तरकारी बेचने वाले की बिटिया बनी जज साहिब, रिजल्ट सुन रो पड़ा पूरा परिवार, मिला 5th रैंक

मध्यप्रदेश में सब्जी बेचने वाले की बेटी बनी सिविल जज, MPHC परीक्षा में मिली 5वीं रैंक, बताया- कैसे हासिल की सफलता : मेहनत और लगन अगर सच्ची हो तो हर मुश्किल को पार किया जा सकता है. सफलता पाने के लिए लगातार मेहनत और लगन होनी चाहिए. ऐसी ही कुछ कहानी है इंदौर की अंकिता की. अंकिता नागर ने सिविल जज एग्जाम (civil judge exam) में पाचवा स्थान प्राप्त किया है. अंकिता नागर ने एससी कोटे में पांचवा स्थान हासिल किया है.

अंकिता के माता पिता सब्जी बेचकर गुजर बसर करते है. पढ़ाई के लिए हर मुश्किलों को पार करते हुए अंकिता ने MPHC परीक्षा में पांचवा स्थान पाकर अपने माता-पिता का नाम रौशन किया है. अंकिता बताती हैं कि जब रिजल्ट (Success Story) आया तो अपना रिजल्ट देखकर बहुत खुश हुईं और मां के पास ठेले पर गईं. रिजल्ट देकर अंकिता ने मां से कहा, ‘मैं जज बन गई’. अंकिता की मां का खुशी का ठीकाना नहीं रहा वह बहुत खुश हुईं. महज 25 साल की उम्र में उन्होंने ये सफलता हासिल की है, चलिए जानते हैं अंकिता की सफलता की पूरी कहानी.

बचपन से ही अंकिता (Ankita Success Story) को पढ़ने में काफी मन लगता था, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. अंकिता खुद अपने मम्मी पापा का हाथ बटाती थी और कभी सब्जी के ठेले पर सब्जी बेचने के लिए जाया करती थी. लेकिन अपने पढ़ने की ललक के कारण वह कभी पीछे नहीं हटी और इसी ललक के कारण उसने सिविल जज एग्जाम में पार्टिसिपेट किया. एससी कोटे में पांचवा स्थान हासिल कर अपने माता-पिता का नाम रौशन किया.

अंकिता (Ankita Family) को भी शुरुआत में पढ़ने में काफी समस्या हुई लेकिन धीरे-धीरे उसने अपने माता-पिता की आर्थिक स्थिति के साथ ही अपने पढ़ाई के शौक को जारी रखा. जब भी उन्हें समय मिलता वह पढ़ाई करना शुरू कर देती. अंकिता का कहना है कि वह अपनी मम्मी के साथ घर के काम में हाथ बटाने के साथ ही सब्जी की दुकान पर भी जाकर सब्जी बेची थी. दुकान पर कोई ग्राहक नहीं आता था इस दौरान वह अपने साथ पढ़ाई कर लेती थी. घर का सारा काम करके पढ़ाई करती थी.

अंकिता का बड़ा भाई आकाश रेत मंडी में मजदूरी करता है छोटी बहन की शादी माता-पिता ने कर दी. अंकिता पढ़ना चाहती थी इसलिए वह रोजाना 8 से 10 घंटे पढ़ाई करती थी. अंकिता ने जब अपने मम्मी पापा को जज बनने के सपने के बारे में जानकारी दी तो उसके मम्मी पापा ने भी कंधे से कंधा मिलाकर उसका पूरा सहयोग किया और परिवार के सहयोग से ही कारण आज अंकिता ने यह सफलता हासिल कर ली.

अंकिता का कहना है कि 3 साल से वह सिविल जज की तैयारी कर रही है 2017 में उसने इंदौर के वैष्णव कॉलेज से एलएलबी किया इसके बाद 2021 में एलएलएम की परीक्षा पास की लगातार सिविल जज की तैयारी में जुटी रही दो बार सिलेक्शन नहीं होने के बाद भी माता-पिता हौसला दिलाते रहे यही कारण है कि आज जैसे ही मेरे हाथ में रिजल्ट आया तो सबसे पहले मैंने यह खुशखबरी ठेले पर जाकर अपनी मम्मी को दी.

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