बिहार के CM नीतीश का अजीब फैसला, शिकायत करने वाले आदमी को जाना होगा जेल, कानून में होगा संशोधन

SANTOSH SINGH, EDITOR, KASISH NEWS : बिहार सरकार लोकायुक्त कानून में संशोधन करने जा रही है जिसके तहत शिकायत करने वाले की शिकायत अगर गलत साबित हुआ तो उस पर ही मुकदमा चलेगी और दोषी पाये गये तो शिकायत कर्ता को तीन वर्ष की सजा मिलेगी। जी है आपके ही वोट से चुनी हुई सरकार कैसे कैसे आपके लोकतांत्रिक अधिकार को खत्म कर रही है जरा शांत मन सोचिए । मोदी जब 2014 में देश के पीएम बने तो सबसे पहले सूचना के अधिकार कानून के प्रावधान में भी इसी तरह का संशोधन कर दिया था और उसके बाद इस कानून का क्या हश्र हुआ सब के सामने है।

इसी तरीके से मीडिया जिस तरीके से सरकार के साथ खड़ी है इसका लाभ किसको मिल रहा है 2014 से लेकर 2021 के बीच मीडिया की भूमिका पर एक शोध आया है जिसमें कहा गया है कि मीडिया जनता से जुड़े मुद्दे के साथ साथ सरकार के भ्रष्टाचार पर एक भी स्टोरी फाइल नहीं किया है ,इतना ही नहीं जनता के सिविल राइट पर सरकार द्वारा लगातार हमला हो रहा है ऐसे मसले पर भी मीडिया खामोश है, मीडिया की इस भूमिका से किसको नुकसान हो रहा है ।

इसी तरह सीबीआई ईडी जैसी संस्थान का जिस तरीके से सरकार अपनी राजनीति दायरा बढ़ाने के लिए इस्तेमाल कर रही है 2014 से लेकर 2021 के बीच इन दोनों संस्थानों के कार्यशैली पर जब आप गौर करेंगे तो पता चलेगा कि जनता से जुड़े मामले में इन संस्थानों ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखायी हैं।

अधिकारियों से जुड़े भ्रष्टाचार और आपराधिक घटनाओं पर गौर करे तो ऐसे सारे मामले में इनकी दिलचस्पी नहीं के बराबर है इन संस्थानों के इस रवैये से किसका नुकसान हो रहा ,नवरुणा वाले मामले में सीबीआई ने क्या कहा हत्या हुई है लेकिन हत्यारा कौन है ये पता नहीं चल पाया लेकिन बिहार के बच्चा बच्चा को पता है कि इस मामले में किसकी भूमिका है ।

इसी तरीके से 2014 से 2021 के बीच न्यायपालिका की भूमिका पर गौर करिए तो सरकार को राहत जरुर है लेकिन जनता कहां है ।
हमारे संविधान में इन सारी संस्थानों की स्थापना सरकार के गैर कानूनी और जन विरोधी आचरण से जनता को राहत पहुंचाने के लिए बनाई गयी थी लेकिन इन संस्थानों के कमजोर होने से किसका नुकसान हो रहा है गौर से सोचिए ।

इसलिए जरूरी है कि आप हमेशा जनता बने रहे पार्टी का प्रवक्ता ना बने सीबीआई जिस तरीके से ममता बनर्जी की घेराबंदी चुनाव से पहले शुरु कि है मामला सही भी हो फिर भी सीबीआई के इस कारवाई पर सवाल उठना लाज़मी है । ऐसे में सरकार के हर फैसले और कारवाई पर बहस होनी चाहिए क्यों कि इस तरह के बहस से सरकार सावधान रहता है नहीं तो फिर वो हिटलर की तरह आचरण करने लगता है ।

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