मोदी सरकार में इलेक्टोरल बॉन्ड घोटाले के बाद एक और घोटाला आया सामने

रोज एक नया घोटाला सामने आ रहा है. चार दिन पहले सामने आए इलेक्टोरल बॉन्ड घोटाले के बाद ये नया पेश है:

अक्सर हम लोगो के पास के पास फोन आते हैं कि डीमेट खाता खुलवा लीजिए, बहुत से लोग शेयर बाजार की कोई जानकारी नही रखते इसलिए वह इस पचड़े में नही पड़ते लेकिन कुछ लोग ब्रोकर्स द्वारा असीमित लाभ दिलाने के बहकावे में आकर बिना सोचे समझे डीमैट एकाउंट खोल लेते हैं ओर जैसा ब्रोकर बताते जाता है वैसा ही करते जाते हैं और फाइनली अपनी जमा पूँजी से हाथ धो बैठते हैं……..

ऐसा ही इक्विटी ब्रोकर द्वारा किया गया देश का अब तक का सबसे घोटाला सामने आया है, कार्वी ब्रोकरेज कंपनी पर 2,000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया गया है और यह बात बाजार नियामक सेबी द्वारा सामने लाई गयी है सेबी का मानना है कि कार्वी के 2.5 लाख के कस्टमर्स इस वक्त मुश्किल में हैं कई क्लाइंट्स के अकाउंट में से शेयर लिए हैं, शेयर ट्रांसफर किए गए हैं. शेयरों को बेचकर या गिरवी रखकर पैसा उठाए हैं. या फिर जिन क्लाइंट्स ने शेयर बेचे हैं तो उन क्लाइंट्स को पैसे नहीं मिले हैं.

सेबी के मुताबिक, कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड ने अपने ग्राहकों के खातों में रखे शेयर बेचकर अप्रैल, 2016 से दिसंबर, 2019 के बीच 1,096 करोड़ रुपये अपनी समूह की कंपनी कार्वी रियल्टी में ट्रांसफर किए हैं।

दरअसल सेबी ने जून 2019 में एक सर्कुलर में कहा था कि ब्रोकरों को क्लाइंट्स के शेयरों और पैसे को अलग रखना होगा। सेबी को शिकायतें मिली थीं कि कुछ ब्रोकरों ने बैंकों और फाइनेंस कंपनियों से पैसा जुटाने के लिए क्लाइंट्स के शेयर गिरवी रख दिए थे और हासिल रकम को रियल एस्टेट जैसी दूसरी जगहों पर लगा दिया दिया था।

सेबी ने जब जाँच शुरू की तो उसे पता चला कि हैदराबाद की कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग ने अपने 95,000 ग्राहकों के करीब 2,300 करोड़ रुपये के शेयर गिरवी रख 600 करोड़ रुपये जुटाए है ओर उसका उपयोग गलत तरीके से किया गया है

लेकिन ऐसा नही है कि बात सिर्फ कार्वी स्टॉक तक ही सीमित है क्लाइंट्स के एकाउंट्स के गलत उपयोग के लिए सेबी अभी कम से कम पांच छोटी ब्रोकिंग फर्मों की जांच कर रहा है। यानी इक्विटी ब्रोकर फर्म से जुड़े अभी और भी घपले घोटाले सामने आने वाले हैं

(गिरीश मालवीय की वॉल से साभार)

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