बिहार में ‘टूटा’ महागठबंधन, बनेगा थर्ड फ्रंट, शरद-उपेंद्र-मांझी की गुफ्तगू से सियासत गरमायी

पटना के एक होटल के बंद कमेरे में महागठबंधन के चार दिग्गजों की गुप्तगू से राज्य में सियासत गरमा गई है। अटकलें तेज हो गई हैं। इसके मुताबिक इस मुलाकात का एक महत्वपूर्ण हिस्सा शरद यादव को बतौर मुख्यमंत्री उम्मीदवार पेश करना भी है। हालांकि जो नेता बैठक में शरीक हुए उनके प्रतिनिधि इसे महज कयास ही बता रहे हैं। लेकिन, माना यह जा रहा है कि अंदर-अंदर कुछ खिचड़ी पक रही है।

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव महागठबंधन के सीएम उम्मीदवार के रूप में स्वीकार नहीं हैं। यह बात जीतन राम मांझी के साथ शरद यादव भी पहले कह चुके हैं। लेकिन, अब इस खेमे में रालोसपा प्रमुख उपेन्द्र कुशवाहा और वीआईपी के मुकेश सहनी के भी आ जाने की चर्चा है। यही चारों नेता शुक्रवार को एक होटल में मिले। रालोसपा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राजेश यादव ने कहा कि इस मुलाकात को लेकर सीएम जैसी बात नहीं है। लेकिन हम यह जरूर चाहते हैं कि लालू प्रसाद की अनुपस्थिति में शरद यादव महागठबंधन की कमान संभालें। उधर, हम के प्रवक्ता विजय यादव ने कहा कि महागठबंधन एकजुट है। यह मुलाकात एक औपचारिकता थी। अगले 18 फरवरी को महागठबंधन के दलों में सीट शेयरिंग के विषय में महत्वपूर्ण फैसला होगा।

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बताया जाता है कि सीटों की हिस्सेदारी भी पहले तय करने का दबाव शुरू है। कुछ नेता शरद यादव को महागठबंधन समन्वयक की भूमिका अदा करने को कह रहे हैं। उनका मानना है कि लालू प्रसाद की अनुपस्थिति में कोई ऐसा नेता होना चाहिए जो सभी दलों के बीच समन्वय बनाकर रखे। अगर एक बार शरद को महागठबंधन का नेता या समन्वयक के रूप में प्रस्तुत कर दिया गया तो सीएम के रूप में तेजस्वी की दावेदारी खुद कमजोर होने लगेगी।

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