नीतीश से पंगा लेना अनंत सिंह को भारी पड़ गया, आरसीपी सिंह की बेटी लिपि सिंह ने मटियामेट कर दिया

सीएम नीतीश से पंगा लेना बाहुबली अनंत सिंह को भारी पड़ गया, आरसीपी सिंह की बेटी लिपि सिंह ने मटियामेट कर दिया : यह कहानी पूरी फिल्मी है। इसमें एक्शन है। ड्रामा है। नाटक है। ट्विस्ट है। भावुकता है। रोमांच है। हम बात कर रहे हैं बिहार के नेता और बाहुबली विधायक अनंत सिंह की। आज कोर्ट ने उन्हें दस साल की सजा सुनाई है। जज का फैसला आते ही लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि आखिरकार सीएम नीतीश ने अपना बदला ले लिया। बाहुबली को नीतीश से पंगा लेना भारी पड़ गया। क्या जरूरत थी नीतीश से दुशमनी मोल लेने का। शांत रहता तो कम से विधायक रहता। इन लोगों का मानना है कि इस मामले में अनंत सिंह को फंसाया गया है। आरसीपी सिंह की बेटी और उस समय की मोकामा की एसपी लिपि सिंह की मदद से अनंत सिंह के घर पर छापा मारा गया। हालांकि कोर्ट ने अपना फैसला सबूत के आधार पर दिया होगा।

इस बाहुबली विधायक अनंत सिंह की कहानी बड़ी ही दिलचस्प है. कभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रतिष्ठा बचाने वाले अनंत सिंह आज विरोधी खेमे में हैं और राजद के विधायक हैं. खास बात यह है कि राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को एक समय में अनंत सिंह फूटी आंख नहीं पसंद थे, मगर अब नीतीश कुमार को उनके खिलाफ माना जा रहा है. फिलहाल वे राजद के एमएलए हैं और लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव को अनंत सिंह सीएम बनते हुए देखना चाहते हैं.

9 साल की उम्र में पहली बार गए थे जेल
अब जब अनंत सिंह को 10 साल की सजा मिल गई है तो आइये इस बाहुबली विधायक की कुछ वैसी बातें जानते समझते हैं, जो इनके फर्श से अर्श तक की कहानी का हिस्सा है. यही नहीं ऊंचाई तक पहुंचने के बाद इनके रसूख में कैसे गिरावट आती गई, यह भी हम जानते हैं. दरअसल, पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल के लदमां गांव में इस बाहुबली अनंत सिंह का जन्म 1 जुलाई 1961 को हुआ था. स्थानीय लोगों के अनुसार जब अनंत सिंह 9 साल के थे, उसी समय वे पहली बार जेल गए थे. हालांकि, कुछ दिनों में वे छूटकर भी आ गए थे.

चार भाइयों में अनंत सिंह सबसे छोटे
अनंत सिंह के चार भाई हैं और वह सबसे छोटे हैं. मगर बाहुबल में उनका नाम काफी बड़ा हो गया. जिस बाढ़ व मोकामा इलाके से वे आते हैं, एक समय में उन्हें यहां ‘रॉबिनहुड’ के नाम से भी जाना जाता था. अनंत सिंह कम उम्र में ही दबंग बन चुके थे. दिमाग से तेज अनंत सिंह ने यह समझ लिया था कि अपराध और राजनीति साथ रही तो वे काफी आगे पहुंच सकते हैं. उन्होंने रणनीति बनाई और इस पर आगे बढ़े. हालांकि, पहले तो वे खुद राजनीति में नहीं आए और अपने बड़े भाई को पॉलिटिक्स में उतारा दिया.

राजनीति के मैदान में उतरे अनंत सिंह
बड़े भाई दिलीप सिंह ने 1985 में पहली बार निर्दलीय के तौर पर मोकामा सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए. इसके बाद 1990 में पहली बार वो जनता दल के टिकट पर मोकामा से विधायक बने. 1995 में भी यहां से जीते, लेकिन 2000 का चुनाव हार गए. 2005 के विधानसभा चुनाव से अनंत सिंह खुद राजनीति के मैदान में आ गए. वे मोकामा से फरवरी 2005, अक्टूबर 2005 और 2010 का चुनाव नीतीश कुमार की पार्टी जदयू से जीते. 2015 में नीतीश कुमार से अलगाव के बाद वे निर्दलीय जीते.

नीतीश कुमार से नजदीकियों के खूब हुए चर्चे
दरअसल, यह वही दौर था जब 2015 विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनके संबंध खराब हो गए. 2015 का चुनाव निर्दलीय लड़कर जीते 2019 लोकसभा चुनाव में पत्नी को वर्तमान जदयू अध्यक्ष ललन सिंह (नीतीश कुमार के काफी नजदीकी माने जाते हैं) के खिलाफ उतारा था. वर्ष 2020 के चुनाव में नीतीश कुमार से अलग होने के बाद अनंत सिंह ने राजद के टिकट पर जोरदार जीत दर्ज की. फिलहाल नीतीश कुमार से उनकी दूरी है, मगर कभी नजदीकियों के भी खूब चर्चे थे.

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