बेगूसराय में 100 मीटर के अंदर 4 सुसाइड, कारण- कुछ नहीं

Desk: बिहार में आत्महत्या का ट्रेंड चर्चा में है। ज्यादातर में सुसाइड की वजह भी आगे-पीछे सामने आ ही रही है। लेकिन, बेगूसराय में सामने आ रहीं सुसाइड की कहानियां डरा रही हैं। एक मुहल्ले में 100 मीटर के दायरे के 3 घरों में आत्महत्या हुई है। वह भी बिना कारण। चौथी खुदकुशी की जानकारी तो लोग दे रहे हैं, लेकिन 3 दिन तक ढूंढ़ने पर भी रिपोर्टर को उसका परिवार नहीं मिला। बाकी तीनों सुसाइड इसी मौसम में हुए हैं। कोई झगड़ा-झंझट नहीं। कोई सुबह जागा और फंदे पर झूल गया। कोई खेलकर लौटी और लटक गई। कोई सब्जी जलती छोड़ झूल गई। बेगूसराय शहर के विष्णुपुर की इन घटनाओं पर मुहल्ले में कोई बात नहीं करना चाहता, लेकिन हर घर के अंदर डर है। लोग टोटका या बुरा साया कह रहे, लेकिन हम अंधविश्वास को नहीं मानता।

सुसाइड- 1

28 साल के संजीव को लोग तब भी बौआ कहते थे : बेगूसराय नगर थाना क्षेत्र में वार्ड नंबर 42 के पुरानी भगवती स्थान के पास पहला केस 05 नवंबर 2018 को सामने आया। पुश्तैनी घर से कुछ दूरी पर नया घर बनाकर रह रहा था संजीव कुमार का पूरा परिवार। परिवार का छोटा बेटा संजीव तीसरे तल्ले पर सोया था। 05 नवंबर को सुबह 10 बजे तक उसे चाय पीने के लिए बार-बार नीचे से आवाज लगाई गई, लेकिन वह नहीं आया। कॉल करने पर भी नहीं उतरा। करीब सवा 10 बजे बड़ा भाई सुजीत ऊपर पहुंचा तो दरवाजा बंद था। बहुत आवाज लगाने पर भी रिस्पांस नहीं मिला तो दरवाजा तोड़ा गया। अंदर हैरान करने वाला सीन था। संजीव सुबह जागकर अपने ही बेड के पंखे से झूल गया था। डेडबॉडी गिरी थी और पंखे पर गमछा लटका था। 2018 की इस असामान्य मौत पर नगर थाना पुलिस ने अबतक फाइनल रिपोर्ट नहीं लगाई है कि कोई निष्कर्ष निकले। संजीव के पिता लक्ष्मण दास अकारण अपने बौआ की मौत के कारण दिमागी रूप से बीमार हो चुके हैं। संजीव भले 28 साल का था, लेकिन घर वाले उसे बौआ ही कहते थे। रिपोर्टर को संजीव के घर उसका बड़ा भाई सुजीत नहीं मिला। उसकी पत्नी मिली, लेकिन अपने देवर संजीव की तस्वीर तक नहीं रखे होने की बात कहती है, क्योंकि यह अस्वाभाविक मौत थी। बिना कारण, असमय।

सुसाइड- 2

संजीव के अहाते से कॉर्क लेकर लौटी और लटक गई रिया : 2018 के जाड़े में सुसाइड करने वाले संजीव की चर्चा 11 नवंबर 2020 को फिर उठी। वजह यह कि उसके पुश्तैनी घर के अहाते में बैडमिंटन का कॉर्क ढूंढ़कर लौटी 12 साल की रिया ने अपने घर पहुंचकर जान दे दी थी। रिया 9वीं की छात्रा थी। 11 नवंबर को शाम साढ़े 4 बजे के करीब वह बैडमिंटन खेल रही थी। छोटा भाई क्रिकेट खेलने गया हुआ था। आंगनबाड़ी सेविका के रूप में कार्यरत मां पूजा कुमारी घर में नहीं थी। एक्सीडेंट में घायल अपने पिता को देखने पूर्णिया गई हुई थी। रिपोर्टर से रिया की मां भी नहीं मिलती है। उसका छोटा भाई लक्की दिखता है। उससे बात होती है तो अहाते की ओर इशारा कर बताता है- “इहां खेल रही थे, उ पार गई कॉर्क लाने। कॉर्क नहीं मिला। फिर उधर चल के लगा (फांसी) ली।” कुछ लोग रिया को पप्पू दास की गोद ली बेटी भी कहते हैं, लेकिन इससे इस सुसाइड का केस बदलता नहीं है। पड़ोसी शंभु कुमार बताते कि वह ठीक से ही घर में रह रही थी। पढ़ भी रही थी। शंभु बताते हैं कि सुसाइड के दिन भी वह उनके घर के सामने से ही गई और फिर लटक गई फंदे में। रिया के पिता-भइया दिल्ली में रहते हैं और मां इस मौत पर बात करने को दरवाजा तक खोलने के लिए तैयार नहीं हुई।

सुसाइड- 3

बाप को चाय पीने भेज सब्जी चढ़ाई और दुपट्‌टे पर झूल गई रूमा : बेगूसराय के विष्णुपुर (बिशनपुर) का रुख 20 जनवरी 2021 को तब किया, जब एक ही मुहल्ले में सुसाइड की चौथी घटना से डर की जानकारी सामने आई। 20 जनवरी को सुबह 11 से 11:30 के बीच इसी छोटे से मुहल्ले की 18 साल की लड़की रूमा ने दुपट्‌टे का फंदा लगाकर जान दे दी थी। रूमा 5 भाई बहनों में दूसरे नंबर पर थी। उस समय बड़ा भाई राजेश शॉर्टहैंड सीखने गया था। छोटी रूपा, गुड़िया के साथ 11 साल का भाई उत्तम भी पढ़ने गया हुआ था। रूमा ने श्रीकृष्ण महिला कॉलेज में इंटर फर्स्ट ईयर में एडमिशन लेकर पढ़ाई छोड़ दी थी, इसलिए घर में रहती थी। उसकी मां काली स्थान के पास फल बेचती है। पिता ठेले पर सब्जी बेचते हैं। उस दिन सुबह मां को नींबू की चाय पिलाकर उसने बाजार जाने दिया। पिता को कुछ देर बाद दूध की चाय कहीं बाहर पी आने के लिए कहा। चूल्हे पर सब्जी चढ़ा रूम में बंद हो गई। मसाला जलता रहा और उसने कमरा बंद कर खुदकुशी कर ली। परिवार को कोई वजह नहीं पता। मां रुकमिणी देवी कहती हैं- “हम त देखबो न कैलिए लक्ष्मी के। दोनों बेटी ऐले कोचिंग सै त वहै देखलकै (मैंने तो अपनी लक्ष्मी बेटी को देखा भी नहीं, दोनों छोटी बेटियां आईं, उन्हीं ने देखा।)।”

सुसाइड- 4

काजल के सुसाइड की चर्चा मगर कोई पता बता नहीं रहा : रिपोर्टर ने 20 जनवरी से 22 जनवरी तक विष्णुपुर के इस मुहल्ले में रोज कई घंटे बिताए। बच्चों के बीच चर्चा तो है, लेकिन चिंता नहीं। बड़ों के बीच चर्चा से ज्यादा चिंता और डर है। इस बीच एक और सुसाइड की जानकारी मिलती है। नाम सामने आता है- काजल। जो इस नाम की चर्चा करते हैं, वह इतना ही बोलते हैं कि “सुने हैं, पिछले साल की थी सुसाइड। रेंटर थी, लेकिन कहां रहती थी- पता नहीं। शायद यहां से सबलोग चला गया मकान छोड़कर।” यही बात कोई कैमरे पर बताने को तैयार नहीं। जिसने भी यह नाम लिया, अपना नाम पूछने पर रुका नहीं। मुहल्ले में मिले कन्हैया चौधरी इनकार भी करते हैं- “ऐसा कोई नाम सुने नहीं हैं हम।”

Source: Dainik Bhaskar

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