एक कार्टून शराब के लिए हुआ था मधुबनी में नरसंहार, पोखर की जमीन तो मात्र एक बहाना है

होली के ​दिन मधुबनी के बेनीपट्टी स्थित महमुदपुर गांव में हुए नरसंहार कांड को लेकर रोज नए नए खुलासा हो रहे हैं। अब तक की कहानी के अनुसार यह घटना एक पोखर को लेकर घटित हुई है। हांलाकि ई समाद नामक पोर्टल ने ग्राउंट रिपोर्ट में दावा ​किया है कि यह सब बातें सिर्फ और सिर्फ भ्रामक हैं।यह सच है कि दोनों परिवार में जमीन को लेकर पुराना विवाद है जो जग विख्यात है। लेकिन होली दिन जो हुआ उसके पीछे सिर्फ और सिर्फ शराब का एक कार्टून मात्र हैं।

वेबसाइट ने दावा किया है कि स्थानीय लोगों के अनुसार वे लोगों दोनो परिवार से तंग आ चुके हैं। दोनो एक्का पर एक दबंग हैं। संत्येंद्र सिंह का परिवार तो पहले से ही दबंगा था। लेकिन नीतीश जी के शराबबंदी के बाद भोला सिंह भी एक नंबर का माफिया हो गया था। अवैध शराब के कारोबार के कारण नेता से लेकर पुलिस अधिकारियों तक उसकी पहुंच बन गई थी। इन लोगों के अुनसार वर्ष 1993 में इन दोनों परिवार के बीच हत्या का आरोप प्रत्यारोप हो चुका है। कई सालों तक केस मुकदमा चला।

स्थानीय लोगों के अुनसार गाम देहात में शराब कारोबारी खेत—चर—बगीचे में शराब छूपा के रखते हैं।लोगों का यह भी कहना है कि संजय सिंह के पोखर में भोल शराब छूपा कर रखता था। यही कारण है कि इन दोनों को पिछले छठ पूजा में विवाद हुआ था। एक पक्ष को लगा कि उसके पोखर में जबरन माछ मारा जा रहा है कि जबकि सत्यता यह थी कि वहां छुपाया गया शराब वापस लिया जा रहा था।

होली से एक दिन पहले भोला सिंह का एक ट्रक शराब आया था।इसी बीच सतेंद्र के परिवार ने उसमे से एक कार्टून शराब उठा लिया। भोला सिंह को जब यह पता चला तो उसने प्रवीण झा को पैसे लेने के लिए भेजा। पैसा मांगने पर सत्येंद्र के घर पर उसे बंधक बना लिया गया।कहा तो यह भी जा रहा है कि उसके साथ मारपीट भी की गई।फिर क्या था भोला सिंह ने इस बात करी जानकारी प्रवीण के भाई नवीन को दी और वे अपने साथियों के साथ पहुंच गया।इसके बाद वहां क्या हुआ यह हम और आप बहुत अच्छी तरह से जानते हैं।

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