सब्जी बेचकर गरीब माँ-बाप ने बेटे को बना दिया IAS अफसर, UPSC में बना टॉपर, रो पड़े माता-पिता, मिला 8वां रैंक

सब्जी वाले का बेटा बना IAS अफसर, UPSC में बना टॉपर, रो पड़े माता-पिता, मिला 8वां रैंक

शरण गोपीनाथ कांबले ने लगातार तीन बार यूपीएससी परीक्षा पास की. साल 2019 में उन्होंने यूपीएससी सीएपीएफ़ में ऑल इंडिया रैंक 8 हासिल की. साल 2020 में यूपीएससी की सीएसई में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 542 हासिल की और आईपीएस बने. साल 2021 में उन्होंने यूपीएससी में ऑल इंडिया रैंक 127 हासिल की. उन्हें आईएफ़एस सर्विस कैडर मिला था, लेकिन उन्होंने आईपीएस को चुना. 

शरण ने अपनी स्कूली शिक्षा यशवंतराव चव्हाण स्कूल से पूरी की. इसके बाद उन्होंने विद्या मंदिर वैराग और वालचंद कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग सांगली से इंजीनियरिंग की. साल 2018 में उन्होंने IISc बैंगलोर से मास्टर्स ऑफ़ टेक्नोलॉजी की डिग्री हासिल की. 

शरण के पिता मजदूरी करते थे और मां सब्ज़ियां बेचकर उन्हें पढ़ाती थीं. शरण ने 20 लाख रुपये की नौकरी भी ठुकरा दी थी. 

शरण की पढ़ाई अच्छे से हो सके इसके लिए उनकी मां सब्जियां बेचती थीं और उनके पिता खेत में मजदूरी का काम किया करते थे. माता-पिता की कड़ी मेहनत और शिक्षा दिलाने के संकल्प के के कारण ही शरण के बड़े भाई ने भी बीटेक कर नौकरी हासिल की. बड़े भाई की नौकरी लगने के बाद घर की आर्थिक स्थिति में थोड़ा सुधार आया. जिसके बाद शरण को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दिल्ली भेज दिया गया.

शरण ने अपनी स्कूली शिक्षा यशवंतराव चव्हाण स्कूल से पूरी की और फिर विद्या मंदिर वैराग और वालचंद कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग सांगली से इंजीनियरिंग पूरी की. इसके बाद उन्होंने 2018 में IISc बैंगलोर से मास्टर्स ऑफ टेक्नोलॉजी की डिग्री प्राप्त की. भारतीय विज्ञान संस्थान बैंगलोर से एम.टेक पूरा करने के बाद, शरण को एक निजी कंपनी से 20 लाख प्रति वर्ष की नौकरी का प्रस्ताव मिला. शरण ने प्रस्ताव को ठुकराने का फैसला किया क्योंकि उनका मुख्य उद्देश्य यूपीएससी परीक्षाओं को पास कर अच्छी रैंक हासिल करना था. 

बेटे की सफलता पर उनके पिता ने कहा कि, “मुझे नहीं पता कि मेरा बेटा कहां तक और क्या पढ़ा है लेकिन मुझे पता है कि वह एक मास्टर बन गया.” कांबले परिवार मानता है कि परिवर्तन के चमत्कार केवल शिक्षा के माध्यम से हो सकते हैं. बच्चों को कड़ी मेहनत के माध्यम से सिखाया जाता है. उनके बच्चों ने अपने माता-पिता की कड़ी मेहनत को स्वर्णिम बना दिया.

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