्ड रीयर एडमिरल सुदर्शन श्रीखंडे के मुताबिक सीडीएस के पास बहुत सी जिम्मेदारियों के निर्वहन का भार हैं जिसमें उन्हें सक्रिय कमांडो पर बातचीत करने तथा उनके जिम्मेदारियों के क्षेत्र को तय करने जैसी जिम्मेदारियां हैं।लेकिन इस फैसले हर कोई पूरी तरह से संतुष्ट नहीं है।विशेषज्ञों के अनुसार प्रत्येक वर्ष सेना के बजट का 60% भाग वेतन एवं पेंशन पर ही खर्च हो जाता है।जिससे रक्षा सौदे प्रभावित होते हैं।मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस में रिसर्चर डॉ० लक्ष्मण कुमार बहेरा के अनुसार अभी सेना के मानव संसाधन एवं मॉर्डीनाईजेशन के लिए खर्चों में बचत की जरुरत है तथा इसके लिए बजट बढ़ाना ही इस समस्या का हल हो सकता है।सीडीएस विपिन रावत के लिए गए फैसलों पर काफी विवाद भी उत्पन्न हो चुके हैं।

चीन से सटे भारत के सीमा से जुड़े उनके लिए गए फैसले जिसमें उन्होंने कहा था कि इस क्षेत्र की निगरानी एक या दो थियेटर कमांड करेंगे।जिसके बाद भारतीय नौसेना ने इसपर सवाल उठाए थे।नौसेना के एक अधिकारी ने कहा था कि भारतीय नौसेना का हित प्रशांत महासागर में भी है, यह केवल हिन्द महासागर तक ही सीमित नहीं है।वहीं एक अधिकारी ने सवाल उठाते हुए कहा था कि क्या सीडीएस के फैसले विपिन रावत की खुद की सोच पर आधारित हैं या किसी शोध पर केन्द्रित है?जनरल चैत के अनुसार सीडीएस को एक नेतृत्वकर्ता के रूप में कार्य करना चाहिए ना कि प्रबंधक के रूप में।सीडीएस के गठित होने के पूर्व केंद्रीय कैबिनेट के द्वारा दिए गए बयान में कहा गया था कि सीडीएस की मुख्य जिम्मेदारियां सेना में स्टाफ प्रशिक्षण,सेना के तीनों अंगों के बीच परस्पर संबंध को मजबूती प्रदान करना तथा रक्षा उपकरण से जुड़े सौदे करना एवम् सेना की संसाधनों मरम्मत एवम् रखरखाव में भी एक साथ कार्य करने की सेना क्षमता को स्थापित करना है।

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