बिहार विधानसभा में महिलाओं की आवाज होती जा रही बुलंद, पक्ष हो या विपक्ष सब एक साथ

Desk: लोकसभा (Parliament) और विधान सभा (State Assembly) में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने की मांग भले ही पूरी नहीं हो पाई है, मगर बिहार विधान सभा में महिलाओं के प्रतिनिधित्‍व ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में महिला विधायकों की कुल संख्या 26 है, जिसमें बीजेपी से उप मुख्‍यमंत्री रेणु देवी (Deputy CM Renu Devi) के अलावा आठ, राजद (RJD) की सात, जदयू (JDU) की छह, कांग्रेस की दो और हम (HAM) और वीआइपी (VIP) की एक-एक महिला विधायक (Woman MLA )शामिल हैं। ये महिला विधायक महिलाओं के हक और उनकी सशक्‍तीकरण के लिए खास तौर पर पूरी संवेदनशीलता के साथ सजगता दिखा रही हैं।

पालना घर की उठाई मांग

अंतरराष्‍ट्रीय महिला दिवस (International women’ Day) पर बातचीत में जमुई से विधायक और इंटरनेशनल शूटर श्रेयसी सिंह ने कहा कि वे पहली बार चुनाव जीतकर विधान सभा पहुंची हैं। यहां पहले ही दिन उन्‍होंने कई महिलाकर्मियों को काम करते देखा। वो खुद भी आइसीडीएस (Integrated Children Development Services) की 2018-20 तक गुडविल एंबेस्‍डर रह चुकी हैं। जिसके कारण उन्‍होंने नजदीक से कामकाजी मांओं की बच्‍चों को लेकर चिंता देखी है। इसके बाद ही उन्‍हें विचार आया कि विधान सभा में भी पालना घर होना चाहिए। जिससे अपनी जिम्‍मेदारी निभाते वक्‍त कामकाजी महिलाएं बच्‍चों की सुरक्षा और लालन-पालन को लेकर निश्चिंत रह सकें। उन्‍होंने इस मुद्दे पर सदन में बहस के लिए भी आग्रह किया है।

जननी सुरक्षा और जीविका दीदियों के मजबूती की पहल

इसी तरह जदयू की केसरिया से विधायक शालिनी मिश्रा भी पहली बार सदन पहुंची हैं। उन्‍होंने बताया कि हम महिलाओं के बीच जब फील्‍ड में जाते हैं तो नजदीक से उनके सुख-दुख को महसूस करते हैं। हमारे क्षेत्र में 2017 से महिलाओं को जननी सुरक्षा योजना के तहत राशि नहीं मिल रही। जिसके कारण गरीब महिलाओं को काफी परेशानी आ रही है। यह राशि छोटी ही सही मगर महिलाओं को अपने बच्‍चे की सुरक्षा के प्रति कांफिडेंस देती है। इस मुद्दे पर मैंने सदन में बहस की मांग रखी है। इसके अलावा बिहार सरकार की बेहद खास पहल जीविका के माध्‍यम से महिलाओं के सशक्‍तीकरण की है। जीवकिा को महिलाओं के आर्थिक सशक्‍तीकरण के लिए ‘साइलेंट रेवॉल्‍यूशन’ भी कहा जाता है। जीविका दीदियों के स्किल डेवलपमेंट कर उन्‍हें और भी मजबूत बनाने की मांग रखी है।

महिलाओं की आवाज होती बुलंद

शालिनी मिश्रा ने बताया कि यह भी सच है कि सदन में ज्‍यादा महिलाओं की मौजूदगी से पुरूष विधायकों व नेताओं के नजरिए में भी बदलाव आता है। एक दिन सदन में बहस के दौरान बार-बार टोकाटाकी करने पर मैंने तुरंत सीख दी कि थोडी तो संवेदनशीलता दिखाइए , यहां महिलाओं को बोलने नहीं दे रहे तो घर में क्‍या करते होंगे। इसे पुरूष प्रतिनिधियों ने सकारात्‍मक तरीके से लिया।

महिलाएं बंटी नहीं हैं

उपमुख्‍यमंत्री रेणु देवी का कहना है कि महिलाओं में ही इतनी ताकत होती है कि वे घर-परिवार, नौकरी, बच्‍चे सहित अपनी जिम्‍मेदारियां निभा लेती हैं। पक्ष हो या विपक्ष महिलाएं महिलाओं के मुद्दे पर महिला विधायक बंटी नहीं रहती। महिला प्रतिनिधियों की सदन में मौजूदगी महिलाओं की आवाज बुलंद कर रही हैं। वे अपनी मिट्टी की सुगंध अपने साथ लेकर चलती हैं।

महिला कॉलेज और सुरक्षा की मांग

राजद की मोहनिया से विधायक संगीता देवी ने बताया कि कैमूर में एक भी महिला सरकारी कॉलेज नहीं है। मैंने खुद पढ़ाई में परेशानी झेली है। मैंने सदन में यहां महिला कॉलेज खोलने की मांग रखी है। उन्‍होंने कहा कि क्षेत्र में दौरे के दौरान मैंने महिला वोटरों को जागरूक किया कि पति, पिता या भाई के कहने पर नहीं बल्कि अपनी सोच-समझ के अनुसार अपना वोट डालें। इसके अलावा महिलाओं की सुरक्षा पर मेरा खास फोकस होता है। बिहार में लॉ एंड ऑर्डर का हमेशा से ही मुद्दा रहता है। लड़कियों व महिलओं को सुरक्षित माहौल मिलेगा तभी तो वो आगे बढ़ पाएंगी।

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