इंजीनियर चाय वाले की कहानी, लाकडाउन में चली गई नौकरी, पापी पेट के लिए मजबूरी में लिया फैसला

यह फोटो अबसे 25 मिनट पहले खींची है। जो खूबसूरत लड़का चाय बना रहा है उसका नाम अंकित यादव है। यूपी के सोनभद्र स्थित गोविंदपुर में बनारस रोड पर चाय बेचता है। बातचीत में पता चला लॉकडाउन से पहले नोएडा में एक कंपनी में इंजीनियर था इसने मेरी तरह ही इलेक्ट्रिकल इंजियनरिंग की पढ़ाई कर रखी है।

हमने पूछा कि क्यों छोड़ दी नौकरी? उसने बोला भईया कंपनी बन्द हो गई 32 हजार मिलते थे, ढूंढ ढूंढ कर थक गया मगर नौकरी नही मिली, फिर एक रोज मां ने कसम देकर बुला लिया और मैंने चाय की दुकान खोल ली।” हमने कहा कि मैं 500 किमी ड्राइव करके आ रहा तुम्हारे जैसी चाय कहीं नही मिली। इस पर अंकित बोला” मुझे सबसे अच्छी सबसे अलग चाय बनानी है।”

अंकित ने एक और अच्छी बात बताई। मुझे मिट्टी के पुरवे ( कुल्हड़) लेने थे। हमने पूछा क्या रेट चल रहा। उसने कहा भईया लॉकडाउन में रेट बढ़ गया है जो पहले 80 रुपये सैकड़े था अब वह 120 रुपये हो गया। आस पास के सारे दुकानदार मिट्टी के कुल्हड़ में ही चाय दे रहे। गांवो मे कुल्हड़ बनाने वाले भी बढ़ गए हैं।मुझे अच्छा लगा। आप सोच सकते हैं देश मे रोजगार के पैटर्न कैसे बदल रहे हैं। राज्य सरकारों को इस स्थिति को समझना चाहिए। आइये ग्रामीण अर्थव्यस्था को और मजबूत करें एवं बेरोजगारी के शिकार युवाओं का सम्बल बनें।
-AWESH TIWARI

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