12वी फेल होने के बाद, टीचर बोले बेटा जीरो है, वही बेटा UPSC में 261वी रैंक लाकर बना IAS अफसर

Nasik: ऐसा कहा जाता है कि आदमी को जीवन में कभी भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए और हमेशा उस समय तक कोशिश करना चाहिए, जब तक आप अपने सफलता के मुकाम को हासिल ना करले। अगर आप शांत मन से होकर मेहनत करते हैं तो आपकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो आप आसानी से सफलता पा सकते हैं। कभी भी सफलता अमीरी गरीबी को नही देखती।

आपके मजबूत इरादे आने वाली मुश्किलों से लड़ने की ताकत देती हैं। बेहतर भविष्य के लिए जरूरी है कि आप कड़ी मेहनत करते रहें। आज हम आपको नागपुर, महाराष्ट्र के सैय्यद रियाज अहमद की कहानी बताने जा रहे हैं जो युवाओं के लिये किसी प्रेरणा से कम नही हैं। बहुत से लोग ऐसा सोचते हैं कि यूपीएससी की परीक्षा (UPSC Exam) पास करने के लिये आपका बचपन से पढ़ाई में बहुत होशियार होना आवश्यक है, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है।

सैय्यद रियाज अहमद (Sayyed Riyaz Ahmed) पढ़ाई में एक सामान्य छात्र रहे और उन्होंने इस कठिन परीक्षा को पास कर अपने और पिता के सपने को पूरा किया। महाराष्ट्र के नासिक में पैदा हुए सैय्यद रियाज अहमद कभी हार नहीं मानने वाल इंसान हैं। हिम्मत से काम लेना। जमकर मेहनत करना और ​कामयाबी के​ शिखर को छू लेना कोई सैय्यद रियाज अहमद से सीखें।

सैय्यद रियाज अहमद की पूरी जिंदगी सफलता (Success) की मिसाल है। अंदाजा इस बात से लगा सकते हो कि कभी ये 12वीं कक्षा की परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाए थे। फेल होने पर टीचर ने इनके पिता से यहां तक कहर दिया था कि उनका बेटा जीरो है। कुछ नहीं कर सकता है। फिर यूपीएसपी में चार बार फेल हो गए। अवसाद में चले गए थे, मगर आज सैय्यद रियाज अहमद अफसर हैं। सिविल सेवा परीक्षा 2018 में सैय्यद रियाज अहमद ने 261वीं रैंक हासिल की थी।

सैय्यद रियाज अहमद (IAS Sayyed Riyaz Ahmed) बताते हैं कि वे सामान्य परिवार से आते हैं। परिवार में सिविल सेवा में जाने का कोई सोच भी नही सकता। माता-पिता ज्यादा पढ़े लिखे नही थे परिवार में पढ़ने का कोई माहौल नही था। पिता महज तीसरी और मां सातवीं पास हैं। खुद रियाज 12वीं में फेल हुए तो इन्हें समाज में काफी अपमान का सामना करना पड़ा।

सैयद बताते हैं की वह अपने कॉलेज के दिनों से ही पॉलिटिक्स में काफी इंटरेस्ट रखते थे। वह पॉलिटिक्स ज्वाइन कर समाज में सुधार लाना चाहते थे परन्तु उनके घरवालों ने इसके लिए सपोर्ट नहीं किया। इसी कारण सैयद ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा दे कर IAS बनने का फैसला किया ताकि वह समाज विकास के लिए कुछ काम कर सकें।

सैयद ने 2013 में UPSC की तैयारी शुरू की और 2014 में अपना पहला एटेम्पट दिया। उस समय UPSC के बारे में कोईभी जानकारी नही थी। इस समय उन्हें पेपर के बारे में भी ज़्यादा नही जानते थे। वह प्रीलिम्स परीक्षा भी पास नहीं कर सके। उन्होंने हार नही मानी। अपनी पहली हार को सफलता की सीढ़ी बनाकर आगे कदम बढ़ाने का फैसला लिया।

इसके बाद वह कोचिंग के लिए दिल्ली आये और फिर से तैयारी शुरू की। दूसरे अटेम्पट में भी प्री क्लियर नहीं हुआ और इस बार कारण था ज्यादा प्रश्न करना जिससे निगेटिव मार्किंग हो गई और वह कट ऑफ क्वालीफाई नहीं कर सके। तीसरे अटेम्पट में सैय्यद ने प्री और मेन्स पास कर लिया, लेकिन इंटरव्यू में पास नहीं हुए। उन्होंने अगले एटेम्पट के लिए अपनी रणनीति में बदलाव किया परन्तु चौथे एटेम्पट में मेन्स पास नहीं हुआ।

चार बार असफल होने के बाद सैयद की हिम्मत टूटने लगी थी। लेकिन सपनो को पूरा करना था। लक्ष्य को हासिल करना था। मन में उन्होंने UPSC की तैयारी छोड़ कर कुछ और करने का विचार कर लिया था। परन्तु उनके पिता के समझाने पर उन्होंने एक आखिरी बार कोशिश करने का फैसला लिया। पाँचवे एटेम्पट में सैयद ने खूब मेहनत की और वह मेहनत रंग सबके सामने है। सैयद ने UPSC सिविल सेवा 2017 की परीक्षा में 261वीं रैंक हासिल की।

अपने संघर्ष के बारे में बात करते हुए सैयद कहते हैं इतने सालों तक बार-बार असफल होना और फिर से तैयारी करना सम्भव नहीं था लेकिन मन में दृढ़ संकल्प था की एक न एक दिन सफलता जरूर मिलेगी। जब कभी हिम्मत हारने लगता तो लोगों के ताने याद आते और फिर मेहनत करने के लिए प्रेरित हो जाता था।

इस दौरान सैयद के पिता ने भी उनका पूरा सहयोग किया। सैयद के हौसलों को कभी कम नही होने दिया जब भी निराश होते पिता ताकत बनकर उनका साथ देते। जिससे सैय्यद की हिम्मत और दुगनी हो जाती। वह कहते हैं कि यदि उनके पिता ने उन पर भरोसा नहीं दिखाया होता तो आज वह कामयाब नहीं हो पाते।

अभ्यार्थियों के लिए सैयद कहते हैं अगर मैं कर सकता हूँ तो कोई भी कर सकता है। शर्त बस इतनी है की अपने लक्ष्य पर डाटे रहना है और निरंतर प्रयास करते रहे। सफलता का रास्ता लम्बा ज़रूर है पर सफलता अवश्य मिलेगी। हार नही मानना।

2016 में तीसरे अटेंप्ट में इस रणनीति से प्री-मेन्स क्वालीफाई किया, लेकिन इंटरव्यू में फेल हुए। घरवालों ने फिर भी समर्थन किया। इस दौरान पिता रिटायर हो गए थे। अब उन्हें फाइनेंशियली सपोर्ट खुद ही जुगड़ना था। तीसरे अटेंप्ट में फेल होने के बाद पिता ने कहा, तुम तैयारी मत छोड़ना। हम चाहे घर गिरवी रख दें या बेच दें, लेकिन तू तैयारी कर। हैम तेरे साथ है।

पिता के साथ ने आज सफलता दिलाई। पिता ने हौसला नही बढ़ाया होता तो आज इस मुकाम पर ना होता। 2017 में फिर से चौथी बार परीक्षा दी। चौथे अटेंप्ट में मेन्स क्लीयर हुआ लेकिन इंटरव्यू पास नहीं हुआ। पापा से कहा कि तैयारी छोड़ दूंगा और घर आकर बिजनेस शुरू करूंगा। पिता ने फिर समझाया, छोड़ना है तो छोड़ दो लेकिन सपना एक सपना बनकर ही अंदर दब जायेगा।

स्टेट सर्विसेज की परीक्षा दी। बहुत अच्छे नंबर से पास की और रेंज फारेस्ट ऑफिसर बन गया।वहां से मुझे फाइनेंशियल में मदद मिली। 2018 यानी पांचवें अटेंप्ट में तीसरे-चौथे अटेंप्ट से भी कम तैयारी की थी। लेकिन मेन्स पास हुआ। कट ऑफ में 90 नंबर ज्यादा थे। अब बचा था सिर्फ इंटरव्यू। उम्मीद थी कि इंटरव्यू अच्छा होगा, मॉक इंटरव्यू में अच्छे नंबर मिल रहे थे।

इंटरव्यू से बाहर आया तो पिता से कहा कि इंटरव्यू अच्छा नही था।। पापा ने हौसला बढ़ाते हुए कहा, मुझे लग रहा है कि तू आईएएस बन गया। पांच अप्रैल 2019 को परिणाम आया तो 261वीं रैंक थी। पापा को कॉल किया, आंखों में आँसू आ गये। मैं कुछ बोल नहीं पाया। मैं यकीन नहीं कर पा रहा था। पिता से कहा, आपका इं‍तजार खत्म, मैं अब सेलेक्ट हो गया हूं।

डेली बिहार न्यूज फेसबुक ग्रुप को ज्वाइन करने के लिए लिंक पर क्लिक करें….DAILY BIHAR  आप हमे फ़ेसबुकट्विटरइंस्टाग्राम और ह्वाटसअप पर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं 

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.