खुलेआम हो रहा नकली दूध का कारोबार, बंद पॉकेट में मिलाया जा रहा यूरिया-डिटेरजेंट

पहली बार : दूध में मिलावट पर देश के 1103 शहरों में एफएसएसएअाई का एक साथ सर्वे

दुनिया में सबसे ज्यादा दूध उत्पादन करने के बावजूद हमारे देश में लाेगाें काे शुद्ध दूध नहीं मिल रहा। भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की जांच में प्राेसेस्ड यानी पैकेट बंद दूध के 37.7% नमूने गुणवत्ता मानकाें पर फेल हाे गए। जबकि, नियमानुसार एक भी नमूना फेल नहीं हाेना चाहिए। दूसरी तरफ, खुले दूध के भी 47% नमूने फेल हाे गए। चाैंकाने वाली बात यह है कि पैकेटबंद दूध के 10.4% नमूनाें में सेफ्टी मानकाें का उल्लंघन भी पाया गया। जबकि, खुले दूध के मामलाें में यह अांकड़ा 4.8% रहा। पैकेटबंद अाैर खुले दूध काे मिलाकर कुल 41% नमूने फेल हुए हैं। एफएसएसएआई के सीईअाे पवन अग्रवाल ने शुक्रवार काे राष्ट्रीय दूध गुणवत्ता सर्वे-2018 की रिपोर्ट जारी करते हुए इन हालात काे गंभीर बताया। पटना समेत देश के 1103 शहरों से कुल 6,432 सैंपल लिए गए थे। सबसे ज्यादा मिलावट तेलंगाना में मिली। उसके बाद मध्यप्रदेश अाैर केरल का स्थान है।

देश में पैकेट बंद दूध के 37.7% नमूने गुणवत्ता में फेल : खुले दूध के 48% नमूने भी मानकों पर खरे नहीं उतरे

पटना समेत राज्य के 57 शहरों से 275 नमूने लिए गए। इनमें 45.5% की क्वालिटी में कमी पाई गई। ज्यादातर वह दूध था जो पैकेज्ड नहीं था। यहां सिर्फ 1% नमूनों में ही हानिकारक एफ्लाटॉक्सिन एम1 और एंटीबायोटिक पाया गया।

मध्यप्रदेश से लिए गए 335 नमूनों में 23, महाराष्ट्र में 678 में 9, गुजरात में 456 में 6, राजस्थान में 314 में 4 नमूनों में एंटीबॉयोटिक्स भी मिले हैं।

दिल्ली से लिए गए 262 नमूनों में से 38, पंजाब में 29, महाराष्ट्र में 20 राजस्थान में 13 नमूनों में एफ्लाटॉक्सिन एम1 मिला है।
एफ्लाटॉक्सिन एम1 पैकेटबंद दूध में ज्यादा है। तमिलनाडु, दिल्ली अाैर केरल के नमूनाें में एफ्लाटॉक्सिन एम1 सबसे ज्यादा मिला।

7% सैंपल ऐसे भी मिले, जिनमें सामने आया है कि पैकेट बंद दूध की प्रोसेसिंग के दौरान सुरक्षा मानक नहीं अपनाए गए।
पटना समेत राज्य के 57 शहरों से 275 नमूने लिए, 45% की गुणवत्ता में कमी.

93% सैंपल का दूध पीने लायक, पर क्वालिटी घटी
चिंता: दूध में मिले हानिकारक तत्वों की जांच को देश में कहीं भी उपयुक्त लैब नहीं.

एफएसएसएअाई ने 2018 में मई से अक्टूबर तक 1,103 शहरों से 6,432 नमूने लिए थे। इनमें से 40.5% पैकेटबंद अाैर बाकी खुला दूध था। दूध में मिलने वाले पदार्थों काे लेकर देश में पहली बार इतना विस्तृत सर्वेक्षण किया गया है। अग्रवाल ने कहा- चिंता की बात यह है कि दूध में माैजूद इन पदार्थाें की जांच के लिए देश में काेई उपयुक्त प्रयाेगशाला नहीं है।’ भारत दुनिया में दूध का सबसे बड़ा उत्पादक देश है। 2017-18 के दाैरान देश में 17.63 करोड़ टन दूध का उत्पादन हुअा था। सरकार ने 2022 तक इसे 25.45 करोड़ टन तक करने का लक्ष्य रखा है।

राहत: कुल 6432 सैंपल में से सिर्फ 12 में एंटीबॉयोटिक्स, यूरिया व पेस्टिसाइड मिले :देशभर से जुटाए गए 6,432 सैंपल में से सिर्फ 12 में यूरिया, डिटर्जेंट, हाइड्रोजन पैराऑक्साइड और न्यूट्रालाइजर जैसे पदार्थ मिले। 368 नमूनों में एफ्लाटॉक्सिन एम1, 77 में एंटीबॉयोटिक और सिर्फ 1 में कीटनाशक मिला। 1255 सैंपल में फैट, 2167 में एसएनएफ (ठोस वसा), 156 में माल्टोडेक्सट्रिन अौर 78 में शुगर मिला है। अग्रवाल ने कहा कि मानकाें के अनुसार नहीं हाेने के बावजूद यह स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह नहीं है। 93% सैंपल का दूध पीने लायक है। हालांकि, इसमें गुणवत्ता कम हो गई है।

बड़े ब्रांड का दूध मिलावटी कम, दूषित ज्यादा मिला
एफएसएसएअाई के सीईअाे ने कहा, ‘अाम अादमी मानता है कि दूध में ज्यादा मिलावट हाेती है। अध्ययन दिखाता है कि दूध दूषित ज्यादा है। बड़े ब्रांडाें का पैकेट बंद दूध भी दूषित है। अब इसे रोकना जरूरी हो गया है। एफ्लाटॉक्सिन एम1, एंटीबायाेटिक्स अाैर कीटनाशक पैकेटबंद दूध में ज्यादा मिले हैं। कहा- डेयरी उद्याेग हमारे अध्ययन काे चुनाैती दे सकता है, लेकिन उन्हें सुरक्षा मानकाें का सख्ती से पालन करना ही हाेगा। 1 जनवरी 2020 से जांच शुरू करनी हाेगी।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *