अब विधायक नहीं रहे बाहुबली अनंत सिंह, बिहार विधान सभा ने सजा मिलने के बाद रद्द की सदस्यता

अनंत की विधायिकी गई… 17 साल की सल्तनत का अंतविधानसभा ने अधिसूचना जारी की, आर्म्स एक्ट में दोषी ठहराए जाने की तिथि 21 जून से ही प्रभावी : राजद विधायक और मोकामा से लगातार 5 बार से जीत रहे चर्चित अनंत सिंह अब विधायक नहीं रहे। अनंत सिंह के घर से एके 47 और हैंड ग्रेनेड मिलने के मामले में एमपी/एमएलए कोर्ट द्वारा 10 साल की सजा सुनाये जाने के कारण विधानसभा ने गुरुवार को उनकी विधायकी समाप्त किये जाने की अधिसूचना जारी कर दी। अधिसूचना में कहा गया कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा-8 और संविधान के अनुच्छेद 191 (1) (ई) के प्रावधानों के तहत अनंत सिंह को कनविक्शन की तिथि 21 जून के प्रभाव से बिहार विधान सभा की सदस्यता से निरर्हित किया जाता है। आर्म्स एक्ट के मामले में कोर्ट ने 14 जून को ही उन्हें दोषी करार दिया था। फिर 21 जून को एमपी/एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ने 10 साल की सजा सुनाई। चूंकि 2 साल या उससे ऊपर की सजा मिलने के बाद सदस्यता जानी तय है। ऐसे में विधानसभा ने सजा की तिथि 21 जून से ही सदस्यता छिने जाने की जानकारी दी।

वर्ष 2005 मार्च से लगातार मोकामा से विधायक थे अनंत : वर्ष 2005 मार्च में अनंत सिंह ने अपने भाई दिलीप सिंह की सीट मोकामा से निर्दलीय जीते। फिर वर्ष 2005 नवंबर और 2010 में जदयू से जीते। 2015 में निर्दलीय और 2020 में राजद उम्मीदवार के रुप में लड़कर लगातार 5 वीं जीत दर्ज की।

अनंत सिंह की विधायकी जाने से राजद विधायकों की संख्या 79 हो गई है। 15 दिन पहले ही एआईएमआईएम के 4 विधायकों को राजद मे शामिल हो जाने से राजद विधायकों की संख्या 76 से 80 हुई थी। पर सजायाफ्ता अनंत सिंह की सदस्यता जाते ही एक पखवारे में ही विधानसभा में राजद की संख्या कम हो गई है। हालांकि अब भी विधायकों की संख्या के लिहाज से राजद सबसे बड़ी पार्टी है। नवंबर 2020 में वर्तमान 17वें विधानसभा के गठन के बाद अब तक बसपा, लोजपा के 1-1, वीआईपी के 3 और एआईएमआईएम के 4 विधायक अपना दल छोड़ दूसरे दल में शामिल हो चुके है।

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