मरे को दूध भात, जिंदा को लात बात…भारत रत्न के बदले वशिष्ठ बाबू को मिला पद्म पुरस्कार

म’रे को दूध भात, जिंदा को लात बात…भारत रत्न के बदले वशिष्ठ बाबू को मिला पद्म पुरस्कार

हुज़ूर आते-आते बहुत देर कर दी…वशिष्ठ बाबू या किसी को भी म/रने के बाद सम्मान दिया जाना इस बात की स्वीकरोक्ति है कि जीते जी हमने उस इंसान के साथ इंसाफ नहीं किया। सरकारों को चाहिए कि ये सम्मान तब दिया जाए जब व्यक्ति विशेष उस ऊर्जा को समाज के लिए दोबारा खर्च कर सके। उसे लगे कि कोई है, जो उसकी पीठ थपथपा रहा है।

पिछले साल अक्टूबर में वशिष्ठ बाबू से मिलने उनके पटना स्थित आवास गया था। वहां उनके भाई अयोध्या बाबू ने कहा था- वशिष्ठ बाबू का इतना नाम है। दुनिया भर में बिहार का नाम रोशन किया। आज तक बिहार रत्न भी नहीं मिला। इस बार कुछ लोगों ने पद्म सम्मान के लिए नाम प्रस्तावित किया है। अगर ज़िंदा रहते सम्मान मिल जाता तो अच्छा लगता।

अफसोस, अगले ही माह नवंबर में वशिष्ठ बाबू गुजर गए। कल जब पद्म सम्मान की घोषणा हुई और उन्हें पद्मश्री मिला तो तुरंत अयोध्या बाबू को कॉल लगाई। बिना हेलो बोले बस इतना कहा- तीन माह पहले आपने जो आशंका जताई वो आज सच हो गई। सम्मान तो मिला मगर एक ‘काश’ हमेशा के लिए साथ रह गया। अयोध्या बाबू बोले- ‘समथिंग इज बेटर देन नथिंग’।

बहरहाल, अब वशिष्ठ बाबू के भाई-भतीजे इतना ही चाहते हैं कि कोइलवर के पास बन रहे नए सिक्स लेन पुल का नामकरण वशिष्ठ बाबू के नाम पर हो। उनका कहना है कि आरा के सांसद आरके सिंह ने केंद्र सरकार से बात करने का आश्वासन भी दिया है। तस्वीर दैनिक जागरण में छपी मेरी आज की रिपोर्ट की।

-KUMAR RAJAT, DAINIK JAGRAN, PATNA

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