इंजीनियर CM के पास 5, 12वीं पास डिप्टी CM के पास 6 विभाग, नई सरकार का ये है समीकरण

PATNA : बिहार सरकार में पहली बार विभागों की संख्या के मामले में भाजपा जदयू के मुकाबले ज्यादा ताकतवर दिख रही है, लेकिन भारी विभाग जदयू ने अपने पास ही रख लिए हैं। जदयू से मुख्यमंत्री समेत 6, जबकि भाजपा से दो उप मुख्यमंत्री समेत 7 ने शपथ ली थी। मंगलवार को इनके विभागों के बंटवारे के बाद भी नीतीश के नेतृत्व वाले जदयू के पास भाजपा के मुकाबले ज्यादा महत्वपूर्ण विभाग आए हैं। मुख्यमंत्री ने भाजपा के दबाव के बावजूद गृह मंत्रालय नहीं छोड़ा। यह अलग बात है कि खुद इंजीनियर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास 5 विभाग हैं, जबकि 12वीं पास डिप्टी CM तारकिशोर प्रसाद को वित्त और IT समेत 6 विभाग दिए गए हैं। हालांकि, इन विभागों को संभालने के लिए तारकिशोर को दौड़भाग भी खूब करनी पड़ेगी, क्योंकि उनके सभी मंत्रालय पटना में अलग-अलग जगहों पर हैं। जबकि, नीतीश के सभी विभाग सचिवालय में।

नीतीश ने गृह के साथ 4 और विभागों की जिम्मेदारी अपने ऊपर ली है। ये हैं- सामान्य प्रशासन, निगरानी, मंत्रिमंडल सचिवालय और निर्वाचन विभाग, लेकिन उनके उप मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद उनसे ज्यादा विभाग देखेंगे। हालांकि, इंजीनियर नीतीश कुमार अपने हर कार्यकाल में इतने ही विभाग को देखते आए हैं। उधर, महज 12वीं पास तारकिशोर प्रसाद को पहली बार उप मुख्यमंत्री बनाने के साथ ही 6 विभागों की जिम्मेदारी दे दी गई है। तारकिशोर इससे पहले कभी मंत्री नहीं रहे हैं, लेकिन उनके पोर्टफोलियो में वित्त, वाणिज्य, पर्यावरण, वन एवं जलवायु, सूचना प्रावैधिकी, आपदा प्रबंधन, नगर विकास एवं आवास विभाग शामिल हैं। ऐसे में पहली बार मंत्री बने तारकिशोर के लिए ये सभी विभाग संभालना मुश्किल होगा।

NDA को मिले जनादेश में भाजपा बड़े भाई की भूमिका में है। इस लिहाज से भाजपा को जदयू से अधिक विभाग मिले हैं। पहले की सरकार में डिप्टी सीएम समेत भाजपा कोटे से महज 13 लोग ही मंत्री थे, जबकि सीएम मिलाकर 22 लोग जदयू से मंत्री थे। आज स्थितियां पूरी तरह से बदल चुकी हैं। उप मुख्यमंत्री रेणु देवी को दिए गए तीनों विभागों पर जदयू का कब्जा था, अब भाजपा का हो गया है। वहीं गन्ना, विधि और आपदा विभाग भी पहले जदयू के कोटे में था, जो अब भाजपा में आ गया है। पशुपालन विभाग अब वीआईपी के मुकेश सहनी देखेंगे तो लघु जल संसाधन विभाग हम के संतोष मांझी। अभी भाजपा से सात मंत्री हैं, अगर विस्तार हुआ तो 12 और लोग मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। इस लिहाज से भाजपा के 19 मंत्री हो जाएंगे। वहीं, अभी जदयू से पांच मंत्री बने हैं, 10 और शपथ ले सकते हैं। बिहार में कुल 44 विभाग हैं, लेकिन यहां मंत्रियों के लिए 36 पद ही स्वीकृत किए गए हैं। जो विभाग बचते हैं, उन्हें मुख्यमंत्री देखते हैं।

इस बार विभागों के बंटवारे में दरियादिली दिखाई गई है। एक-एक को पांच-पांच विभागों की जिम्मेदारी दी गई है। विजय कुमार चौधरी को पांच तो अशोक चौधरी और विजेंद्र प्रसाद यादव को चार-चार विभाग दिए गए हैं। उप मुख्यमंत्री रेणु देवी, मंगल पांडेय, अमरेंद्र प्रताप और जीवेश कुमार को तीन-तीन विभाग देखने होंगे। रामसूरत राय और संतोष कुमार सुमन दो-दो विभागों की जिम्मेदारी देखेंगे। शीला कुमारी, मेवालाल चौधरी, मुकेश सहनी और रामप्रीत पासवान एक-एक विभाग में ही अपनी परफॉर्मेंस दिखाएंगे। अब जरा विभागों के कार्यालयों की भौगोलिक स्थिति को समझने की कोशिश करते है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सभी विभाग मुख्य सचिवालय में हैं। यानी वे अपने सभी विभागों में बराबर समय दे सकते हैं, लेकिन तारकिशोर प्रसाद के वित्त और वाणिज्य कर विभाग को छोड़कर सभी विभाग अलग-अलग भवनों में हैं। पर्यावरण, वन एवं जलवायु विभाग एयरपोर्ट रोड स्थित अरण्य भवन में है तो सूचना प्रावैधिकी विभाग बेली रोड के विश्वेश्वरैया भवन में है। आपदा प्रबंधन विभाग बेली रोड के सरदार पटेल भवन में है तो नगर विकास एवं आवास विभाग विकास भवन नया सचिवालय में है। अब तार किशोर प्रसाद को अपने सभी विभागों के काम को देखने के लिए रोज दफ्तर-दफ्तर दौड़ लगानी होगी।

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