4 माह पहले Dr आशीष झा ने कोरोना से अमेरिका को किया आगाह, कहा-लाकडाउन हटा तो बिहार में होगी तबाही

हार्वर्ड ग्लोबल हेल्थ इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर आशीष ने भारत के प्रयासों को सराहा, कहा, भारत ने जीती आधी ल’ड़ाई

चार महीने पहले कोरोना संक्रमण को लेकर अमेरिका को आगाह करने वाले हार्वर्ड ग्लोबल हेल्थ इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉ. आशीष झा ने भारत के प्रयासों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एहतियाती कदम से भारत ने आधी लड़ाई जीत ली है, लेकिन अभी शुरुआत है। लड़ाई लंबी चलेगी।

उन्होंने कहा कि भारत जैसे सघन आबादी वाले देश में एकाएक लॉकडाउन खोलना खतरनाक होगा। बता दें, आशीष झा ने कोरोना वायरस पर काफी काम किया है। चार महीने पहले ही उन्होंने अमेरिका को आगाह कर दिया था, जो बाद में सच साबित हुआ।

उप्र-बिहार को बढ़ानी चाहिए टेस्टिंग : डॉ. आशीष ने फोन पर बताया कि भारत ने संक्रमण से पहले ही लॉकडाउन करके अच्छा किया। जिन देशों ने देर की, वे भुगत रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिहार-उत्तर प्रदेश को टेस्टिंग बढ़ानी चाहिए। छोटे-छोटे सेक्टरों में कुछ हद तक रियायत देने की तैयारी भी करनी चाहिए, क्योंकि संक्रमण फैलने का खतरा अभी टला नहीं है। दोनों राज्यों को आर्थिक मोर्चे पर भी मुकाबला करना है। रेड जोन एवं कंटेनमेंट एरिया में छूट भारी पड़ सकती है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में मेडिसीन के प्रोफेसर के मुताबिक संदिग्धों को ज्यादा से ज्यादा आइसोलेट करना चाहिए।

पिता शोध करने पटना से गए थे अमेरिका : भारतीय मूल के डॉ. आशीष झा के पिता डॉ. परमेश्वर झा करीब 40 साल पहले पटना में बिहार स्टेट प्लानिंग बोर्ड में डिप्टी डायरेक्टर थे। किंतु नौकरी छोड़कर शोध करने अमेरिका चले गए। बाद में वहीं की यूनिवर्सिटी में पढ़ाने लग गए। आशीष की मां भी अमेरिका जाने से पहले पटना जेडी वीमेंस कालेज में प्रोफेसर थीं। बेली रोड पर महेश बाबू के मकान के पास आशियाना था। आशीष ने हार्वर्ड से ही पढ़ाई पूरी की है। उन्होंने एमडी किया है। उनकी पत्नी भी इसी विश्वविद्यालय में लॉ की प्रोफेसर हैं। डॉ. आशीष भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था एवं वैश्विक हस्तक्षेप से वह प्रभावित हैं।

18 महीने रह सकता है कोरोना का असर : आशीष के विचार का पूरा अमेरिका कायल है। आज ऐसा कोई अमेरिकी नहीं, जो उन्हें नहीं जानता है। उन्होंने कहा था कि जब तक कोरोना वायरस की कोई कारगर वैक्सीन नहीं मिल जाता, तब तक कोरोना के खतरे को लेकर बेफिक्र नहीं होना चाहिए, क्योंकि कोरोना का असर 18 महीने रह सकता है।

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