हिन्दुस्तान का दिल देखो, बनारस के गंगा घाट पर पत्रकार कमाल खान के नाम पर हुई आरती

PATNA- हिन्दुस्तान का दिल देखो ! लखनऊ की मिट्टी को कमाल ख़ान का पार्थिव शरीर सुपुर्द किया गया और बनारस के गंगा घाट पर उनके नाम पर आरती हुई. ग़मज़दा माहौल में ये इस दौर की वो ख़ूबसूरत तस्वीर है जिसे आप अपने-अपने फोल्डर में रख लीजिए. कोई कभी पूछेगा कि हिन्दुस्तान की तस्वीर कैसी होती है, आप उन्हें इनबॉक्स में फारवर्ड कर दीजिएगा.

वाराणासी के दशाश्वमेध घाट के विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती में वरिष्ठ पत्रकार कमाल खान को श्रद्धांजलि दी गई। घाट पर दीप प्रज्वलित कर वाराणसी के पत्रकारों ने आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और 2 मिनट का मौन रखा।

‘लगता है शरीर का कोई अंग छिन गया’
कमाल खान के साथ करीब 4 वर्ष काम करने वाले वाराणसी के जेबी सिंह बताते हैं कि वो अपने आप में एक संस्थान थे। उनके साथ बहुत काम करने का मौका तो नहीं मिला, लेकिन जब भी काम के दरम्यान जरूरत होती तो एक अध्यापक की तरह समझाते थे। पहले वो बेहद शांत होकर बात को सुनते थे, फिर बड़े ही आसान भाषा में प्यार से समझाते थे कि खबर की इस लाइन के साथ ऐसा विजुअल बनाओ। कभी भी हम लोगों ने कमाल सर को धैर्य खोते या गुस्सा करते नहीं देखा। कमाल सर के जाने से ऐसा लग रहा है कि हम लोगों के शरीर का कोई अंग चला गया।

‘व्यक्तित्व और व्यहार में भी कमाल सर थे कमाल’
वाराणसी के वरिष्ठ पत्रकार गोपाल मिश्रा ने कहा कि कमाल सर एक बेहतरीन रिपोर्टर ही नहीं, बल्कि समाज को बेहतर संदेश देने वाले थे। उनकी रिपोर्टिंग देख के न जाने कितने पत्रकारों ने उनसे कितना कुछ सीखा है। कमाल सर बस नाम के नहीं व्यक्तित्व और व्यवहार में भी कमाल थे। घाट पर वाराणसी के पत्रकारिता जगत के रिपोर्टर मौजूद थे। सभी पत्रकारों ने घाट पर दीपमाला बना कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। दो मिनट का मौन रख कर मा गंगा से कमाल खान की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। बताते चलें कि शुक्रवार सुबह कमाल खान की 61 वर्ष की उम्र में उनके आवास पर हार्ट अटैक से निधन हो गया ।

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