RJD का 25वां स्थापना दिवस आज, लालू बोले-नेता कभी रिटायर नहीं होता, नीतीश से ब कबो दोस्ती न करेंगे

PATNA : आज राजद का 25वां स्थापना दिवस है। आज से पच्चीस साल पहले अपने राजनीतिक दोस्तों से अलग होकर लालू प्रसाद ने राष्ट्रीय जनता दल नामक एक दल बनाया था। इससे पहले वे, पासवान और नीतीश कुमार एक ही पार्टी जनता दल के लिए काम करते थे। इन 25 सालों में लालू ने कई उतार चढ़ाव देखे हैं। लालू प्रसाद ने वर्ष 1997 में जनता दल से अलग होकर राजद बनाया था। विपक्ष के आरोपों और कोर्ट-कचहरियों का सामना करते-करते उन्होंने अपनी सरकार बनायी, बचायी और विपक्ष में रहने पर भी राजद की ताकत बनाए रखी। जमानत के बाद दिल्ली में स्वास्थ्य लाभ कर रहे लालू ने पार्टी के सिल्वर जुबली के मौके पर हमारे विशेष संवाददाता इन्द्रभूषण से बातचीत की।

पटना से प्रकाशित अखबार दैनिक भास्कर में आज लालू का एक इंटरव्यू छपा है। इसमें सिंहनाद करते हुए लालू कहते हैं कि नेता कभी रिटायर नहीं होता, मार्गदर्शक तो ऊ हाफ पैंट वालों का कॉपीराइट है। लालू—नीतीश में फिर से दोस्ती होगी या नहीं इस पर उनका जवाब है कि यह काल्पनिक सवाल है। 2015 में हमने तमाम अंतर्विरोधों को दरकिनार कर महागठबंधन को जीत दिलाई। ज्यादा सीटें जीतीं, बावजूद नीतीश कुमार को सीएम बनाया। नीतीश ने पौने दो साल बाद ही उस अभूतपूर्व जनादेश के साथ क्या किया पूरा देश गवाह है। राजनीति में सिद्धांत, नीति, नियति और रीढ़ की हड्डी का महत्व अधिक है जो नीतीश खो चुके हैं।

पेश है मुख्य अंश..

{लालू-राबड़ी के 15 साल बनाम नीतीश के 15 साल को किस रूप में देखते हैं?
-यह तुलना बिना पूर्वाग्रह के आने वाला इतिहास करेगा। 1990-2005 के शासन काल का सामाजिक आर्थिक विश्लेषण करते हुए हमारी परफॉर्मेंस का आकलन करना होगा तब जाकर असली बात समझ में आएगी। विकास का प्रथम सूचकांक मानव विकास होता है। जिस गैर-बराबरी समाज में उच्च कुल-जात का व्यक्ति मात्र जन्म के आधार पर दूसरे को नीचा समझता है, उस समाज में बड़ी-बड़ी बिल्डिंग, पुल-पुलिया और हवाई अड्डे के बखान का क्या फायदा। पहले सभी को समान शिक्षा और स्वास्थ्य देना होगा। वंचित, उपेक्षितों को उनका हिस्सा देना होगा। हमने वही किया। वहीं नीतीश के 2005-2021 के कार्यकाल का प्रोपगंडा आधारित गवर्नेंस का सच अब पूरा देश जान चुका है। नीतीश के मंत्री-विधायक भी उनकी कार्यशैली का काला सच सामने ला रहे हैं। 90 के दशक की सबसे बड़ी जरूरत पिछड़ों और दलितों को उनका सम्मान और हक दिलाना था, जो हमने दिया। विरोधी भी दबी जुबान से ये उपलब्धि मानते हैं।

{आप राजनीति में फिर सक्रिय भूमिका निभाएंगे या मार्गदर्शक की तरह ही रहेंगे?
-नेता कभी रिटायर नहीं होता। राजनीतिक सक्रियता का अर्थ सिर्फ संसद और विधानसभाओं का चुनाव ही है क्या। मेरी राजनीति खेत-खलिहानों से लेकर सामाजिक न्याय और आखिरी पायदान पर खड़े लोगों को ऊपर उठाने की रही है जो आज भी जारी है। मार्गदर्शक तो ऊ हाफ पैंट वालों का कॉपीराइट है। हम तो गरीब-गुरबा के अधिकारों की लड़ाई के लिए पैदा हुए हैं और आखिरी सांस तक उनके लिए सक्रियता से लड़ते रहेंगे।

{आप किंगमेकर माने जाते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर किस विकल्प पर काम करेंगे?
-इ किंगमेकर का होता है। इ मीडिया का दिया हुआ नाम है। पूरी तरह स्वस्थ होने पर उस जनता के पास जाऊंगा जिनके प्यार ने मेरी बनावट तय की है। अभी सबसे बड़ी जरूरत वैकल्पिक कार्यक्रम तय करने की है। परेशान-हाल गरीब-गुरबा, निम्न आय वर्ग और मध्यम वर्ग को अनिश्चतता के कुंए से निजात दिलाने के लिए एक साझा कार्यक्रम तैयार करना होगा। उससे ही सही विकल्प सामने आएगा।

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