स्पूतनिक लाइट: भारत को जल्द मिल सकती है यह सिंगल डोज वैक्सीन, जानिए इसकी प्रभावकारिता और खास बातें

कोरोना महामारी को जल्द से जल्द खत्म करने के लिए भारत लगातार प्रयास कर रहा है, टीकाकरण क्षमता को बढ़ाया जा रहा है। राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक 75 करोड़ 89 लाख कोविड रोधी टीके लगाए जा चुके हैं। वैसे तो अभी देश में दो डोज वाली कोरोना वैक्सीन का इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही भारत को सिंगल डोज वैक्सीन भी मिल सकती है। दरअसल, ड्रग कंट्रोलर ऑफ इंडिया ने रूस की स्पूतनिक लाइट वैक्सीन को भारत में तीसरे चरण के ट्रायल की मंजूरी दे दी है। यह सिंगल डोज वैक्सीन है। कई अध्ययनों में वैज्ञानिकों द्वारा यह दावा किया गया है कि स्पूतनिक लाइट वैक्सीन कोरोना के खिलाफ काफी असरदार है। भारत में वैसे पहले से ही रूस की स्पूतनिक-वी वैक्सीन का इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में आइए जानते हैं कि यह स्पूतनिक लाइट वैक्सीन, स्पूतनिक-वी से कैसे अलग है, इसकी प्रभावकारिता क्या है? 

स्पूतनिक-वी से कैसे अलग है स्पूतनिक लाइट?  पहली बात तो ये कि स्पूतनिक-वी दो डोज वाली वैक्सीन है, जिसे बनाने में दो अलग-अलग वेक्टर का उपयोग किया गया है। द लैंसेट नामक पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, इसकी प्रभावकारिता 91.6 फीसदी के करीब पाई गई है। वहीं स्पूतनिक लाइट की अगर बात करें तो यह स्पूतनिक-वी वैक्सीन का पहला घटक है। अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स प्रांत के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा इकट्ठा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस वैक्सीन की प्रभावकारिता 78.6 से 83.7 फीसदी के बीच पाई गई है। 

क्यों खास है स्पूतनिक लाइट?  स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि स्पूतनिक लाइट सिंगल डोज वैक्सीन के आ जाने से कोरोना के खिलाफ टीकाकरण की रफ्तार को तेज करने में काफी मदद मिल सकती है। रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष यानी आरडीआईएफ के प्रमुख किरिल दिमित्रीव ने पिछले महीने ही कहा था कि स्पूतनिक लाइट वैक्सीन कम समय सीमा में लोगों के बड़े समूह को प्रतिरक्षित करने की चुनौती को हल करने में कारगर साबित हो सकती है। 

रूस में तो कोरोना की इस सिंगल डोज वैक्सीन का इस्तेमाल हो रहा है। आरडीआईएफ ने बताया है कि इस एक खुराक वाले टीके की कीमत 10 डॉलर यानी करीब 737 रुपये से भी कम है। इस लाइट वर्जन कोरोना वैक्सीन को भी मॉस्को के गमलेया रिसर्च इंस्टीट्यूट ने तैयार किया है। इसे बनाने के लिए आरडीआईएफ) की ओर से वित्तीय सहायता दी गई थी।

आरडीआईएफ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी किरिल दिमित्रिव ने कुछ महीने पहले ही यह दावा किया था कि यह स्पूतनिक लाइट वैक्सीन अस्पताल में भर्ती होने वाले गंभीर मामलों की संभावना को काफी कम कर देता है। उनका यह भी दावा था कि यह कोरोना वायरस के सभी नए वैरिएंट्स के खिलाफ भी प्रभावी साबित हुआ है। 

स्पूतनिक लाइट वैक्सीन के साइड-इफेक्ट्स? स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, कोरोना की अन्य वैक्सीन की तरह ही स्पूतनिक लाइट वैक्सीन लेने वालों को भी हल्के साइड-इफेक्ट्स हो सकते हैं, जैसे इंजेक्शन वाली जगह पर हल्का दर्द, बुखार, सिरदर्द, थकान और मांसपेशियों में दर्द आदि। अब तक हुए अध्ययनों में इस वैक्सीन से लोगों में खून के थक्के बनने जैसे मामले या कोई अन्य गंभीर दुष्प्रभाव देखने को नहीं मिले हैं। नोट: डॉ. परवेश मलिक एक फिजिशियन हैं और वर्तमान में पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में कार्यरत हैं। डॉ. मलिक ने हरियाणा के महर्षि मार्कंडेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज एंड रिसर्च मुल्लाना, से अपना एबीबीएस पूरा किया है। इन्होंने जनरल मेडिसिन में एमडी भी किया। पानीपत के उजाला सिग्नस महाराजा अग्रसेन अस्पताल में काम करने से पहले डॉ. परवेश ने एम.एम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च महर्षि मार्कंडेश्वर यूनिवर्सिटी में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर काम किया है। 

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