दो जनवरी को मनेगा गुरु गोविंद सिंह की जयंती, पटना में होगा भव्य आयोजन

सिखों के 10वें गुरु गोविन्द सिंह महाराज के 11 अनमोल विचार और 20 अनमोल वचन!

गुरु गोविन्द सिंह जयंती, सिख धर्मं के दसवें और आखिरी गुरु, गुरु गोविन्द सिंह के जन्मोत्सव के अवसर पर मनाई जाती है। ग्रिगोरीअन कैलेंडर या पंचांग के अनुसार, यह जयंती कभी-कभी जनवरी या दिसम्बर के महीनों में पड़ती है, या एक ही वर्ष के भीतर, जनवरी और दिसम्बर के महीनों में पड़ जाती है।

विगत साल 2019 में यह 13 जनवरी को आयोजित हुआ था। साल 2020 में 2 जनवरी दिन गुरूवार को गुरु गोविन्द सिंह महाराज की जयंती मनाई जाएगी जबकि 2021 में 20 जनवरी दिन बुधवार को।

गुरु गोविन्द सिंह (Guru Gobind Singh) सिख धर्म के 10वें गुरु, दार्शनिक और कवि हैं। उन्‍होंने खालसा वाणी – “वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतह” दी। बैसाखी के दिन 1699 में उन्‍होंने खालसा पंथ (#KhalsaPanth) की स्‍थापना की थी।

यही नहीं, उन्‍होंने सिख धर्म के पवित्र ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब (Guru Granth Sahib) को पूरा किया था। उन्‍होंने खालसा पंथ की रक्षा के लिए मुगलों और उनके सहयोगियों से 14 युद्ध लड़े थे।

गुरु गोविन्द सिंह की गिनती महान लेखकों और रचनाकारों में होती है। उन्‍होंने ‘जाप’ साहिब, ‘अकाल उस्‍तत’, ‘बिचित्र नाटक’, ‘चंडी चरित्र’, ‘शास्‍त्र नाम माला’, ‘अथ पख्‍यां चरित्र लिख्‍यते’, ‘ज़फ़रनामा’ और ‘खालसा महिमा’ जैसी रचनाएं रचीं।

‘बिचित्र नाटक’ को उनकी आत्‍मकथा माना जाता है, जोकि ‘दसम ग्रन्थ’ का एक भाग है। आपको बता दें कि गुरु गोविन्द सिंह की कृतियों के संकलन का नाम ‘दसम ग्रंथ’ है। गुरु गोविन्द सिंह ने जीवन जीने के लिए पांच सिद्धांत दिए थे, जिन्‍हें ‘पांच ककार’ कहा जाता है।

पांच ककार का मतलब ‘क’ शब्द से शुरू होने वाली उन 5 चीजों से है, जिन्हें गुरु गोविन्द सिंह के सिद्धांतों के अनुसार सभी खालसा सिखों को धारण करना होता है। गुरु गोविंद सिंह ने सिखों के लिए पांच चीजें अनिवार्य की थीं- ‘केश’, ‘कड़ा’, ‘कृपाण’, ‘कंघा’ और ‘कच्छा’। इनके बिना खालसा वेश पूर्ण नहीं माना जाता है। इनमें केश सबसे पहले आते हैं।

इस बार 2 जनवरी को गुरु गोविन्द सिंह जयंती मनाई जा रही है। इस मौके पर हम आपको उनके प्रेरणादायी विचारों (Guru Gobind Singh Quotes) के बारे में बता रहे हैं। आज हम आपको रूबरू करा रहे हैं गुरु गोविन्द सिंह जी महाराज की 11 ऐसी बातों से जिन्हें जान कर आपकी जिंदगी बेहतर हो सकती है-धरम दी किरत करनी: अपनी जीविका ईमानदारी पूर्वक काम करते हुए चलाएं।

दसवंड देना: अपनी कमाई का दसवां हिस्सा दान में दे दें…गुरुबानी कंठ करनी: गुरुबानी को कंठस्थ कर लें…कम करन विच दरीदार नहीं करना: काम में खूब मेहनत करें और काम को लेकर कोताही न बरतें।

धन, जवानी, तै कुल जात दा अभिमान नै करना: अपनी जवानी, जाति और कुल धर्म को लेकर घमंडी होने से बचें…दुश्मन नाल साम, दाम, भेद, आदिक उपाय वर्तने अते उपरांत युद्ध करना: दुश्मन से भिड़ने पर पहले साम, दाम, दंड और भेद का सहारा लें, और अंत में ही आमने-सामने के युद्ध में पड़ें।

किसी दि निंदा, चुगली, अतै इर्खा नै करना: किसी की चुगली-निंदा से बचें और किसी से ईर्ष्या करने के बजाय मेहनत करें।परदेसी, लोरवान, दुखी, अपंग, मानुख दि यथाशक्त सेवा करनी: किसी भी विदेशी नागरिक, दुखी व्यक्ति, विकलांग व जरूरतमंद शख्स की मदद जरूर करें।

बचन करकै पालना: अपने सारे वादों पर खरा उतरने की कोशिश करें। शस्त्र विद्या अतै घोड़े दी सवारी दा अभ्यास करना: खुद को सुरक्षित रखने के लिए शारीरिक सौष्ठव, हथियार चलाने और घुड़सवारी की प्रैक्टिस जरूर करें। आज के संदर्भ में नियमित व्यायाम जरूर करें।जगत-जूठ तंबाकू बिखिया दी तियाग करना: किसी भी तरह के नशे और तंबाकू का सेवन न करें।

गुरु गोबिंद सिंह और सिखों के 10वें गुरु के 20 अनमोल वचन:- सवा लाख से एक लड़ाऊं, चिड़ियन ते मैं बाज तुड़ाऊं, तबै गुरु गोबिंद सिंह नाम कहाऊं!!””अगर आप केवल भविष्य के बारे में सोचते रहेंगे तो वर्तमान भी खो देंगे।”

“जब आप अपने अंदर से अहंकार मिटा देंगे तभी आपको वास्तविक शांति प्राप्त होगी।””मैं उन लोगों को पसंद करता हूँ जो सच्चाई के मार्ग पर चलते हैं।””ईश्वर ने हमें जन्म दिया है ताकि हम संसार में अच्छे काम करें और बुराई को दूर करें।”

“इंसान से प्रेम करना ही, ईश्वर की सच्ची आस्था और भक्ति है।””अच्छे कर्मों से ही आप ईश्वर को पा सकते हैं. अच्छे कर्म करने वालों की ही ईश्वर मदद करता है।””जो कोई भी मुझे भगवान कहे, वो नरक में चला जाए।”

“जब बाकी सभी तरीके विफल हो जाएं, तो हाथ में तलवार उठाना सही है।””असहायों पर अपनी तलवार चलाने के लिए उतावले मत हो, अन्यथा विधाता तुम्हारा खून बहाएगा।””सबसे महान सुख और स्थायी शांति तब प्राप्त होती है जब कोई अपने भीतर से स्वार्थ को समाप्त कर देता है।”

“हर कोई उस सच्चे गुरु की जयजयकार और प्रशंसा करे जो हमें भगवान की भक्ति के खजाने तक ले गया है।””भगवान के नाम के अलावा कोई मित्र नहीं है, भगवान के विनम्र सेवक इसी का चिंतन करते और इसी को देखते हैं।”

“सत्कर्म कर्म के द्वारा, तुम्हे सच्चा गुरु मिलेगा और उसके बाद प्रिय भगवान मिलेंगे, उनकी मधुर इच्छा से, तुम्‍हें उनकी दया का आशीर्वाद प्राप्त होगा।””अज्ञानी व्यक्ति पूरी तरह से अंधा है, वह मूल्यवान चीजों की कद्र नहीं करता है।”

“बिना गुरु के किसी को भगवान का नाम नहीं मिला है।””स्वार्थ ही अशुभ संकल्पों को जन्म देता है।””सेवक नानक भगवान के दास हैं, अपनी कृपा से, भगवान उनका सम्मान सुरक्षित रखते हैं।””हमेशा अपने दुश्मन से लड़ने से पहले साम, दाम, दंड और भेद का सहारा लें और अंत में ही आमने-सामने के युद्ध में पड़ें।”

“आप अपनी जवानी, जाति और कुल धर्म को लेकर कभी भी घमंडी ना बने उससे हमेशा बचे।”

(आजतक और एनडीटीवी से)

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