बिहार से पूर्णिया के आशीष ने लाया 52वां स्थान, बनेंगे IAS Officer

संघ लोक सेवा आयोग (Union Public Service Commission) ने 2020 का परिणाम घोषित कर दिया है। बिहार (Bihar) के पूर्णिया (Purnea) जिले के महबूब खां टोला निवासी आशीष मिश्रा (Ashish Mishra) ने इस परीक्षा में सफलता हासिल की है। बिहार के कटिहार के शुभम कुमार ने इस परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।  वहीं कटिहार से सटे पूर्णिया जिले के आशीष मिश्रा ने इस परीक्षा में 52 वां स्थान हासिल किया है। उन्होंने दूसरे प्रयास में यह सफलता हासिल की है। आशीष के इस कामयाबी पर उनके पिता और परिवार के लोगों में खुशी का माहौल है।

आशीष मिश्रा के पिता सुशील मिश्रा ने बेटे की सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए बताया कि आशीष ने पूर्णिया सहित पूरे बिहार का नाम रौशन किया है। उन्होंने बताया कि बेटे ने दूसरे ही प्रयास में यह सफलता हासिल कर ली। पहले प्रयास में इंटरव्यू के बाद उनका सिलेक्शन नहीं हुआ था।

आशीष के पिता ने कहा कि आशीष की स्कूलिंग डॉन बॉस्को में हुई। जिसके बाद 10 वीं तक की पढ़ाई ब्राइट कैरियर स्कूल से हुई। जिसके बाद प्लस टू की पढ़ाई मिलिया कॉन्वेंट से हुई। उन्होंने कहा कि साल 2014 में उसका सेलेक्शन आईआईटी बीएचयू के लिये हुआ।

वहां से पढ़ाई करने के बाद उनका कैंपस सेलेक्शन हो गया था। मगर मैंने यूपीएससी की तैयारी करने को कहा। पहले प्रयास में वह इंटरव्यू तक गया। इसके बाद दूसरे प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा में सफल हो गया। आशीष के पिता ने बताया कि यूपीएससी में उनका ऑप्सशनल पेपर फिजिक्स था।

आशीष के पिता ने कहा कि यूपीएससी में सफल होने के बाद आशीष ने अपने दादा स्व.राजदेव मिश्रा और दादी स्व.चंद्रावति देवी के साथ मां ज्योति मिश्रा के सपने को साकार किया है। बता दें कि आशीष दो भाई और तीन बहन है। बड़े भाई आनंद कुमार आईआईटीयन हैं। वहीं बड़ी बहन अनु श्रेया विदेश में रहती हैं। जबकि अन्य दो बहनों में चांदनी मिश्रा और नेहा मिश्रा ज्यूडिशियल परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं।

यूपीएसपी की परीक्षा में 52वां रैंक प्राप्त करने वाले आशीष कुमार मिश्रा ने कहा कि आर्थिक लाचारी से कभी भी किसी छात्र या छात्रा को घबराना नहीं चाहिए। गरीबी कभी भी मंजिल पाने में बाधक नहीं होती है। दृढ़ निश्चय, सकारात्मक सोच, एकाग्रता व समर्पण का सूत्र हर सपने को साकार करने के लिए काफी है।

आशीष ने कहा कि अब तक के सफर में उन्होंने वह दिन भी देखा है, जब वे आइआइटी की तैयारी के लिए कोटा नहीं जा सके। पिताजी की आर्थिक स्थिति को देखते उन्होंने पटना में रहकर आइआइटी निकालने का संकल्प लिया और उसे पूरा भी किया।

इसके अलावा उन्होंने कभी अपने में भटकाव नहीं आने दिया। उन्होंने बताया कि झारखंड कैडर के आइएएस मनीष कुमार, पूर्व डीजीपी अभयानंद व उनके चाचा अभय कुमार मिश्र के साथ-साथ उनके माता-पिता उनके आदर्श रहे हैं।

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