जतरा : दुर्गा पूजा में भेटल टाका कें खर्च करबाक अंतिम दिन अछि आई

Vandana jha
ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी, दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु‍ते।।

आई विजयादशमी अछि, ओ तऽ समस्त देशवासी के बुझल छन्हि फेर एहि मे खास की ?? मुदा हमरा लेल तऽ बहुत खास अछि। दुर्गा पूजाक एक एक क्षण आ हमर नेनपन जेना एक दोसर सँ बन्हल हुअए। गाम पर बाबी, माँ या काकी सब भोरे भोर माटि लऽ कऽ भगवतीक चिनबार आ पीढ़ी नीपैत छलथिन्ह। भरि आंगन के खबासिनी नीपि जाइत छल। जल्दी जल्दी आई सबके काज सभ करबाक छैक किएक तऽ आई जतरा छैक। पूजाक लेल फूल तोड़बाक भार हम बाल सेना सबके भेटैत छल। बाबी भगवतीक नैवैद्धक लेल अपन हाथ सँ दूधक पेड़ा बना कऽ राखैत छलथिन्ह आ हम बाल सेना सबके कहैत छलीह जे बच्चा सब जतेक फूल आनत ओकरा हम ओतेक नैवैद्ध वला पेड़ा देबैक। हमहु सब ओहि पेड़ाक लोभमे अपन फूलवारीक संग दोसरो के फूलवारीक नीक नीक फूल तोड़ि आनैत छलहुँ भनहि ओ सभ ई फूल मात्र सजावटि के लेल लगा कय रखने छलाह।

भरि रस्ता ईएह सोचैत छलहुँ जे आई तऽ बहुत पेड़ा हमरा सबके भेटत मुदा घर जा कऽ एकर उल्टा होइत छल। माँ आ बाबी दुनू गोटे तमसाइत छलीह जे अपन बाड़ी सँ फूल तोड़बाक लेल कहने छलहुँ आ कि रौने – बौने।

बच्चाक मोन जे होइ ओहि पेड़ाक लोभमे फेर सँ नहा धो कऽ बाबी बाबा सबहक संग पूजामे खूब बढ़ि चढ़ि कऽ भाग लेबाक लेल तैयार भऽ जाइत छलहुँ।

आई दशमी छैक तऽ पूजाक उपरान्त सब अपन माथमे जयन्ती लगबैत छलहुँ। बाबा कहैत छलथिन्ह कलश स्थापन वला जयन्तीमे जतेक वृद्धि होइत छैक ई सुख शांतिक सूचक होइत छैक।आई नीलकंठ के सेहो देखबाक उत्साह रहैत छल जे हमरा दर्शन भेल तऽ हमरा भेल । नीलकंठके दर्शन भरि सालक लेल शुभ मानल जाइत अछि।

गामक दुर्गा स्थानमे भोरे सँ पूजा पाठ आ हवन शुरू भऽ जाइत छल आ ओहि हवनक समिधाक सुगंधि सम्पूर्ण गामक वातावरण के सुगंधित भऽ शुद्ध बनि जाइत छल।पूजा पाठक उपरांत आई बाबा जिलेबी जरूर आनैत छलाह। बाबाक गेलाक बादो पिताजी आजुक दिन जिलेबी जरूर आनैत छथि। आई भोजनमे दही – चूड़ा, दालि, भात, तरूआ, तरकारी, बड़, बड़ी सब बनबाक आ खयबाक उत्साह अलगे होइत छल।

भरि दुर्गापूजाक जमा कयल पाई के आई खर्च करबाक अंतिम दिन छल किएक तऽ मैयाक विसर्जनक उपरान्त ई मेला सब खत्म भय जायत आ दुर्गा स्थान सुन्न पड़ि जाइत छल।

दुपहर होइत के संग ओ दुखक बेला सेहो आबि जाइत छल, भरि गामक लोकक कंठ आ बोल आंखिक नोर सँ देखाइत छल। बाबी कहैत छलथिन्ह जे दुर्गा मैयाक ई नैहर छलन्हि आई ओ अपन सासुर जा रहल छथि। आब एक सालक बाद ओ फेर सँ नैहर अयतीह। मैयाक विदागिरी अछि आइ सासुरक लेल तैं आई भरि गामक लोक दु:खी छथि। सांझ होइत के संग दुर्गा महारानीक जय के संग भरि गाम गुंजायमान भऽ नोर सँ भरल आंखि आ भारी मोन सँ दुर्गा महारानीक विसर्जनक सं दस दिन सँ चलि रहल एहि पावन पर्व के अंत होइत अछि। सबहक मोनमे बस ईएह टा कामना रहैत छैक जे हे दुर्गा मैया अपनेक आशीर्वाद सदैव समस्त संसारक ऊपर बनल रहय। हमरो दुर्गा माँ सँ बस एतबे प्रार्थना अछि

सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया: ।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दु:ख भाग्भवेत् ॥

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