बिहार से निकल सात समंदर पार पहुंचा छठ महापर्व, दुबई – ममजार बीच पर दिया गया अर्ध्‍य

तेज़ हवा आ समुंदर में उंच लहर ( हाई टाईड ) के बीचे कोरोनाकाल के सांझ के अरघ सकुशल सम्पन्न भइल !दुबई – ममजार बीच

बिहारी लोक आस्था के महापर्व को विदेशों में भी धूम-धाम से मनाते हैं । विदेशों में भी यथा संभव उपलब्‍ध सामान से भक्तिभाव से अर्ध्‍य देते हैं। स्पेशल ऑर्डर पर भी सामान मंगवाते है। जानिए विभन्नि देशों में प्रवासी बिहारी कैसे करते हैं छठ पूजा।

लोक आस्था के महापर्व छठ का महात्म्य अब केवल बिहार-उत्तर प्रदेश तक ही नहीं सीमित है, इसकी धमक सात समंदर पार तक जा पहुंची है। विदेश में भी यह पर्व धूम-धाम से मनाया जाता है। छठ व्रत के जरिए प्रवासी बिहारी विदेशों में भी इसकी छाप छोड़ रहे हैं।

पूनम पांडेय पिछले कई साल से अपने पति प्रमोद पांडेय के साथ दुबई में रह रही हैं। उन्होंने 17 साल पहले घर की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए छठ व्रत करना शुरू किया। बताती हैं कि उन्हें पूजन सामग्री खरीदने में थोड़ी परेशानी तो जरूर होती है, लेकिन वह किसी तरह उसे तैयार कर लेती हैं। सूप नहीं मिलता तो वह लकड़ी के बॉस्केट से ही पूजा कर लेती हैं। सूप में लगने वाले आलता को खुद रुई के माध्यम से बनाती हैं। वह कहती हैं, सामान मिलने में होने वाली परेशानी से आस्था कम नहीं हो सकती। पूनम बताती हैं कि घर के पास ही एक पूल है, जहां वह छठ की पूजा करती हैं।

टोरेंटों में कम्युनिटी के साथ होती है छठ की पूजा :लगभग दस साल से टोरेंटो में रह रहीं लता पांडेय अपनी परंपरा से न तो खुद दूर हुईं, न ही स्वजनों को होने दिया। लता अपने परिवार के साथ मिलकर बिहार-झारखंड कम्युनिटी में जाकर छठ व्रत करती हैं और वहीं पूजा-अर्चना भी। इसी कम्युनिटी मेंं सभी लोग मिलकर एक साथ पूजा करते हैं और प्रसाद बनाने में भी मदद करते हैं। लता बताती हैं, कम्युनिटी के सभी लोग एक साथ भारत के सारे पर्व मनाते हैं। बिहार कम्युनिटी की वंदना बताती हैं, सभी एक जगह एकत्रित होते हैं। किसी फील्ड या पूल में जाकर छठ मनाते हैं।

स्पेशल ऑर्डर पर मंगवाते सामान :तंजानिया में रहने वालीं सीमा शील अपने पति विवेक शील के साथ 15 साल से विदेश में छठ कर रही हैं। बताती हैं, छठ के समय स्पेशल ऑर्डर पर पूजा का कुछ सामान मंगाना पड़ता है। जैसे हमें पत्ते वाली ईख चाहिए होती है तो इसके लिए काफी पहले से ऑर्डर देना पड़ता है। अब तंजानिया के लोग भी छठ के महात्म्य से वाकिफ हो चुके हैं, इसलिए वे भी प्रसाद बनाने में मदद करते हैं और खाते भी हैं। हम अपने घर में ही टब में पूजा कर लेते हैं, जिसे देखने तंजानिया के लोग भी आते हैं।

केन्या में 15 साल से बेबी पूल में छठ करती हैं मंजू :पिछले 15 साल से केन्या में रहने वालीं मंजू द्विवेदी बताती हैं, शुरू से ही वह अपने घर में रहकर पूजा कर रही हैं। मंजू कहती हैं, केन्या के लोगों को छठ के बारे में कोई जानकारी नहीं है। छठ बहुत साफ-सफाई वाला पावन पर्व है, इसलिए घर पर ही बेबी पूल में भगवान भास्कर की पूजा करती हैं। वह बताती हैं, पूजन की सारी सामग्री वह भारत से विशेष तौर पर ऑर्डर देकर मंगवाती हैं।

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