जन्म और जाति प्रमाण पत्र बनाने में अब नहीं होगी परेशानी, सारा झंझट खत्म, एक मिनट में होगा काम

PATNA=आरटीपीएस: आवेदन और प्रमाण पत्र जारी करने की व्यवस्था अलग-अलग : लोक सेवाओं के अधिकार अधिनियम (आरटीपीएस) के तहत प्रमाण पत्र बनाने की ऑनलाइन सेवा में आई खराबी को ठीक कर लिया गया है। अब न तो आवेदन करने में दिक्कत है न ही प्रमाण पत्र जारी करने में परेशानी। आरटीपीएस की व्यवस्था सुचारू रूप से काम करे इसके लिए बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसायटी और एनआईसी के संयुक्त प्रयास से सॉफ्टवेयर को अपटेड किया गया है। सोमवार से नई व्यवस्था पूरी तरह काम करने लगी और इसके परिणाम भी अच्छे आ रहे हैं। थोड़ी बहुत जो परेशानियां हैं उसे भी जल्द ही दूर कर लेने का दावा किया गया है। ज्ञात हो कि आरटीपीएस के तहत आवेदन और प्रमाण पत्र जारी करने में आ रही समस्या को आपके अखबार हिन्दुस्तान में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था।

सॉफ्टवेयर में किया गया बदलाव: आरटीपीएस के लिए बनाए गए सॉप्टवेयर को अपडेट किया गया है। इस काम में एनआईसी के विशेषज्ञ कई दिनों से काम कर रहे थे। न सिर्फ सॉफ्टवेयर को अपडेट किया गया है बल्कि नई व्यवस्था ने इस ऑनलाइन प्रक्रिया में अहम बदलाव किए हैं। नई व्यवस्था के तहत आवेदन करने और प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अलग-अलग चैनल बनाया गया है। इससे शिकायत काफी हद तक दूर हो गई है।

पांच तरह के प्रमाण पत्र जारी होते हैं : लोक सेवाओं के अधिकार अधिनियम के तहत पांच तरह के प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं। यह एक ऑनलाइन सर्विस है, इसमें आवेदन करने से लेकर प्रमाण पत्र तक ऑनलाइन जारी किए जाते हैं। फिलहाल इस अधियिनम के तहत पांच तरह के प्रमाण पत्रों के लिए आवेदन किया जा सकता है। जाति, आय, आवासीय, नन क्रिमीलेयर और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का प्रमाण पत्र इसमें शामिल है।

आवेदन आए 1.40 लाख, 2.10 लाख प्रमाण पत्र जारी हुए : सॉफ्टवेयर अपडेट होने के बाद ऑनलाइन सेवा बेहतर ढंग से काम करने लगी है। आरटीपीएस के तहत मंगलवार को 1.40 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे। वहीं 2.10 लाख से ज्यादा आवेदन पत्र जारी किए गए।

पिछले दिनों हो रही थी परेशानी : आरटीपीएस के तहत ऑनलाइन व्यवस्था में पिछले दिनों काफी परेशानी आ रही थी। सॉफ्टवेयर पर लोड अधिक होने के चलते आवेदन की प्रक्रिया काफी धीमी थी। यही हाल प्रमाण पत्र जारी करने को लेकर भी था। जितने आवेदन रोज आ रहे थे उससे काफी कम प्रमाण पत्र जारी किया जा रहा था। लंबित आवेदनों की संख्या 20 लाख के करीब पहुंच गई थी। हालात को देखते हुए बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसायटी ने एनआईसी के साथ व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए काम शुरू किया। कई दिनों की मेहनत के बाद पूरी व्यवस्था को न सिर्फ दुरुस्त किया गया बल्कि सॉफ्टवेयर को भी अपडेट किया गया है।

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