Nitish Cabinet में भले ही गिनती में BJP आगे हो, लेकिन ताकत में आगे हैं JDU, ये हैं वजह

Desk: बिहार विधानसभा में भाजपा के 74 MLA हैं। बहुजन समाज पार्टी के इकलौते विधायक के विलय के बाद भी JDU के पास 44 विधायक ही हैं। निर्दलीय होकर भी JDU कोटे से मंत्री बने एक को मिलाकर 45 की ताकत है मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अकेले। इसके बावजूद BJP के मुकाबले सरकार में JDU बहुत भारी है। इतनी भारी कि भाजपा के दो डिप्टी CM समेत 16 मंत्रियों के 21 विभागों का जितना बजट है, उतना JDU के तीन विभागों का हिसाब है। बजट का आधा हिस्सा JDU के पास है और करीब 30 प्रतिशत BJP के पास। बाकी 20 प्रतिशत में हाईकोर्ट समेत अन्य इकाइयों का बजट समाहित होता है।

5 अंक वाले 5 विभाग JDU के पास, 2 भाजपा के पास

मंत्रिमंडल विस्तार होगा, लेकिन JDU-BJP के हिस्से आ चुके विभाग नहीं बदलेंगे- भास्कर ने JDU सूत्रों के जरिए दिसंबर में ही यह खुलासा कर दिया था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए RCP सिंह को यह मंत्र पहले ही दे दिया था। हुआ भी वही। हरेक को दिखाने के लिए मंत्रियों की संख्या भले ही BJP ने बढ़ा ली, बाजी तो JDU के हाथ में ही रह गई। 5 अंक वाले 5 विभाग JDU के पास हैं और BJP के पास ऐसे सिर्फ दो ही विभाग। वह भी 5 अंक छूकर रह गए विभाग। JDU के 104424 करोड़ के मुकाबले BJP के पास 62339 करोड़ के बजट वाला विभाग है।

मांझी की पार्टी HAM को मुकेश सहनी से ज्यादा ताकत

मंत्रिमंडल विस्तार में न तो जीतन राम मांझी की पार्टी HAM को कोई फायदा मिला और न ही मुकेश सहनी की VIP को अंतर पड़ा। इसके बावजूद, JDU के कोटे से NDA में रही मांझी की पार्टी को ज्यादा बजट मिला हुआ है। HAM के इकलौते मंत्री जीतन राम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन के पास दो विभाग हैं और कुल बजट करीब 2924 करोड़ का है। दूसरी तरफ VIP के अध्यक्ष मुकेश सहनी के पास एक ही विभाग है और उसका भी बजट महज 1178 करोड़ है।

पिछली सरकार के मुकाबले BJP की स्थिति बेहतर हुई

2020 विधानसभा चुनाव के नतीजों के कारण भाजपा की स्थिति पहले के मुकाबले बेहतर जरूर हुई, इसमें कोई शक नहीं। गवाही आंकड़े ही दे रहे हैं। चुनाव के पहले JDU के पास 26 विभाग थे और कुल बजट 122633 करोड़ था। मतलब, कुल का 58 प्रतिशत करीब। दूसरी तरफ भाजपा के पास 18 विभाग थे और बजट JDU के मुकाबले आधे से भी कम करीब 48233 करोड़। यानी, कुल बजट का करीब 23 प्रतिशत था भाजपा के पास।

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