बिहार की बेटी नेहा को सलाम, अपनी कमाई से मम्मी-पापा को गिफ्ट में खरीदकर दिया 35 लाख का घर

PATNA-40 साल से किराए में रह रहे माता-पिता के सपनों को बेटी ने किया साकार, अपनी कमाई से 35 लाख का घर किया गिफ्ट, मां बोली-भगवान ऐसी बेटी सबको दे, अमेजन में काम कर रही नेहा, जीरोमाइल स्थित बसंत विहार कॉलोनी में लिया टू बीएचके फ्लैट, अब मकान मालिक की नहीं सुननी होगी, कंप्यूटर इंजीनियर से बनीं सॉफ्टवेयर इंजीनियर, लॉकडाउन में हुई दिक्कत, पर पापा घर खरीदने को नहीं थे तैयार : जरूरी नहीं राेशनी चिरागों से ही हो, बेटियां भी घर में उजाला करती हैं। इस कहावत को सच कर दिखाया है, तगेपुर जगदीशपुर की नेहा मिश्रा ने। पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर नेहा वर्तमान में अमेजन में कार्यरत है। उसने अपने माता-पिता को अपनी पहली कमाई से 35 लाख का घर गिफ्ट किया है। नेहा के पिता मुकेश मोहन मिश्रा पैसे से ऑटो ड्राइवर थे और उन्होंने अपना 40 साल किराए के मकान में गुजारा है।

मुकेश मोहन मिश्रा बताते हैं कि 1989 में उन्होंने ऑटो खरीदा, तब से 2014 तक अपने परिवार का जीवन-यापन ऑटो की कमाई से किया। 2014 में हाईकोर्ट से केस जीतने के बाद उन्हें शिक्षा विभाग में परिचारी के पद पर 12000 मासिक वेतन पर नौकरी हुई। मुकेश के अनुसार, बहुत मुश्किल से हमने ऑटो चला कर बेटी नेहा को पढ़ाया। नेहा की नर्सरी से 12वीं तक की शिक्षा माउंट कार्मेल भागलपुर से हुई है। 2016 में 12वीं करने के बाद नेहा के मार्क्स देख उसे हैदराबाद स्थित सैन फ्रांसिस्को वूमेन कॉलेज में इंजीनियरिंग में दाखिला मिला, जहां से उसने मेहनत के दम पर 2019 में अमेजन जैसी मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब हासिल की।

बेटी द्वारा घर गिफ्ट करने पर मां शारदा मिश्रा ने खुशी जाहिर कर कहा, भगवान ऐसी बेटी सबको दे। शारदा मिश्रा कहती हैं, किस तरह मैंने शादी के बाद किराए के मकान में गुजारा यह बयां नहीं कर सकती। अपना मकान न होने से छोटी-छोटी बातों पर मकान मालिक से सुनना पड़ता था। अब यह सब सुनना नहीं पड़ेगा, क्योंकि मेरी बेटी ने मुझे अपना घर दे दिया।

नेहा ने बताया, 2016 में हैदराबाद स्थित सेंट फ्रांसिसको वूमेन कॉलेज में कंप्यूटर इंजीनियरिंग में दाखिला ली। 5वें सेमेस्टर में जब मुझे 2019 में अमेजन से जॉब का ऑफर आया, तो मैं जॉब के लिए मना नहीं कर पाई और कंप्यूटर इंजीनियर के रूप में जॉब के लिए हामी भरी। लेकिन लगातार मेहनत कर मैंने अमेजन का इंटरनल एग्जाम पास किया, आज सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में डाटा एनालिसिस्ट के तौर पर काम कर रही हूं।

नेहा बताती हैं, 2020 में जब देश में कोरोना फैला तो घर की दिक्कत हुई। मकान मालिक मकान खाली करवा रहे थे। नए मकान खोजने में परेशानी हुई। तब मेरी नई जॉब लगी थी, तो मैंने पापा से कहा, हमें नया मकान लेना चाहिए। पापा नहीं माने। बोले-इतने पैसे नहीं हैं कि घर खरीद सकूं। बनाना होगा तो भविष्य में जगदीशपुर में पैतृक आवास पर घर बनाऊंगा। फिर मैंने पापा को बिना बताए सैलरी अकाउंट से लोन अप्लाई किया, तो 30 लाख का लोन अप्रूव हो गया। पापा से कहा, किराया जितना ही ईएमआई भरेंेगे। तब पापा तैयार हुए। जीरोमाइल में बसंत विहार कॉलोनी में दिसंबर 2021 में टू बीएचके फ्लैट बुक की और घर की चाबी सौंपी। अभी यहां मेरे अलावा मां शारदा मिश्रा, पापा और दादी रहती हैं। मेरा छोटा भाई हैदराबाद से ही बीकॉम कर रहा है।

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