चीन बार्डर पर बिहार का 3 के जवान श’हीद, सहरसा-छपरा-आरा में मातम, परिवार वालों का रो रोकर बुरा हाल

भारत-चीन सीमा पर सोमवार देर रात को हुई चीनी सैनिकों के साथ झ/ड़प में बिहार के तीन सपूतों ने भी सीमा की रक्षा करते हुए अपनी जा/न की कु/र्बानी दे दी। इनमें सारण, भोजपुर और सहरसा का एक-एक लाल शामिल है। हालांकि सारण के एक और जवान की श/हादत की भी चर्चा होती रही।

सुनील कुमार ने सारण की शौर्यपूर्ण मिट्टी की परंपरा को कायम रखा। चीनी सैनिकों के साथ झ/ड़प में उन्होंने डटकर सामना किया और आखिरकार अपनी श/हादत दे दी। सुनील बिहार रेजिमेंट के 16 बिहार बटालियन के हवलदार थे। वे सारण जिले के परसा थाना क्षेत्र के दीघरा गांव के रहने वाले थे। उनके पिता सुखदेव राय भी सेना से ही सेवानिवृत्त हुए हैं।

दूसरे शहीद कुंदन ओझा मूल रूप से भोजपुर जिले के बिहिया थाना क्षेत्र के पहरपुर गांव के रहने वाले थे। उनका परिवार झारखंड के साहिबगज में रह रहा है। वहीं, सहरसा जिले की विशनपुर पंचायत के आरण गांव के एक वीर कुंदन कुमार भी दुश्मनों से लड़ते हुए श/हीद हो गए। सारण के एक और सपूत चंचौरा के संजय के भी श/हीद होने की चर्चा होती रही। आधिकारिक तौर पर किसी अधिकारी ने इसकी पुष्टि नहीं की है।

बार्डर पर त’नाव : लद्दाख की गलवान घाटी में भारत अाैर चीन के बीच 42 दिन से जारी तनाव साेमवार अाधी रात खू/न से रं/ग गया। भारतीय इलाके में कब्जा जमाकर बैठे चीनी सैनिकाें ने भारतीय सैनिकाें पर रात के वक्त राॅ/ड अाैर प/त्थराें से ह/मला किया। इसमें भारतीय सेना के कर्नल रैंक के कमांडिंग अाॅफिसर समेत 20 जवान शहीद हाे गए। सरकारी सूत्रों ने बताया कि 43 चीनी सैनिक मा/रे गए हैं या घायल हैं। चीन के सरकारी अखबार ग्लाेबल टाइम्स के संपादक हू शिजिन ने भी इसकी पुष्टि की है। हालांकि, चीन ने मा/रे जाने वाले अपने सैनिकों की संख्या पर चुप्पी साध ली है।

भारत-चीन सीमा पर 1975 के बाद 45 साल में पहली बार जवान शहीद हुए हैं। सेना के अनुसार, गलवान से सैनिकाें की संख्या कम करने की प्रक्रिया के दाैरान हिंसा हुई। झड़प में गाे/ली नहीं चली। इसी बीच, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विदेश मंत्री एस जयशंकर, चीफ अाॅफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत अाैर तीनाें सेनाअाें के प्रमुखाें के साथ बैठक की। उन्हाेंने प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी काे भी हालात की जानकारी दी। एलएसी पर हुए घटनाक्रम के बाद सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने पठानकाेट का दाैरा रद्द कर दिया। बता दें कि पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी सहित कुछ अन्य इलाकाें में भारत अाैर चीन के सैनिक अामने-सामने हैं। सेना प्रमुख नरवणे ने कुछ दिन पहले ही कहा था कि दाेनाें पक्षाें के सैनिक गलवान घाटी से पीछे हट रहे हैं।

सैन्य सूत्राें ने बताया कि साेमवार रात की खू/नी झ/ड़प के बाद मंगलवार सुबह दाेनाें देशाें के सैन्य अधिकारियाें के बीच तनाव घटाने के लिए एक बार फिर बातचीत हुई। मेजर जनरल रैंक के अधिकारियाें ने घटनास्थल पर ही बातचीत की। दूसरी ओर गलवान नदी में गिरे सैनिकों के शवों को निकाला जा रहा था। अधिकारियाें ने संकेत दिए कि हालात स्थिर बनाने की प्रक्रिया चल रही है। भारत की अाेर से मेजर जनरल अभिजीत बापट इस बैठक में शामिल हुए।

चीन ने एलएसी की स्थिति बदलने की कोशिश की: विदेश मंत्रालय
भारत ने हिं/सक ट/कराव के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीनी पक्ष ने एकतरफा ढंग से एलएसी की स्थिति बदलने की कोशिश की। चीनी सैनिकाें ने उच्च स्तरीय सहमति का पालन किया होता तो यह घटना नहीं होती। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि भारत अाैर चीन पूर्वी लद्दाख में तनाव घटाने के लिए सैन्य और कूटनीतिक चैनलों के जरिए बात कर रहे थे। हम उम्मीद कर रहे थे कि यह सब सुचारू रूप से हो जाएगा, पर चीनी पक्ष गलवान घाटी से एलएसी का सम्मान करने की सहमति से हट गया।

यह ह/मला सुनियोजित है, चीन के राजनीतिक नेतृत्व के इशारे पर किया गयाक्या यह घटना चीनी नेतृत्व के इशारे पर हुई है? : चीन के लोकल कमांडरों ने राजनीतिक नेतृत्व के इशारे पर ही इतनी बड़ी घटना की। यह उकसावे का नतीजा नहीं हो सकता। दोनों पक्षाें में सेना पीछे हटने का समझौता हुआ था। भारतीय कमांडर चीनी सेना के पीछे हटने की निगरानी कर रहे थे। चीनी नेतृत्व ने संदेश देना चाहा कि यह एकतरफा कार्रवाई नहीं है। हिंसा की यह घटना खुद को विजेता दिखाने की चाल है।

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