आज 235 साल का हुआ पटना का गोलघर, 20 जुलाई 1786 को पूरा हुआ था निर्माण, इसमें हैं 145 सीढ़ियां

PATNA : पटना की शान गोलघर! जब बना तो बगल से बहती थी गंगा, अब 2 किमी दूर : इतिहास कहता है कि अकाल के दौरान उस भवन को अनाज रखने वाले गोदाम के रूप में बनाया गया था। कारण जो भी रहा हो वर्तमान काल का सच यही है कि वह पटना का पहचान बन चुका है। बच्चें हो या बड़े जो भी पहली बार पटना जाता है वह गोलघर अवश्य जानना चाहता है। जी हां आज आपका गोलघर 235 साल का हो गया है।

पटना की पहचान गोलघर आज 235 वर्ष का हो गया। गवर्नर जनरल वॉरेन हेस्टिंग को 20 जनवरी 1784 को खाद्यान्न के एक कारोबारी जेपी ऑरियल ने एक बड़ा अन्न भंडार बनाने की सलाह दी थी। हेस्टिंग 1770 के अकाल, जिसमें बिहार-बंगाल और ढाका में 10 लाख से अधिक लोग मरे थे, का स्थायी समाधान खोजना चाहते थे। हेस्टिंग ने यह जिम्मा बंगाल आर्मी के इंजीनियर कैप्टन जॉन गार्स्टीन को सौंपा। गार्स्टीन ने गोलघर के निर्माण के लिए बांकीपुर में डेरा जमाया। ‘बंगला गार्स्टीन साहब‘ ही आज का बांकीपुर गर्ल्स हाई स्कूल हैै।

गोलघर का निर्माण 20 जुलाई 1786 को पूरा हुआ। बनने के बाद ही इसकी कमियां सामने आने लगीं। दरवाजे भीतर की ओर खुलते हंै, सो इसे कभी पूरा भरा नहीं जा सकता। वहीं गर्मी के कारण इसमें अनाज जल्दी सड़ जाता था। लिहाजा यहां कभी अनाज संग्रह हो ही नहीं सका। अंग्रेजों इसे गार्स्टीन की मूर्खता करार दिया। फिर भी यह अनोखी आकृति के कारण लोकप्रिय बना हुआ है।

ड्रोन से लिया गया आज का फोटो : अर्द्ध अंडाकार या स्तूप जैसे दिखने वाले गोलघर का यह फोटो आज का है। गंगा पुराने प्रवाह मार्ग से करीब दो किमी दूर चली गई है। 95 फीट से अधिक ऊंचे इस मॉन्यूमेंट की बुनियाद 11.81 फीट चौड़ी है जो ऊपर पतली होती जाती है। इस पर चढ़ने के लिए 145 सीढ़ियां हैं।

चित्रकार स्मिथ की है ये पेंटिंग : ब्रिटिश लाइब्रेरी में गोलघर की यह पेंटिंग 206 साल पुरानी है जिसे अंग्रेज चित्रकार रॉबर्ट स्मिथ ने 1814-15 में बनाया था। तब गोलघर से थोड़ी ही दूर गंगा बहती थी। स्मिथ ने अपनी पेंटिंग का नाम ‘ग्रेन गोला एट बांकीपुर, नियर पटना’ रखा था।

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