बांग्लादेश के जेल में बंद बिहारी युवक राजेंद्र की हाेगी वतन वापसी, भागलपुर में परिवार वाले मना रहे जश्न

साढ़े तीन साल से बांग्लादेश जेल में बंद भागलपुर के लोदीपुर थाने के उस्तु गांव निवासी राजेंद्र रविदास की जिंदगी में नया सवेरा अाने वाला है। 15 दिनाें में वह वतन वापस अा जाएगा अाैर परिवार के साथ हाेगा। उसे भारत-बांग्लादेश के बंगाल स्थित बाॅर्डर दर्शना-गेडे सीमा से भारत में प्रवेश करेगा। अक्टूबर 2017 में वह परिवार का भरण-पाेषण करने के लिए घर से दिल्ली कमाने के लिए गया था। दिल्ली में रहने के दाैरान वह किसी के साथ वहां से निकल गया। उसकी दिमागी हालत भी कुछ ठीक नहीं थी।

वो दिल्ली से किसी के साथ पश्चिम बंगाल चला गया और वहां से बांग्लादेश की सीमा में बंगा पिपरा पुलिस ने उसे पकड़कर बांग्लादेश के मुर्शीदाबाद जेल भेज दिया। महादलित अाैर गरीब परिवार से अाने वाले राजेंद्र की पत्नी पत्नी सरिता देवी ने पति काे वापस लाने के लिए भागलपुर से लेकर पटना व दिल्ली तक जद्दोजहद की। स्थानीय सांसद से मिली पर वह पति काे वापस नहीं ला सकी। सरिता काे छाेटे-छाेटे दाे बच्चे हैं। भीख मांगकर बच्चाें काे पाेसती है। परिवार में सास व ससुर भी हैं।

पिछले साल अक्टूबर में सरिता अाैर उसके परिवार वालाें काे किसी ने ह्यूमन राइट्स अम्ब्रेला फाउंडेशन के चेयरमैन मानवाधिकार कार्यकर्ता विशाल रंजन दफ्तुआर के बारे में बताया। सरिता ने उन्हें अावेदन दिया अाैर उसके बाद दफ्तुआर ने बांग्लादेश जेल में बंद 30 साल के राजेंद्र काे वहां से लाने के लिए काेशिश शुरू कर दी। दफ्तुअार ने बताया कि राजेंद्र की वापसी का काम फरवरी के अंत या मार्च की शुरुआत में होगी। तारीख का निर्धारण किया जा रहा है। इस संबंध में बीएसएफ अधिकारी ने इसकी जानकारी दी है। राजेंद्र काे दर्शना-गेडे सीमा से भारत में प्रवेश कराया जाएगा।

दफ्तुअार का यह चाैथा मिशन
विशाल रंजन दफ्तुआर ने बताया कि बांग्लादेश की जेल में 11 सालों से कैद दरभंगा के मानसिक तौर पर बीमार और गरीब परिवार के सतीश चौधरी को मात्र एक महीने के अंदर 12 सितंबर, 2019 को कैदमुक्त करवाए थे। उसे भी दर्शना-गेडे अंतरराष्ट्रीय बार्डर से भारत लाया गया था। बांग्लादेश में दो सालों से कैद बलिया, उत्तरप्रदेश के अनिल कुमार सिंह को भी एक महीने में 5 दिसंबर 2019 को कैदमुक्त करवाए। मुजफ्फरपुर अाैर बेगूसराय जेल में चार साल तक बंद रही बांग्लादेशी महिला सवेरा बेगम को 28 अक्टूबर, 2020 को वापस बांग्लादेश भेजे थे। उन्हाेंने कहा कि यह मेरा चाैथा मिशन है।

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