लोक आस्था का पर्व चैती छठ शुरू, आज है नहाए खाए, खरना कल, डूबते और उगते सूर्य को दिया जाएगा अर्घ्य

लोक आस्था का महापर्व चैती छठ शुक्रवार 12 अप्रैल को नहाय-खाय से शुरू हो जाएगा। इसके पहले गुरुवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान करने राजधानी के विभिन्न गंगा घाटों पर पहुंचे। गंगा स्नान के बाद अपने घर में पूजा के लिए गंगा जल भरकर ले गए।

चैती छठ करने वाले श्रद्धालुओं ने छठ के लिए जरूरी सामग्री की खरीदारी भी की। इसमें गेहूं, गुड़, घी, सूप, दउरा से लेकर छठ के लिए चूल्हा तक शामिल रहा। नहाय-खाय के बाद श्रद्धालु गंगा जल मिलाकर गेंहू धोएंगे और सुखाएंगे। गेहूं के आटा से ठेकुआ आदि प्रसाद छठ पर्व में भगवान भास्कर को चढ़ाने की परंपरा रही है।

आज से शुरू होगा महापर्व चैती छठ का महापर्व शुक्रवार को नहाय-खाय से शुरू हो रहा है। शनिवार 13 अप्रैल को खरना के साथ व्रती 36 घंटों का निर्जला उपवास करेंगे। 14 अप्रैल की शाम अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा और 15 अप्रैल को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही पर्व की समाप्ति होगी।

ई-कॉमर्स साइट पर 10 किलो लकड़ी 999 रुपए में चैती छठ को लेकर बाजार में आम की लकड़ी और मिट्टी के चूल्हों की बिक्री तेज हो गई है। छठ प्रसाद मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से बनाने की परंपरा बहुत से श्रद्धालु निभाते हैं। जहां बाजार में आम की लकड़ी 180 रुपये पसेरी (5 किलो) बिक रही है। वहीं ई-कॉमर्स साइट पर आम की लकड़ी की कीमत 999 रुपये (10 किलो) है, जबकि गोइठा की कीमत ई. कामर्स साइट पर 250 रुपये (1 किलो-12 पीस का सेट) में उपलब्ध है।

श्रद्धालु सौ रुपये से लेकर साढ़े तीन सौ रुपये के बीच मिट्टी के चूल्हा की खरीदारी कर रहे हैं।

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