बिहार के SKMCH अस्पताल के पीछे मिले सैकड़ों नरकंकाल, बोरियों में बंद मिली अनगिनत लाशें

PATNA : SKMCH से एक नया मामला सामने आ रहा है। यहां पर नर कंकाल मिलने से हड़कंप मच गया है। मीडिया में खबर आने के बाद प्रशासन ने मामले की जांचे के आदेश दिए हैं।

समाचार एजेंसी एएनआई ने खबर दी है कि हॉस्पिटल के पीछे नर कंकालों के कई टुकड़े पाए गए हैं। अस्पताल प्रशासन मामले की जांच कराने की बात कह रहा है। इस अस्पताल में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम यानी चमकी बुखार से अब तक 130 बच्चों की मौत हो चुकी है। पूरे बिहार में करीब 165 से अधिक बच्चों के मरने की खबर है। यह संख्या ज्यादा भी हो सकती है।

अस्पताल के पीछे कंकाल कहां से आए, यह बात आपको भले ही विचलित करे, लेकिन स्थितप्रज्ञ नीतीश और उनका जरखरीद मीडिया इस पर मौन रह सकता है, या संभाल कर बोलेगा। मेरा पत्रकारिता का दस साल का अनुभव कहता है कि नीतीश से बेहतर मीडिया को इस देश में कोई मैनेज नहीं कर सकता, नरेंद्र मोदी और अमित शाह भी नहीं।

SKMCH के अधीक्षक डॉ एसके शाही ने इस मामले की जांच के लिए एक टीम गठित की है। प्राचार्य और अधीक्षक की टीम संयुक्त रूप से इस मामले की जांच करेगी। उन्होंने कहा कि यह बिल्कुल अमानवीय है। इसके साथ ही यह पुलिस और अस्पताल कर्मियों की लापरवाही भी है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार शव की अंत्येष्टि के लिए 2000 रुपए देती है। उसके बाद भी इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं। अस्पताल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है।

बताते चले कि मुजफ्फरपुर में बीते 19 दिनों में एईएस के 461 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें 152 बच्चों की मौ-त हो चुकी है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की ओर से शाम में जारी रिपोर्ट के अनुसार मुजफ्फरपुर में बुधवार को पांच बच्चों की जान गई है। रिपोर्ट में अबतक 95 बच्चों की मौ-त की बात कही गई है। एसकेएमसीएच के अधीक्षक डॉ। एसके शाही व सीएस डॉ। एसपी सिंह ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि इसमें एसकेएमसीएच व केजरीवाल अस्पताल की रिपोर्ट को शामिल किया गया है।

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दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने एम्स पटना के डॉक्टर सहित अन्य विशेषज्ञों से फोन पर जानकारी ली। विशेषज्ञों से बच्चों के केस हिस्ट्री व तकनीकी पक्षों पर चर्चा की। जांच में जो बात सामने आयी उसको साझा किया। वहीं, एसकेएमसीएच के अधीक्षक ने बताया कि अब डॉक्टरों की कमी नहीं है। स्वास्थ्य मंत्रालय दिल्ली से कई शिशु रोग विशेषज्ञ आ रहे हैं।

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