घर में काम करने वाली बाई, रसोइया और ड्राइवर भी अब पीएफ के दायरे में

पटना : प्रोविडेंट फंड यानी पीएफ का लाभ ऑफिस, कल-कारखाने और फैक्ट्री में काम करने वाले लोगों के अलावा दूसरे के घर में काम करने वाले लोगों को भी मिलने वाला है। जी हां, सरकार इस दिशा में काम शुरू कर चुकी है। इस नई योजना के तहत घर में काम करने वाली बाई, रसोसइया और ड्राइवर को भी प्रोविडेंट फंड (पीएफ) का लाभ मिलेगा। केंद्र सरकार ने सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने के लिए ऐसा किया है। श्रम मंत्रालय ने इम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड एंड मिसलेनियस प्रोविडेंट एक्ट में बदलाव की योजना बनाई है। सरकार ने इसके पहले असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन पेंशन योजना शुरू की है। इसके बाद सरकार यह नया कदम उठाने की तैयारी में है। इसमें ड्राइवर और डोमेस्टिक हेल्प जैसे श्रमिकों के लिए भी पीएफ का इंतजाम किया जा सकता है।

वर्तमान में क्या है नियम : अभी कर्मचारी और संस्थान दोनों ही बेसिक सैलरी के 12-12 फीसदी का योगदान ईपीएफओ में करते हैं। जबकि बीड़ी, ईंट, जूट, नारियल रेशे और ग्वार गम इंडस्ट्री, बीमार घोषित किए गए संस्थान और नेट वर्थ के बराबर नुकसान वाली कंपनी के लिए ईपीएफओ में योगदान की दर 10 फीसदी तय की गई है। ईपीएफ एंड एमपी एक्ट हर उस संस्था पर लागू होता है, जिसमें 20 से ज्यादा लोग काम करते हैं। नए नियम के अनुसार कर्मचारियों के पास ईपीएफओ और नेशनल पेंशन सिस्टम में से किसी एक को चुनने का अधिकार होगा। ऐसे लोग जिनकी आय एक तय सीमा से कम है, उनके पास इम्प्लॉयर के योगदान पर असर किए बिना पीएफ में कोई योगदान न देने का विकल्प भी मौजूद होगा।

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