बकरीद की कुर्बानी पर कोर्ट की रोक, 12 अगस्त को है पर्व

पटना : मुस्लिम समुदाय में बकरीद पर्व पर बकरे की कुर्बानी देना बेहद अहम रिवाज है। अकीदमंत अपने-अपने घरों में पर्व पर बकरे की कुर्बानी देते हैं, लेकिन न्यायालय इस बार बकरे की कुर्बानी पर सख्त आदेश जारी किया है। मामला बॉम्बे हाईकोर्ट का है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने आदेश जारी किया है कि कोई भी घर या सोसाइटी में पशुओं की कुर्बानी पर रोक लगा दी है। इस बकरीद पर किसी के घर में किसी पशु की कुर्बानी दी जाएगी। ये पूरी प्रक्रिया बीएमसी की ओर से जारी किए गए पर्मिट के आधार पर निर्धारित जगह पर या फिर लाइलेंस वाली नॉजवेब मार्केट में होगी। बता दें कि इस साल बकरीद 12 अगस्त को मनाया जाएगा। इस्लाम कैलेंडर के मुताबिक रमजान का महीना खत्म होने के 70 दिन बाद यह पर्व मनाया जाता है। यह पर्व लोगों को त्याग और बलिदान का संदेश देता है।

क्यों मनाते हैं बकरीद : बता दें कि बकरीद पर्व की शुरुआत हजरत इब्राहिम की कुर्बानी से हुई है। हजरत इब्राहिम संतान नहीं हुआ था। काफी मिन्नतों के बाद एक बेटा हुआ था, जिसका नाम स्माइल रखा गया। हजरत साहब अपने बेटे से बेपनाह प्यार करते थे। एक रात अल्लाह ने हजरत के सपने में आकर उनसे उनकी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी मांगी। ऐसे में हजरत साहब अपने बेटे इस्माइल की कुर्बानी के लिए तैयार होग और बेटे की कुर्बानी दे दी। इसके बाद जब उन्होंने आंख खोला तो उनका बेटा पुन: उनके सामने खड़ा था। अल्लाह ने बताया कि वे उनके भरोसे का इंतिहान ले रहे थे।

पशु की कुर्बानी के भी हैं नियम : बकरीद पर्व पर मुस्लिम अकीदमंदों द्वारा पशु के कुर्बानी देने के कई नियम हैं। एक नियम यह भी है कि कुर्बानी के पशु को तीन भाग में बांटा जाता है। कुर्बानी के पशु के पहला भाग गरीबों को दिया जाता है। दूसरा रिश्तेदारों और तीसरा भाग अपने लिए अकीदमंद रखते हैं।

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