कोरोना से पिता की मौत, मोबाइल स्विच आफ DMCH से भाग गया कलयुगी बेटा, अंजान लोगों ने किया संस्कार

दरभंगा : कोरोना ने रिश्ते का व्याख्या इस तरह कर दिया। जिस औलाद के लिए धन संचय होता है, वे भी नही आये मुखाग्नि देने। कोरोना के दूसरे लहर में गुरुवार को मृत ये शव अवकाशप्राप्त रेल कर्मी का है। तीन पुत्र, पत्नी है। कोई रिश्तेदार भी नही साथ दिया। दरभंगा अस्पताल के कोरोना वार्ड में शव छोड़ दिया गया। 36 घंटे बाद मेरे साथ कबीर सेवा संस्थान के सदस्यगण दीपक, सुरेन्द्र महतो, रंजीत ने अंत्येष्टि की। उमर ने सहयोग किया। कोरोना से डरें जरूर, लेकिन सुरक्षा मानक अपनाकर लड़ें भी। रिश्ते को तार तार न करें।

कोरोना संक्रमण से मरे एक बुजुर्ग की लाश लेने से पुत्र ने इनकार कर दिया, गुरुवार को सुबह ।। बजे बुजुर्ग ने डीएमसीएच में कोरोना संक्रमण से दम तोड़ दिया था. एंबुलेंस
में लाश लेकर कुछ परिजनों को देर शाम ‘शहर के बाहर एक स्थल पर अंतिम संस्कार के लिए जाना था. यहां उनकी सहायता के लिए कबीर सेवा संस्थान के स्वयंसेवक नवीन सिन्हा के नेतृत्व में तैयार थे. निर्धारित समय पर जब नवीन सिन्हा ने पुत्र को कॉल किया, तो उसने आने की जानकारी दी. कुछ देर बाद उसका मोबाइल ऑफ हो गया.

नवीन सिन्हा ने जब अस्पताल में कॉल किया तो बताया गया कि पुत्र ने लिख कर दे दिया कि बह शब ले जाने में असमर्थ है और वहां से निकल गया. शव के अंतिम संस्कार में सहयोग करने की तैयारी कर चुके स्वयंसेवक इसके बाद शमशानघाट से वापस हो गये. बता दें कि परिजन को शव के साथ श्मशान घाट जाना था. वहां कबीर सेवा संस्थान के
स्वयंसेवक उनकी सहायता के लिए तैयार थे. परिकार मेएक पु्रको छोड़ सभी संत कुक रैलवे से रिटायर थे.

परिवार में पत्नी व पुत्र हैं, परिजनों में एक को छोड़ सभी कोरोना पॉजिटिव हैं. एक मात्र बेटा भी शव छोड़ कर फरार हो गया. मामला कमतौल थाना का था. उसकी मौत गुरुवार की सुबह .5 बजे हो गयी थी. अस्पताल सुत्रों के अनुसार स्वास्थ्य कर्मियों ने पुत्र को शब के अंतिम संस्कार के लिये रोकना चाहा. पुत्र किसी भी स्थिति में पिता के दाह संस्कार में शामिल नहीं होना चाहता था.

आखिरकार उसने अस्पताल को लिखित दे दिया कि उसके पास कोई नहीं है. वह लाश ले जाने में असमर्थ है. इसके बाद पिता का शव छोड़ पुत्र चुपके से अस्पताल से भाग निकला. लाश को अस्पताल में ही डीप फ्रीजर में रखवा दिया गया, सदर एसडीओ राकेश कुमार ने शव को शुक्रवार को रात में अंतिम संस्कार कराये जाने की बात कहीं. कबीर सेवा संस्थान के संरक्षक नवीन सिन्हा ने संस्थान के मो उमर, दीपक कुमार, सुरेंद्र महतो व रंजीत के साथ शव का शुक्रवार को देर रात नौ बजे अंतिम संस्कार कर दिया.

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