क्या अंदर ही अंदर चुनाव की तैयारियों में लगे हैं CM नीतीश ?

Patna: बिहार में आने वाले अक्टूबर-नवंबर में विधानसभा का चुनाव होने वाला है. कोरोना संकट के बीच सियासी दल ज्यादा सक्रिय नहीं दिख रहे हैं. विपक्ष के पास तो इसलिए भी मौका नहीं है, क्योंकि लॉकडाउन में वे जनता के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज ही नहीं करवा पा रहे हैं. हालांकि, तेजस्वी यादव जैसे कुछ नेता सोशल मीडिया के जरिये जरूर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाते रहते हैं, पर राजनीतिक जानकार मानते हैं कि लॉकडाउन के बीच सीएम नीतीश कुमार जरूर अपनी सत्ता बचाए रखने की कवायद में लगे हुए हैं.

राजनीतिक जानकार बताते हैं कि चुनाव के पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को तीन बड़ी चुनौतियों से जूझना होगा. अगर वे इन तीन चुनौतियों को ठीक से हैंडल कर पाए तो 2020 की लड़ाई नीतीश के लिए आसान हो सकती है.

चुनौती नम्बर-1
कोरोना संकट के बीच बड़ी संख्या में बिहारी कामगार बाहर से बिहार लौटे हैं. लॉकडाउन की वजह से कई कंपनियों ने काम बंद कर दिए हैं, जिसकी वजह से लगभग दो लाख मज़दूर बिहार लौटे हैं. वहीं, लॉकडाउन के बाद भी बिहार के मज़दूरों का बिहार लौटने की सम्भावना है. बिहार में भी बड़ी संख्या में लोग कोरोना बंदी की वजह से बेरोज़गार हुए हैं. अगर इन लोगों के रोज़गार के साथ-साथ कोरोना संक्रमण के दौरान लोगों को मदद ठीक तरीक़े से पहुंचाने में बिहार सरकार सफल हो गई, तो नीतीश कुमार के लिए बड़ी राहत की बात होगी. नीतीश सरकार इस फ़्रंट पर काम कर भी रही है, लेकिन ये इतना आसान नहीं होगा. बिहार में पहले से ही रोज़गार के अवसर कम हैं. रोज़गार के नए अवसर बनाने होंगे.

चुनौती नम्बर-2
पिछले साल पटना नगर निगम की लापरवाही की वजह से बिहार की राजधानी पटना में जल जमाव का बड़ा संकट खड़ा कर दिया था. इसके बाद पूरे देश में नीतीश सरकार पर सवाल उठे थे कि जब राजधानी को नहीं बचा सके तो बिहार क्या बचाएंगे. इस बार भी जून महीने में मानसून आने वाला है और उसके पहले नगर निगम को पटना के नाले, कैचपीट, सम्प हाउस सहित कई और काम 15 मई तक पूरा कर लेना है, लेकिन लॉकडाउन की वजह से काम धीमा हो रहा है. नगर निगम के आयुक्त हिमांशु शर्मा दावा कर रहे हैं कि कोरोना की वजह से थोड़ी समस्या हो रही है, लेकिन मानसून के पहले पूरा काम हो जाएगा. हालांकि, ऐसे दावे हर साल किए जाते हैं, लेकिन जब मानसून आता है तो कलई खोल जाता है.

चुनौती नम्बर-3
बिहार लगभग हर साल कई इलाकों में बाढ़ त्रासदी से जूझता है. बाढ़ से बचने के लिए जल संसाधन विभाग हर साल मानसून के पहले फ़्लड फ़ाइटिंग का काम करती है, लेकिन इस साल फ़्लड फ़ाइटिंग का काम जो मार्च के आख़िरी हफ़्ते से शुरू हो जाना चाहिए था, शुरू नहीं हो पाया है. 15 मई तक काम ख़त्म भी कर लेना था, लेकिन लॉकडाउन की वजह से काम शुरू नहीं हो पाया. अब 20 अप्रैल से थोड़ी ढील मिली तो काम तो शुरू हो गया है, लेकिन जिस गति से काम होने चाहिए वह नहीं हो पा रहा है.

दरअसल जितने मज़दूरों की ज़रूरत है उतने नहीं मिल पा रहे हैं. ऐसे में समय पर फ़्लड फ़ाइटिंग का काम पूरा हो पाएगा, इसको लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. जल संसाधन मंत्री संजय झा भी आशंका ज़ाहिर करते हैं कि पहले ही 25 दिनों का नुक़सान हो चुका है. जिसकी भरपाई नही की जा सकती है, लेकिन हम कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में सीएम नीतीश के विरोधी भी उनके हर क़दम पर नज़र बनाए हुए हैं. उनकी पूरी कोशिश रहेगी कि इन समस्याओं को हैंडल करें. चुनावी साल में तीनों समस्या को हल कर पाए.

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