बिहार में सबसे ज्यादा यादव और ब्राह्मणों की जनसंख्या, साल 1931 में जानिए कितने थे आपके जात के लोग

बिहार में फिर गिनेंगे जाति, 1931 में सर्वाधिक 34.55 लाख ग्वाले थे : बिहार में जल्द जातियों की गिनती होगी। बुधवार को सभी प्रमुख पार्टियों के बड़े नेताओं ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई में एकसाथ बैठकर इसकी खासी दरकार बताई, इस पर सहमति दी, इसकी रूपरेखा पर बात की। बैठक के बाद इन नेताओं की मौजूदगी में मीडिया से मुखातिब मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे संबंधित प्रस्ताव जल्द कैबिनेट में लाया जाएगा, इसकी मंजूरी होगी। जातियों की गणना का काम एक समय सीमा में पूरा होगा। पूरी कोशिश होगी कि यह जल्द से जल्द हो। सभी धर्म व जाति के लोगों की गणना होगा। उनके सामाजिक-आर्थिक तथा अन्य पहलुओं का भी आकलन होगा। मुख्यमंत्री के अनुसार, इसका नाम ‘जाति आधारित गणना’ होगा। यह काम सामान्य प्रशासन विभाग करेगा। इस काम में लगे लोगों की ट्रेनिंग होगी। कैबिनेट का प्रस्ताव तथा एक-एक सार्वजनिक होगा, होता रहेगा, ताकि किसी को कोई आपत्ति न रहे। मुख्यमंत्री ने बैठक के हवाले कहा कि सर्वसम्मति से यह निर्णय हो गया कि बिहार में जाति आधारित गणना होगी। हर लोगों के बारे में पूरी जानकारी ली जाएगी और इसके लिए बड़े पैमाने पर और तेजी से काम किया जाएगा।

सरकार करेगी पूरी मदद
राज्य सरकार की ओर से जो भी मदद होगी, दी जाएगी। बैठक में हुई बातचीत के आधार पर बहुत जल्द कैबिनेट का निर्णय होगा। कैबिनेट हो जाने के बाद सबकुछ प्रकाशित हो जाएगा। समय सीमा का भी पता चल जाएगा। रुपये की जरूरत पड़ेगी, तो उसका भी प्रबंध करना पड़ेगा। ये सब काम बहुत जल्द कर दिया जाएगा। सभी दलों को एक-एक काम की जानकारी दी जाएगी। जो कुछ भी किया जाएगा, उसके बारे में विज्ञापन दिया जाएगा। एक-एक चीज जानकारी सबको रहेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसका मकसद लोगों को आगे बढ़ाना है। यह काम लोगों के फायदे के लिए हो रहा है। हमलोगों की स्कीम यही है कि सबका ठीक ढंग से विकास हो सके। जो पीछे है, उपेक्षित है, उसकी उपेक्षा न हो। सब आगे बढ़ें। पढ़ें शासन-प्रशासन पेज भी

भाजपा राजी लेकिन जताई तीन आशंकाएं
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि हम संविधान प्रदत्त सातवें शिड्यूल के अधिकारों में किसी तरह की छेड़खानी नहीं करेंगे। उन्होंने बिहार की जातियों की गिनती में 3 आशंकाएं जताईं; मुख्यमंत्री से कहा कि इसके निदान के बारे में गिनती करने वालों को स्पष्ट रूप से बताना होगा।

सीमांचल के मुस्लिम समाज में अगड़े शेख, शेखोरा या कुलहरिया बन हकमारी करते हैं। देखना होगा कि मुस्लिम में जो अगड़े हैं, वे इस गणना की आड़ में पिछड़े या अति पिछड़े नहीं बन जाएं।इस गणना या गिनती के कारण किसी रोहिंग्या और बांग्लादेशी का नाम नहीं जुड़े। ऐसा होने से वे इसे अपने लिए, भारत की नागरिकता हासिल करने का आधार बना सकते हैं। भारत में सरकारी तौर पर 3747 जातियां हैं। लेकिन केंद्र के हलफनामे के अनुसार, 2011 के सर्वे में जनता ने 4.30 लाख जातियों का विवरण दिया है। ऐसा बिहार में नहीं हो, सावधानी बरतनी होगी

बिहार-ओड़िशा की 1931 की जातीय गणना में कौन कितने
ग्वाला3455141(इसमें अहीर,गोप व यादव शामिल हैं)
ब्राह्मण2101287
कुर्मी 1452724
राजपूत 1412440
कोइरी 1301988
चमार1296001
दुसाध1290936
तेली1210496
(बाभन) भूमिहार-895602
तांती 689791
कुम्हार599038
धानुक547308
कहार 524030
कान्दू 506384
केवट471389
मल्लाह 459560
हजाम 456779
धोबी414 221
कायस्थ 383435
बढ़ई363794
बनिया 220071
(स्रोत : बिहार पिछड़ा वर्ग आयोग की रपट, जिसके अध्यक्ष मुंगेरी लाल थे। यह कुछ प्रमुख जातियों की सूची है।)

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