IAS रंजीत कुमार को जानबूझकर फंसाने का मन बना चुकी है BPSC, घंटों हुआ पूछताछ

BPSC प्रश्न पत्र लीक मामले में आर्थिक अपराध इकाई जिस तरीके से आईएएस अधिकारी रंजीत कुमार सिंह और परीक्षा नियंत्रक अमरेंद्र कुमार के बीच हुए वॉट्सऐप मैसेज को आधार बनाकर FIR दर्ज किया था उसी दिन साफ हो गया था की जांच टीम को कही ना कही इन दोनों के बीच प्रश्न पत्र लीक होने को लेकर जो संवाद हुआ है उसको जांच के दायरे में लाना चाह रही है । हालांकि इसको लेकर आईएएस अधिकारियों ने मीडिया में खबर आने के बाद गहरी नाराजगी व्यक्त किया था अब खबर आ रही है कि आर्थिक अपराध इकाई ने रंजीत कुमार सिंह से लंबी पूछताछ की है और उनके वॉट्सऐप पर प्रश्न पत्र लीक होने कि सूचना भेजने वाले लड़के के बारे में जानकारी मांगी है ।

ऐसा कहां जा रहा है कि जो लड़का इनको वॉट्सऐप किया था उसके साथ इनकी कई तस्वीरे सोशल मीडिया पर मौजूद है। लेकिन सवाल उठता है कि इसमें गलत क्या है ,उक्त आईएएस अधिकारी प्रश्न पत्र लीक होने की सूचना परीक्षा शुरू होने से कोई 16 मिनट पहले BPSC के परीक्षा नियंत्रक को भेजा है ये कोई अपराध तो नहीं है ये तो हर जनता का कर्तव्य है कि कही कोई अपराध होने कि सूचना मिलती है तो तुरंत पुलिस या फिर संबंधित विभाग को सूचना दे। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि प्रश्न पत्र लीक होने कि सूचना छात्र नेता दिलीप कुमार ने भी अपने सोशल मीडिया के पेज पर सार्वजनिक किया था उसने 11:49 पर प्रश्न पत्र की कॉपी मुख्यमंत्री कार्यालय को भी भेज दिया था आर्थिक अपराध इकाई उससे पांच घंटे तक पूछताछ भी किया था लेकिन उसके मोबाइल को आर्थिक अपराध इकाई ने केस का हिस्सा नहीं बनाया ।

हालांकि आर्थिक अपराध इकाई का कहना है कि मामला काफी संवेदनशील है ऐसे में हमारे पास गवाह के तौर पर आईएएस अधिकारी मौजूद हैं तो फिर छात्र नेता को सूचक की श्रेणी में रखने का कोई मतलब नहीं है ,क्यों कि ये बयान बदल भी सकता है लेकिन जानकार बता रहे हैं कि आईएएस अधिकारी के मोबाइल नम्बर का जिक्र FIR में करना दूर की सोच है क्यों जिस नम्बर से आईएएस अधिकारी को प्रश्न पत्र लीक होने कि सूचना दी गयी है अभी तक जो साइंटिफिक इन्वेस्टिगेशन हुआ है उसमें उस नम्बर की भूमिका संदिग्ध है जिस वजह से आर्थिक अपराध इकाई उसे सामने आने को लेकर लगातार दबिश बनाए हुए हैं।

1—व्हिसल ब्लोअर की भूमिका क्यों है संदेह के घेरे में आर्थिक अपराध इकाई प्रश्न पत्र लीक की घटना के पांच दिन बीत जाने के बाद भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है अभी तक उनका पूरा अनुसंधान प्रश्न पत्र लीक कहां से हुआ और प्रश्न पत्र से जुड़ा पहला वॉट्सऐप मैसेज किसके मोबाइल से भेजा गया इस पर ही केंद्रित है इसी कड़ी में आर्थिक अपराध इकाई छात्र नेता और आईएएस अधिकारी से पूछताछ किया है वैसे बिहार के लिए ये कोई नहीं बात नहीं है पिछले बीपीएससी परीक्षा के दौरान भी औरंगाबाद में आरा की तरह ही हंगामा हुआ था लेकिन बीपीएससी प्रश्न पत्र लीक को लेकर कोई जांच नहीं करायी और सिर्फ औरंगाबाद सेंटर की परीक्षा रद्द कर पूरे मामले का इति श्री कर दिया था ।लेकिन इस बार ऐसा क्या हुआ जो आरा के हंगामे के बाद चंद मिनटों में कमेटी भी बन गयी और शाम होते होते कमिटी का रिपोर्ट भी आ गया और परीक्षा भी रद्द हो गया । पेच यही है प्रश्न पत्र लीक करने वाले गिरोहों के बीच ऐसा क्या हुआ जो प्रश्न पत्र लीक की खबर एक आईएएस अधिकारी तक के पास पहुंचा दिया खेला यही है और आर्थिक अपराध इकाई इसी खेल को उजागर करने के लिए तथाकथित व्हिसल ब्लोअर को ही जांच के दायरे में ले आया है बस देखना यह है कि कब सच सामने आता है या फिर आता भी है कि नहीं ।

2–कौन है आईएस रंजीत कुमार सिंह रंजीत कुमार के बारे में मुझे कोई खास जानकारी नहीं था बहुत पहले हमारे एक मित्र ने कहा था कि रंजीत मेरा जूनियर रहा है और अच्छा लड़का है बात आयी चली गयी लेकिन यही कोई छह माह पहले इसकी एक खबर को यूट्यूब से हटाने को लेकर एक बड़ा खेल हुआ मुझे समझ में नहीं आया कि एक वर्ष पूरानी खबर को यूट्यूब से हटाने को लेकर इस तरह का खेल करने की जरूरत क्या है । इस घटना के बाद पहली बार रंजीत कुमार के बारे में जानकारी जुटाना शुरू किया क्यों कि जिस व्यक्ति ने यूट्यूब से खबर हटाने को लेकर खेल खेला उसके बारे में पता चला कि इसका एक एनजीओ है जो मधुबनी में कुछ काम किया था उसमें गड़बड़ी हुई थी जिसको लेकर स्थानीय पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर कर दिया है उसी को लेकर कुछ मोल भाव हुआ है बात आयी गयी ये सब चलता रहता है। लेकिन इस बार चर्चा में आया तो दिलचस्पी बढ़ी रंजीत कुमार सिंह गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारी हैं और इन दिनों बिहार प्रतिनियुक्ति पर आये हुए हैं ।इनकी खासियत यह है कि बहुत ही लम्बे अर्से बाद कोई ऐसा बिहारी है जो बिहार में पढ़ाई किया , पटना में तैयारी किया और पटना विश्वविद्यालय में पढ़ाई करते हुए आईएएस बना था जिस दौर में इसका चयन हुआ था उस दौर में ये बिहार के छात्रों का हीरो हुआ करता था । हालांकि उस दौर में भी इसके चयण को लेकर कई तरह के किस्से पटना विश्वविद्यालय के छात्रों के जुबान पर आज भी है खैर जो भी हो लेकिन प्रतिनियुक्ति पर बिहार आने के बाद उन्हें सीतामढ़ी का डीएम बनाया गया बाद में इनके कई किस्से मशहूर होने लगे और फिर सरकार उनको सीतामढ़ी से हटा कर शिक्षा विभाग पटना में पोस्ट कर दिया ।

चर्चा यह है कि शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों के तबादले को लेकर मंत्री और इनके बीच विवाद की बात सामने आयी और रातो रात इनका शिक्षा विभाग से तबादला कर दिया गया और शिक्षा विभाग के सारा तबादले को रद्द कर दिया है । व्यक्तिगत जीवन को लेकर भी कई तरह की चर्चा सरेआम है जो भी हो लेकिन जब BPSC प्रश्न पत्र लीक मामले में एक मीडिया द्वारा सवाल खड़े किये जाने के बाद उनकी जो प्रतिक्रिया आयी वो भी चौकाने वाला था,मीडिया को एक प्रेस रिलीज जारी किया प्रेस रिलीज का मजबून देख ऐसा लगा कि यह रिलीज आर्थिक अपराध इकाई या फिर BPSC द्वारा जारी किया गया है जबकि दोनों ऐन्जसी से बात कि गई तो वो साफ इनकार कर दिये। बाद में प्रेस रिलीज पर जब गौर किया गया तो किसकी ओर से जारी किया गया है उसका नाम ही दर्ज नहीं था खैर कभी कभी अनुभव की कमी या फिर अति आत्मविश्वास की वजह से इस तरह की गलतियां हो जाती है और यही वजह है कि आर्थिक अपराध इकाई ने बस किसी नम्बर से प्रश्न पत्र लीक होने की सूचना इन तक पहुंची इसकी जानकारी देने के लिए मुख्यालय बुलाया तो बड़ी खबर बन गयी । खैर मामला जो भी हो साख दाव पर जरूर लग गया है ।

-Santosh singh, Kasish news

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