BPSC : डीएसपी के लिए 70 लाख रुपये, दूसरे पद के लिए 30 से 40 लाख लिया गया

बिहार सरकार की साख एक बार फिर दाव पर – BPSC प्रश्नपत्र लीक मामले में आर्थिक अपराध इकाई की चुनौती लगातार बढ़ती जा रही है तो तथ्य सामने आ रहा हैं वो कही ना कही आरा वाले थ्योरी को कमजोर कर रहा है क्यों कि परीक्षा के दौरान प्रश्न पत्र पहले वितरण करने को लेकर भले ही विवाद हुआ है लेकिन प्रश्न प्रत्र के लीक होने के मामले में अभी भी आरा की भूमिका संंदिग्ध ही है क्यों कि प्रश्न पत्र लीक का मामला जैसे ही सामने आया वैसे ही छात्रों का फोन आना शुरु हो गया था मेरे पास जो साक्ष्य है उसके अनुसार प्रश्न पत्र जहां से भी लीक हुआ है वो समय है 10 बजकर 24 मिनट है,मतलब ट्रेजरी से निकलने के साथ ही प्रश्न पत्र लीक हो गया था गौर करने वाली है कि प्रश्न पत्र पीडीएफ फाइल में लीक किया गया है मतलब प्रश्न पत्र लीक करने वाला मानसिक तौर पर पहले से ही इसकी तैयारी में लगा हुआ था ।
आर्थिक अपराध इकाई ने जो प्राथमिकी दर्ज की है उसके अनुसार 67वीं संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा प्रारंभ होने के निर्धारित समय से पहले ही प्रश्न सेट-सी का हिंदी प्रश्न पत्र सोशल मीडिया में वायरल हो चुका था. यह भी बताया गया है कि बिहार लोक सेवा आयोग के परीक्षा नियंत्रक को प्रश्न पत्र की प्रति उनके मोबाइल नंबर 9472276281 पर किसी व्यक्ति द्वारा मोबाइल नंबर 9472343001 से उन्हें दिनांक 8 मार्च 2022 को 11:43 बजे पूर्वाह्न में भेजा गया था।

वैसे 947234001नंबर से परीक्षा नियंत्रक अमरेंद्र कुमार को प्रश्न पत्र की कांपी के साथ लीक होने का मैसेज आया था वो नंबर बिहार पंचायती राज के निदेशक और चर्चित आईएएस रंजीत कुमार सिंह का है।एक बात और गौर करने वाली है कि आर्थिक अपराध इकाई की एफआईआर कॉपी से एक बात और स्पष्ट होती है कि आरा में हंगामा शुरू होने से पहले ही बीपीएससी के दफ्तर में पेपर लीक की खबर मिल गई थी. आरा में हंगामा लगभग सवा 12 बजे यानी कि 12:15 के बाद शुरू हुआ जबकि उससे आधा घंटा पहले ही बीपीएससी के परीक्षा नियंत्रक के पास पेपर की कॉपी पहुंच गई थी वैसे प्रश्न पत्र 10.24 मिनट पर ही छात्रों के पास पहुंच गया था ।

ऐसे में आरा पर प्रश्न पत्र लीक करने का ठीकरा फोड़ना जल्दबाजी होगा वैसे एक और बड़ा सवाल है जिसका जबाव आरा डीएम को देना चाहिए क्यों कि मान्यता प्राप्त कांलेज में 10 वीं या 12वीं के परीक्षा का सेंटर बनाया जाता है तो परीक्षा नियंत्रक किसी ना किसी सरकारी स्कूल और सरकारी कांलेज के शिक्षक या फिर प्रोफेसर को बनाया जाता है ऐसे में बीपीएससी जैसे महत्वपूर्ण परीक्षा में किस परिस्थिति में परीक्षा पूरी तौर पर मान्यता प्राप्त कांलेज के प्रोफेसर और प्रिंसिपल के जिम्मे छोड़ दिया गया जबकि उस कांलेज को लेकर पहले भी शिकायत रही है।
इतना ही नहीं इस परीक्षा में शामिल वीक्षक की सूची दो दिन पहले ही जारी कर दिया गया था जबकि ऐसा पहले नहीं होता था कई ऐसे सवाल हैं जो बीपीएससी के कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही है जो जानकारी मिल रही है यह खेल बड़े स्तर पर चल रहा था डीएसपी के लिए 70 लाख रुपये लिये गये हैं वहीं किसी भी पद के लिए 30 से 40 लाख रुपया पटना के कई कोचिंग संस्थान वालो ने जमा करवाया है।

-santosh singh, kasish news

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