हर बार रिपोर्ट भेजने में देरी करता है विभाग, लेकिन नुकसान बिहारवासियों का होता

Desk: बिहार के 134 अंगीभूत कॉलेजों ने नए वित्तीय वर्ष के लिए सालाना कार्य योजना की रिपोर्ट शिक्षा विभाग को नहीं दी है। जबकि, 10 जनवरी तक कॉलेजों को रिपोर्ट देनी थी। इससे विभाग को उच्च शिक्षा का आगामी बजट तय करने में परेशानी हो रही है। विभाग ने तय किया है कि 16 जनवरी तक रिपोर्ट नहीं मिली तो आगामी बजट में संबंधित कॉलेजों को दी जाने वाली राशि में 50 फीसद कटौती कर दी जाएगी। दरअसल, प्राचार्यों के लिए सालाना योजना बनाना अनिवार्य है। इसमें बताना जरूरी है कि पूरे वर्ष में कॉलेजों में शैक्षणिक सुधार व विकास की दिशा में क्या-क्या कदम उठाएंगे? कॉलेजों को नैक मूल्यांकन की तैयारियों के बारे में भी वार्षिक‍ योजना में चर्चा करनी होती है।

कॉलेजों को सालाना योजना बनाना अनिवार्य

शिक्षा विभाग के मुताबिक राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) ने हर कॉलेज के लिए सालाना योजना बनाना अनिवार्य कर दिया है। इसके आलोक में सभी अंगीभूत कॉलेजों को सालाना योजना बनाने का निर्देश दिया गया है। इस मामले में पिछले तीन सालों में अंगीभूत कॉलेजों में योजनाबनाने में सुधार तो आया है, लेकिन रूसा के तय मानदंडों पर ज्यादातर कॉलेज पूरी तरह से खरे नहीं उतरे हैं। इसीलिए एक बार फिर प्राचार्यों को रूसा के तय मानदंडों का अनुपालन सुनिश्चित कराने को कहा गया है। कॉलेजों को सालाना योजना के आधार पर मदद तो मिलेगी, लेकिन उसकी जवाबदेही भी तय होगी।

इन बिंदुओं पर भी मांगी गई थी जानकारी

विभाग की ओर से कोरोना के संक्रमण काल में कॉलेजों में ऑनलाइन पढ़ाई के अलावा कई बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई थी। प्राचार्यों से पूछा गया था कि क्या आपके यहां डिजिटल बोर्ड का इस्तेमाल होता है? संस्थान में कितने ऐसे बोर्ड लगे हैं? एलसीडी प्रोजेक्टर कितने इस्तेमाल हो रहे हैं? यूजीसी की ओर से तैयार कराए गए कितने ऑनलाइन लेक्चर दिखाए गए? कब से इस तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं? साथ ही इसका लाभ कितने छात्रों और शिक्षकों को मिला है। सेल्फ स्टडी रिपोर्ट के बारे में क्या प्रगति है?

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