मास्टरनी जो पहले वार्ड मेंबर से राज्यपाल बनी अब बनेगी राष्ट्रपति, पति- 2 बेटों की हो चुकी है मौत

PATNAफर्श से अर्श तक: पार्षद से शुरू किया राजनीतिक कॅरिअर, 2 हजार में बनी विधायक, पति-दो बेटों की असामयिक मौत से भी नहीं टूटीं द्रौपदी मुर्मू : दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत में लोकतंत्र की खूबसूरती देखने को मिल रही है। पार्षद के रुप में अपने राजनीतिक कॅरिअर की शुरुआत करने वाली द्रोपदी मूर्म आज देश के सर्वोच्च पद के लिए उम्मीदवार हैं। आर्थिक अभाव के कारण वह महज स्तानक तक ही पढ़ाई कर सकी। पहले उन्होंने टीचर बन बच्चों पढ़ाया इसके बाद ओडिशा के सिंचाई विभाग में क्लर्क की नौकरी भी की।

द्रोपदी मूर्म का जन्म 20 जून 1958 में ओडिशा के मयूरभंज जिले के बैदापोसी गांव में हुआ था, उनके पिता का नाम बिरंची नारायण टुडू था। आर्थिक अभाव के कारण उन्होंने मात्र स्तानक तक की पढ़ाई की। उनका विवाह श्याम चरण मुर्मू से हुआ, जिनकी असामयिक मौत शादी के कुछ समय बाद ही हो गई। उस समय मुर्मू के दो बेटे और एक बेटी थी, जिनमें से दो बेटों की भी असामयिक मौत हो गई। इसके बाद उन्होंने अपनी इकलौती बेटी इतिश्री सहित पूरे परिवार को हौसला दिया और अपने मनोबल को भी टूटने नहीं दिया।

द्रोपदी मूर्म ने अपने कॅरिअर की शुरुआत पार्षद के रुप में सन 1997 में किया। इसके बाद सन 2000 में वह पहली बार और 2009 में दूसरी बार विधायक बनी। इस दौरान भाजपा और नवीन पटनायक की बीजू जनता दल वाली सरकार में उन्हें 2 बार मंत्री बनने का मौका मिला। वहीं वह 2015 में झारखंड की पहली महिला राज्यपाल बनीं। इसके साथ ही किसी भी भारतीय राज्य की राज्यपाल बनने वाली अदिवासी बनीं।

मुर्मू का जीवन काफी कठिनाइयों भरा रहा। वह जवानी में ही विधवा हो गई, इसके साथ ही उन्होंने अपने दो बेटों को भी खो दिया। इस दौरान उन्होंने अपनी इकलौती बेटी इतिश्री के साथ पूरे परिवार को भी हौसला दिया।

राजनीतिक जानकार बताते हैं कि द्रौपदी मुर्मू को भाजपा ने उम्मीदवार बना कर आदिवासी वर्ग को पूरी तरह साधने की कोशिश की है, वहीं बीजेडी का समर्थन हासिल करने का भी बहाना मिल गया है। आदिवासी वर्ग से होने के कारण झारखंड मुक्ति मोर्चा को द्रौपदी मुर्मू को ही समर्थन देने के लिए बीजेपी ने इनडायरेक्ट रुप से मजबूर कर लिया क्योंकि वह राज्य में इस वर्ग की ही राजनीति करती रही है। इसके अलावा अनुसूचित जाति से पहली बार उम्मीदवार बनाए जाने के कारण विपक्ष के सामने भी चुनौती खड़ी हो गई है।

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