Friendship Day Special: हर गुजरते दिन के साथ और गहरी हो गई इन IAS-IPS की दोस्‍ती

Patna: दोस्ती से प्यारा कोई रिश्ता नहीं. दाेस्त से बढ़कर कोई हमदर्द नहीं. जीवन के हर उतार-चढ़ाव में जो साथ खड़ा है, वही सच्चा साथी है. दोस्ती की एक से बढ़कर एक मिसालें हमारे समाज में भरी पड़ी हैं. इसमें दोस्तोें ने अपने सगे-संबंधियों से बढ़कर रिश्ता निभाया. राज्य के प्रशासनिक अमले में भी दोस्ती की कई बेहतरीन कहानियां हैं. अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस पर हम कुछ ऐसे ही आइएएस-आइपीएस अधिकारियों के बारे में बता रहे हैं, जिनकी दोस्ती हर गुजरते दिन के साथ और गहरी हो रही है…

रांची के एसडीओ लोकेश मिश्र तथा रांची के ही सिटी एसपी सौरभ.

एक ही कमरे में रहकर ली ट्रेनिंग

रांची के वर्तमान उपायुक्त छवि रंजन तथा पूर्व उपायुक्त राय महिमापत रे गहरे दोस्त हैं. दोनों वर्ष 2011 में ट्रेनिंग के दौरान मसूरी में मिले. इसके बाद दोनों दिसंबर 2011 से जुलाई 2012 तक रूममेट रहे. महिमापत बताते हैं कि अक्सर देखा जाता है कि रूममेट होने पर या तो दुश्मनी हो जाती है या गहरी दोस्ती. हम भाग्यशाली हैं कि हमारे बीच गहरी दोस्ती हो गई.

छवि रंजन बहुत ही धैर्यवान हैं. उनका ये गुण मुझे बहुत प्रभावित करता है. एक समानता ये भी है कि हम दोनों ने एक ही तरह की परिस्थितयों में प्रेम विवाह किया. मेरी पत्नी लेक्चर हैं और उनकी पत्नी वकील. हम दोनों की पत्नियां भी गहरी दोस्त हैं. एक साथ दोनों को झारखंड कैडर मिला. छवि रंजन की प्रारंभिक शिक्षा झारखंड में हुई.

वहीं राय महिमापत रे उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं. दोनों ने दिल्ली के सेंट स्टीफेंस काॅलेज में पढ़ाई की. आज भी हर मुश्किल घड़ी में दोनों साथ-साथ रहते हैं. दोनों 2011 बैच के आइएएस अधिकारी हैं. ट्रेनिंग के दौरान की मस्ती को याद करते हुए महिमापत कहते हैं कि अक्सर हम लोग एक साथ प्रोग्राम बनाकर सुबह की पीटी बंक मार देते थे.

रांची के वर्तमान उपायुक्त छवि रंजन तथा पूर्व उपायुक्त राय महिमापत रे.

सूबे की राजधानी ने कराई गहरी दोस्ती रांची के एसडीओ लोकेश मिश्र तथा रांची के ही सिटी एसपी सौरभ मित्र हैं. दोनों की दोस्ती झारखंड की राजधानी रांची में 2019 में हुई. लोकेश 2016 बैच के सिविल सेवा के अधिकारी हैं तो सौरभ इसी बैच के पुलिस सेवा के अधिकारी. लोकेश बिहार कैडर के लिए चयनित हुए. वहीं सौरभ झारखंड कैडर के लिए चुने गए.

बाद में विवाह के कारण लोकेश ने अपना कैडर परिवर्तित कराकर झारखंड कर लिया. इन दोनों अधिकारियों के बीच एक दूसरे के प्रति बेहद सम्मान का भाव है. अपने-अपने व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन के हर छोटे-बड़े फैसलों में दोनों एक-दूसरे की राय जरूर लेते हैं. सौरभ हैं कि लोकेश बहुत समर्पित, मेहनती और गंभीर स्वभाव के व्यक्ति हैं. उनका यह गुण मुझे बहुत प्रभावित करता है.

इधर, लोकेश भी सौरभ को परिश्रमी और गंभीर अधिकारी बताते हैं. अपने काम के अनुभव साझा करते हुए लोकेश बताते हैं कि मैं उत्तर प्रदेश का और सौरभ बिहार के हैं. रांची में दोनों का पदस्थापन एक साथ हुआ. हम दोनों ने एक साथ चुनाव कराए. कोरोना के शुरुआती दिनों में हिंदपीढ़ी में माेर्चा संभाला. अब हम दोनों में दोस्ती इतनी गहरी हो गई है कि जब तक जीवन है, दोस्ती जिंदाबाद के नारे लगाते रहेंगे.

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